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ब्रिगेडियर हैडः बारह सौ पाक सैनिकों को किया था ढेर
विद्याकांत शुक्ल/ अमर उजाला, कोटद्वार
Updated Thu, 26 Sep 2013 01:27 AM IST
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वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में छह जाट रेजीमेंट के कमान अधिकारी ब्रिगेडियर डीई हेड के नेतृत्व में जांबाजों ने कड़ा मुकाबला करते हुए पाकिस्तानी सेना के बारह सौ सैनिकों को ढेर कर दिया था।
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हालांकि सेना को युद्ध में 263 जवानों को खोना पड़ा। हेड को उनकी वीरता के लिए जहां भारत सरकार ने महावीर चक्र से नवाजा था, वहीं प्रदेश सरकार ने उन्हें वर्ष 2010 में ‘प्राइड आफ गढ़वाल’ सम्मान से अलंकृत किया।
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कमीशन अधिकारी के रूप में कैरियर की शुरूआत
27 नवंबर 1926 को बंगलूरू में जन्मे डीई हेड ने वर्ष 1947 में भारतीय सेना की जाट रेजीमेंट में बतौर कमीशन अधिकारी के रूप में कैरियर की शुरूआत की। वर्ष 1953 में बैरिस्टर मुकुंदी लाल की बेटी शीला के साथ वह विवाह बंधन में बंधे।
सेवानिवृत्त होने पर वह कोटद्वार आ गए
वर्ष 1978 में सेवानिवृत्त होने पर वह कोटद्वार आ गए। ससुर बैरिस्टर मुकुंदीलाल का स्वास्थ्य खराब होने से बंगलूरू की संपत्ति बेचकर वह स्थायी रूप से कोटद्वार में बस गए।
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यहां उन्होंने 1983 में गढ़वाल पूर्व सैनिक लीग की स्थापना की। उनके तीन पुत्र वाल्टर हेड, माइकल हेड और नार्मन हेड हैं जो इस वक्त विदेश में रहते हैं।
मकबूल फिदा हुसैन ने बनाई थी तस्वीर
प्रसिद्ध चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन ने ब्रिगेडियर डीई हेड से प्रभावित होकर उनकी तस्वीर बनाई थी। यह तस्वीर भारत-पाक युद्ध से एक दिन पहले ही तैयार की गई थी।
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लिखी थी कई पुस्तकें
लेखन क्षेत्र में भी डीई हेड का कोई जवाब नहीं था। उन्होंने बैटल आफ डोगराई नामक पुस्तक लिखी थी। वहीं एक और पुस्तक लिखकर लोगों को सेना से जुड़ा साहित्य दिया। फिलवक्त ब्रिगेडियर हेड ने अपने जीवन यात्रा पर पुस्तक लिखी है, जो अभी बाजार में नहीं आई है। वह अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में भी सेना का उत्साहवर्द्धन करने के लिए दुर्गम स्थानों में पहुंचते रहे।
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