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नमी का पैसा काटकर धान खरीद करे सरकार
Updated Wed, 04 Oct 2017 12:47 AM IST
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रुद्रपुर। जिले में सरकारी धान खरीद केंद्रों पर 17 फीसदी नमी का मानक किसानों के लिए मुसीबत बना हुआ है। घर पर धान सुखाने की व्यवस्था न होने से किसानों को मजबूरी में आढ़तियों को औने-पौने दामों पर धान बेचना पड़ रहा है। किसानों ने मांग उठाई की नमी का पैसा काटकर समर्थन मूल्य पर धान खरीदा जाए।
ग्राम धरमपुर, रुद्रपुर निवासी किसान जगदीश सिंह ने कहा मंडी समिति के कर्मचारी आढ़तियों को फायदा पहुंचाने के लिए फड़ पर धान की बोली तक नहीं लगा रहे हैं। इस कारण आढ़ती मनमाने रेट पर धान खरीद रहे हैं। किसानों द्वारा विरोध करने पर धान न खरीदने की धमकी दी जा रही है। प्रतापपुर निवासी किसान सुधीर कुमार शाही कहते हैं कि सरकार नमी का बहाना बनाकर किसानों का धान खरीदने से बच रही है। इसकी फायदा उठाकर आढ़ती किसानों को लूट रहे हैं। यदि सरकार की नीयत साफ है तो धान में जितनी नमी मिलती है उसका पैसा काटकर किसानों का धान समर्थन मूल्य पर खरीदे। किसान इसके लिए तैयार हैं। रुद्रपुर निवासी किसान तजेंद्र सिंह विर्क ने कहा कि आढ़ती किसानों से समर्थन मूल्य से बेहद कम मूल्य में धान खरीदने के साथ ही घटतौली और अवैध कटौती भी कर रहे हैं। मलसी निवासी किसान नूर अहमद मलिक ने कहा कि बारिश से धान गीला होने से नमी अधिक आ गई थी, लेकिन सरकारी कर्मियों ने उनके धान की खरीद से हाथ खड़े कर दिए हैं। सरकार को नमी के मानकों में संशोधन करना चाहिए, ताकि किसानों को धान बेचने में समस्या न हो।
ग्राम धरमपुर, रुद्रपुर निवासी किसान जगदीश सिंह ने कहा मंडी समिति के कर्मचारी आढ़तियों को फायदा पहुंचाने के लिए फड़ पर धान की बोली तक नहीं लगा रहे हैं। इस कारण आढ़ती मनमाने रेट पर धान खरीद रहे हैं। किसानों द्वारा विरोध करने पर धान न खरीदने की धमकी दी जा रही है। प्रतापपुर निवासी किसान सुधीर कुमार शाही कहते हैं कि सरकार नमी का बहाना बनाकर किसानों का धान खरीदने से बच रही है। इसकी फायदा उठाकर आढ़ती किसानों को लूट रहे हैं। यदि सरकार की नीयत साफ है तो धान में जितनी नमी मिलती है उसका पैसा काटकर किसानों का धान समर्थन मूल्य पर खरीदे। किसान इसके लिए तैयार हैं। रुद्रपुर निवासी किसान तजेंद्र सिंह विर्क ने कहा कि आढ़ती किसानों से समर्थन मूल्य से बेहद कम मूल्य में धान खरीदने के साथ ही घटतौली और अवैध कटौती भी कर रहे हैं। मलसी निवासी किसान नूर अहमद मलिक ने कहा कि बारिश से धान गीला होने से नमी अधिक आ गई थी, लेकिन सरकारी कर्मियों ने उनके धान की खरीद से हाथ खड़े कर दिए हैं। सरकार को नमी के मानकों में संशोधन करना चाहिए, ताकि किसानों को धान बेचने में समस्या न हो।
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