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एनएच चौड़ीकरण में डिवाइडर सहित पौधे भी हटेंगे
Updated Sat, 31 Mar 2018 12:06 AM IST
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रुद्रपुर। एनएच-87 में शहर से सिडकुल मोड़ तक डिवाइडर में लाखों रुपयों की लागत से लगाए गए पौधे देखरेख के अभाव में सूख रहे हैं। एनएच चौड़ीकरण में डिवाइडर तोड़कर नए रूप में डिवाइडर बनेंगे तो पौधों के उजड़ने से लाखों रुपयों की बर्बादी भी होगी। पर्यावरण कार्यकर्ता की शिकायत का संज्ञान लेते हुए डीएम ने पौधों के अनुरक्षण में खर्च हुए बजट को लेकर जांच के आदेश दिए हैं।
वर्ष 2012 से पहले शहर से गुजरने वाला हल्द्वानी मार्ग प्रोजेक्ट यूनिट लोनिवि पंतनगर के अधीन था। इसके बाद यह सड़क एनएचएआई को हस्तांतरित हो गई थी। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2009 में शहर से सिडकुल मोड़ तक डिवाइडर में आठ लाख 47 हजार 320 रुपये की लागत से कनेर और बोगनवेलिया प्रजाति के 15 हजार 350 पौधे रोपे गए थे। इनके अनुरक्षण में तत्कालीन अफसरों ने 15 दिसंबर 2009 से 30 जून 2010 तक नौ लाख 29 हजार 217 रुपये खर्च कर डाले थे। कुल 17 लाख 76 हजार 537 रुपये खर्च कर दिए गए।
पौधों की दुर्दशा देखकर गौजाजाली हल्द्वानी निवासी डॉ. आशुतोष पंत ने वर्ष 2011 में डीएम कार्यालय के बाहर अनशन किया था। इसके बाद प्रशासन ने पौधों की सिंचाई की व्यवस्था कराई। डिवाइडर में पौधे रोपने और सात महीने तक अनुरक्षण में लाखों रुपये बहाने के बाद विभाग इनकी सुध लेना ही भूल गया। देखरेख के अभाव में कई जगहों पर पौधे सूख गए और उनका नामोनिशान ही खत्म हो गया।
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डॉ. आशुतोष के मुताबिक बीते 16 मार्च को उन्होंने डीएम से मिलकर इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद 21 मार्च को डीएम ने पीडब्लूडी अधिकारियों की बैठक में उनकी मौजूदगी में मामले की जांच के आदेश दिए थे। उनकी कोशिश है कि हजारों पौधों की दुर्दशा न हो।
शहर से सिडकुल मोड़ तक डिवाइडर में लगे पौधों के अनुरक्षण के नाम पर बजट खपाने की शिकायत पर जांच के आदेश दिए गए हैं। चौड़ीकरण की जद में आने की वजह यह पौधे हटेंगे, लेकिन इन्हें दूसरी जगह पर रोपा जा सकेगा।
- डॉ. नीरज खैरवाल, डीएम।
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- जब सड़क एनएचएआई को हस्तांतरित हुई थी तो सौंदर्यीकरण को लेकर कोई प्रस्ताव ही नहीं था। एनएच का चौड़ीकरण होने की वजह से डिवाइडर और पौधे तो हटने ही हैं। इस डिवाइडर की बजाय नया डिवाइडर बनना है।
- अनुज कुमार, एपीडी, एनएचएआई।
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वर्ष 2012 से पहले शहर से गुजरने वाला हल्द्वानी मार्ग प्रोजेक्ट यूनिट लोनिवि पंतनगर के अधीन था। इसके बाद यह सड़क एनएचएआई को हस्तांतरित हो गई थी। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2009 में शहर से सिडकुल मोड़ तक डिवाइडर में आठ लाख 47 हजार 320 रुपये की लागत से कनेर और बोगनवेलिया प्रजाति के 15 हजार 350 पौधे रोपे गए थे। इनके अनुरक्षण में तत्कालीन अफसरों ने 15 दिसंबर 2009 से 30 जून 2010 तक नौ लाख 29 हजार 217 रुपये खर्च कर डाले थे। कुल 17 लाख 76 हजार 537 रुपये खर्च कर दिए गए।
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पौधों की दुर्दशा देखकर गौजाजाली हल्द्वानी निवासी डॉ. आशुतोष पंत ने वर्ष 2011 में डीएम कार्यालय के बाहर अनशन किया था। इसके बाद प्रशासन ने पौधों की सिंचाई की व्यवस्था कराई। डिवाइडर में पौधे रोपने और सात महीने तक अनुरक्षण में लाखों रुपये बहाने के बाद विभाग इनकी सुध लेना ही भूल गया। देखरेख के अभाव में कई जगहों पर पौधे सूख गए और उनका नामोनिशान ही खत्म हो गया।
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डॉ. आशुतोष के मुताबिक बीते 16 मार्च को उन्होंने डीएम से मिलकर इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद 21 मार्च को डीएम ने पीडब्लूडी अधिकारियों की बैठक में उनकी मौजूदगी में मामले की जांच के आदेश दिए थे। उनकी कोशिश है कि हजारों पौधों की दुर्दशा न हो।
शहर से सिडकुल मोड़ तक डिवाइडर में लगे पौधों के अनुरक्षण के नाम पर बजट खपाने की शिकायत पर जांच के आदेश दिए गए हैं। चौड़ीकरण की जद में आने की वजह यह पौधे हटेंगे, लेकिन इन्हें दूसरी जगह पर रोपा जा सकेगा।
- डॉ. नीरज खैरवाल, डीएम।
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- जब सड़क एनएचएआई को हस्तांतरित हुई थी तो सौंदर्यीकरण को लेकर कोई प्रस्ताव ही नहीं था। एनएच का चौड़ीकरण होने की वजह से डिवाइडर और पौधे तो हटने ही हैं। इस डिवाइडर की बजाय नया डिवाइडर बनना है।
- अनुज कुमार, एपीडी, एनएचएआई।