{"_id":"60465ce18ebc3ee65001c36a","slug":"student-parag-chaudhary-made-rocket-in-one-year-new-tehri-news-drn373062035","type":"story","status":"publish","title_hn":"छात्र पराग चौधरी ने एक साल में बनाया रॉकेट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छात्र पराग चौधरी ने एक साल में बनाया रॉकेट
विज्ञापन
टीएचडीसी हाइड्रो पवार प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिक संस्थान मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र पराग चौधरी ने रॉकेट का मॉडल निर्माण कर सफलतापूर्वक परीक्षण करने में उपलब्धि हासिल की है। अब छात्र रॉकेट के रिकवरी सिस्टम को बेहतर करने की तैयारियों में लग गया है।
टीएचडीसी आईएचईटी के छात्र पराग चौधरी मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए एक साल से मॉडल रॉकेट तैयार करने जुटे थे। पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डा. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन से प्रभावित होकर पराग कॉलेज की डीन एकेडमिक डा. रमना त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रो. अमित कुमार और दिल्ली स्थित एसडीएनएक्स सेंटर फॉर स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी (एसडीएनएक्स सीएसआरटी) का मार्ग दर्शन में कुछ विशेष कंपोजिट और धातुओं का प्रयोग करके रॉकेट तैयार किया है। कठिन परिश्रम के बाद पांच मार्च को एसडीएनएक्स के रुड़की स्थित रॉकेट परीक्षण क्षेत्र में इसका सफल परीक्षण किया। उन्होंने सफलता का श्रेय डा. त्रिपाठी, एसडीएनएक्स के अंतरिक्ष अनुसंधान विशेषज्ञ गोविंद यादव, विजील एम उणणीत्तन को दिया है। बताया कि रॉकेट का परीक्षण सफल रहा। रॉकेट के रिकवरी सिस्टम को और मजबूत करने की आवश्यकता है। रुड़की निवासी पराग के पिता बृजेश किसान और मां प्रमिला देवी गृहणी है।
कॉलेज के फंड से बनाया रॉकेट का मॉडल
पराग ने रॉकेट को बनाने से पहले सॉफ्टवेयर की मदद से डिजाइन किया और उसका कंप्यूटर सिमुलेशन भी किया। उसके बाद कॉलेज के टीईक्यूयूआईपी-3 के ओर से दिए गए फंड से उन्होंने सभी जरूरी सामान, इलेक्ट्रानिक, केमिकल क्रय किया।
विज्ञापन
700 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा रॉकेट का मॉडल
रॉकेट ने करीब 700 मीटर की ऊंचाई को सफलता पूर्वक हासिल किया है। बताया दूसरे रॉकेट भी तैयार किया जा रहा है, जिसका परीक्षण टिहरी में प्रशासन के आदेश के बाद किया जाना है। दूसरा रॉकेट डेढ़ किमी की ऊंचाई तक उड़ेगा और वहां के तापमान, वायु गति और दबाव का पता लगाएगा।
विज्ञापन
टीएचडीसी आईएचईटी के छात्र पराग चौधरी मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए एक साल से मॉडल रॉकेट तैयार करने जुटे थे। पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डा. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन से प्रभावित होकर पराग कॉलेज की डीन एकेडमिक डा. रमना त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रो. अमित कुमार और दिल्ली स्थित एसडीएनएक्स सेंटर फॉर स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी (एसडीएनएक्स सीएसआरटी) का मार्ग दर्शन में कुछ विशेष कंपोजिट और धातुओं का प्रयोग करके रॉकेट तैयार किया है। कठिन परिश्रम के बाद पांच मार्च को एसडीएनएक्स के रुड़की स्थित रॉकेट परीक्षण क्षेत्र में इसका सफल परीक्षण किया। उन्होंने सफलता का श्रेय डा. त्रिपाठी, एसडीएनएक्स के अंतरिक्ष अनुसंधान विशेषज्ञ गोविंद यादव, विजील एम उणणीत्तन को दिया है। बताया कि रॉकेट का परीक्षण सफल रहा। रॉकेट के रिकवरी सिस्टम को और मजबूत करने की आवश्यकता है। रुड़की निवासी पराग के पिता बृजेश किसान और मां प्रमिला देवी गृहणी है।
विज्ञापन
कॉलेज के फंड से बनाया रॉकेट का मॉडल
पराग ने रॉकेट को बनाने से पहले सॉफ्टवेयर की मदद से डिजाइन किया और उसका कंप्यूटर सिमुलेशन भी किया। उसके बाद कॉलेज के टीईक्यूयूआईपी-3 के ओर से दिए गए फंड से उन्होंने सभी जरूरी सामान, इलेक्ट्रानिक, केमिकल क्रय किया।
विज्ञापन
700 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा रॉकेट का मॉडल
रॉकेट ने करीब 700 मीटर की ऊंचाई को सफलता पूर्वक हासिल किया है। बताया दूसरे रॉकेट भी तैयार किया जा रहा है, जिसका परीक्षण टिहरी में प्रशासन के आदेश के बाद किया जाना है। दूसरा रॉकेट डेढ़ किमी की ऊंचाई तक उड़ेगा और वहां के तापमान, वायु गति और दबाव का पता लगाएगा।