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‘हिमालयी सुनामी’ से 60 गांवों में रोजगार का संकट
देहरादून/प्रेम प्रताप सिंह
Updated Mon, 24 Jun 2013 01:14 PM IST
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‘हिमालयी सुनामी’ का दर्द देशभर में लंबे समय तक महसूस किया जाएगा, लेकिन सुनामी से 60 से अधिक गांवों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। इन गांवों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।
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युवाओं से लेकर बुजुर्ग और महिलाओं तक के लिए घर चला पाना मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि, इन गांवों की पूरी अर्थव्यवस्था केदारनाथ यात्रा पर ही टिकी थी।
रोटी का संकट
केदारनाथ यात्रा छह महीने चलती है। इस बीच जुलाई और अगस्त में बारिश के कारण पर्यटक नहीं जा पाते। ऐसे में यात्रा सीजन केवल चार माह ही चल पाता है।
इस अवधि में ही 60 गांवों के लोगों को इतनी अधिक कमाई हो जाती है, जिससे लोग 12 महीने अपना जीवनयापन कर लेते हैं, लेकिन केदारनाथ यात्रा के बंद होने की स्थिति में इन गांवों के हजारों लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
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ग्रामीण दुकान, रेस्टोरेंट, होटल, हाट, खच्चर, वाहन आदि का व्यवसाय करके अपना जीवन यापन करते थे।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
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आपदा के कारण अब कब तक केदारनाथ की यात्रा शुरू हो पाएगी। यह बता पाना किसी के लिए संभव नहीं है, लेकिन इसका सीधा असर ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों की मानें तो केदारनाथ के ऊपर गांधी सरोवर फटने का जब तक वैज्ञानिक अध्ययन नहीं कराया जाता तब तक यात्रा शुरू कर पाना संभव नहीं है। इसमें तीन से चार साल का भी समय लग सकता है।
केदारनाथ की जब तक सुरक्षा पुख्ता नहीं की जाती। तब तक यात्रा शुरू करना खतरे से खाली नहीं है। क्योंकि, पानी ने अपना नया रास्ता बना लिया है। ऐसे में जितनी तेजी से कार्य शुरू किया जाएगा, उतना ही स्थानीय लोगों के हित में रहेगा। कितने समय में सुरक्षा पुख्ता की जा सकती है। यह अभी बता पाना संभव नहीं है।
- डा. चंदन घोष, प्रोफेशन इन हेड नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजास्टर मैनेजमेंट दिल्ली