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मख्लवाणु गांव में धूमधाम से मनाई गई राज बग्वाल
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राजशाही के जमाने से मख्लवाणु में राज बग्वाल मनाने की परंपरा आज भी जिंदा है। गांव के लोगों ने छोटी दीपावली से एक दिन पूर्व स्वांले-पकोड़े बनाकर और भैले जलाकर राज बग्वाल का जश्न मनाया। पहाड़ी व्यंजनों से भगवान को भोग लगाने के बाद राज बग्वाल का पर्व मनाया गया। भैला खेलकर राज बग्वाल मनाई।
अब राजशाही रही न ही रजवाड़े हैं, फिर भी उनकी बनाई परंपराएं टिहरी में आज भी जीवंत हैं। पूरे देश में एक ही दिन दीपावली मनाई जाती है, लेकिन टिहरी में राजशाही के दौर से बड़ी दीपावली से दो दिन पूर्व इस त्योहार को मनाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में राज बग्वाल कहा जाता है। चंबा नगर क्षेत्र के नजदीकि मख्लवाणु गांव में तीन दिन तक दीपावली का पर्व मनाया जाता है। राजशाही के दौर से गांव में छोटी दिवाली से एक दिन पूर्व राज बग्वाल मनाने की परंपरा चली आ रही है। राज बग्वाल मनाने के लिए इस बार भी देहरादून और अन्य स्थानों से लोग गांव पहुंचे हैं। मंगलवार को ग्रामीण राज बग्वाल को मनाने के लिए रात को स्वांले-पकोड़े बनाए। रात को भैला खेला। गांव के दीवान सिंह कुंवर का कहना है कि राजशाही के समय से त्रयोदशी के दिन से बग्वाल (दीपावली) मनाई जा रही है। राजशाही के समय से बड़ी दीपावली से दो दिन पूर्व राज बग्वाल मनाने की परंपरा रही है।
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अब राजशाही रही न ही रजवाड़े हैं, फिर भी उनकी बनाई परंपराएं टिहरी में आज भी जीवंत हैं। पूरे देश में एक ही दिन दीपावली मनाई जाती है, लेकिन टिहरी में राजशाही के दौर से बड़ी दीपावली से दो दिन पूर्व इस त्योहार को मनाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में राज बग्वाल कहा जाता है। चंबा नगर क्षेत्र के नजदीकि मख्लवाणु गांव में तीन दिन तक दीपावली का पर्व मनाया जाता है। राजशाही के दौर से गांव में छोटी दिवाली से एक दिन पूर्व राज बग्वाल मनाने की परंपरा चली आ रही है। राज बग्वाल मनाने के लिए इस बार भी देहरादून और अन्य स्थानों से लोग गांव पहुंचे हैं। मंगलवार को ग्रामीण राज बग्वाल को मनाने के लिए रात को स्वांले-पकोड़े बनाए। रात को भैला खेला। गांव के दीवान सिंह कुंवर का कहना है कि राजशाही के समय से त्रयोदशी के दिन से बग्वाल (दीपावली) मनाई जा रही है। राजशाही के समय से बड़ी दीपावली से दो दिन पूर्व राज बग्वाल मनाने की परंपरा रही है।
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