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Tehri News: बैसाख की संक्रांति पर तरसौड़ का मेला शुरू
Tue, 14 Apr 2026 06:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Tue, 14 Apr 2026 06:59 PM IST
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कडीसौड़ (टिहरी)। बैसाख संक्रांति पर्व से पहाड़ में थौल मेलों की शुरूआत हो गई है। थौलधार ब्लॉक के कंडीसौड़ में संक्रांति पर्व पर तरसौड़ का मेला हुआ।
वर्ष 2005 से पूर्व भागीरथी नदी तट के समीप तरसौड़ का मेला आयोजित होता था। टिहरी बांध की झील बनने के बाद तरसौड़ का मेला कंडीसौड़ बाजार में लगता है। पूर्व ग्राम प्रधान जसोदा देवी, पुष्पा देवी बताती हैं कि बैसाख की संक्रांति (बिखोत) पर्व का बड़ा महत्व है। इसी दिन से शादी के साथ मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। स्थानीय निवासी गंगा प्रसाद खंडूड़ी ने बताया कि गत 20 वर्षों से कंडीसौड़ बाजार में ही मेले का आयोजित होता आ रहा है।
मेले में सहारनपुर, मुजफ्फनगर, खतौली, रुड़की से बड़ी संख्या में दुकानदार पहुंचते हैं। 65 वर्षीय दुकानदार युसूफ बताते हैं कि वे 20 साल की उम्र में पहाड़ में लगने वाले मेलों में चूड़ी-बिंदी आदि बेचने का काम करते आ रहे हैं लेकिन बदलते समय के साथ गांव-गांव में छोटी-छोटी दुकानें खुल गई है। सालभर में लगने वाले मेले में खरीद गए सामान यादें अलग ही रहती हैं। संवाद
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वर्ष 2005 से पूर्व भागीरथी नदी तट के समीप तरसौड़ का मेला आयोजित होता था। टिहरी बांध की झील बनने के बाद तरसौड़ का मेला कंडीसौड़ बाजार में लगता है। पूर्व ग्राम प्रधान जसोदा देवी, पुष्पा देवी बताती हैं कि बैसाख की संक्रांति (बिखोत) पर्व का बड़ा महत्व है। इसी दिन से शादी के साथ मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। स्थानीय निवासी गंगा प्रसाद खंडूड़ी ने बताया कि गत 20 वर्षों से कंडीसौड़ बाजार में ही मेले का आयोजित होता आ रहा है।
मेले में सहारनपुर, मुजफ्फनगर, खतौली, रुड़की से बड़ी संख्या में दुकानदार पहुंचते हैं। 65 वर्षीय दुकानदार युसूफ बताते हैं कि वे 20 साल की उम्र में पहाड़ में लगने वाले मेलों में चूड़ी-बिंदी आदि बेचने का काम करते आ रहे हैं लेकिन बदलते समय के साथ गांव-गांव में छोटी-छोटी दुकानें खुल गई है। सालभर में लगने वाले मेले में खरीद गए सामान यादें अलग ही रहती हैं। संवाद
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