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कृषि, बागवानी से हजारों कमा रहे प्रगतिशील किसान
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जाखणीधार ब्लॉक के गेंवली प्रगतिशील किसान सीताराम भट्ट ने कृषि, बागवानी और गाय पालन से स्वरोजगार कर अच्छी खास आय अर्जित कर रहे हैं। वह प्रत्येक सीजन में आलू, प्याज, टमाटर, गेंदा के फूल और दूध बेचकर करीब एक लाख से अधिक की आय कर रहे हैं। सीताराम की प्रेरणा से गांव के अन्य किसान भी आय और प्याज की खेती करने लगे हैं।
गेंवली निवासी सीताराम भट्ट ने गांव में स्थित अपनी पैतृक भूमि पर तीन-चार साल पहले से खेती किसानी की शुरूआत की थी। उन्होंने शुरूआती दौर में आम, अमरूद आदि की पौध लगाई थी। इसके बाद उन्होंने प्याज, आलू, शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर, लहसुन और गेंदा के फूल भी लगाने शुरू किए। वर्तमान में प्रत्येक सीजन में आठ से 10 क्विंटल आलू, चार क्विंटल प्याज, दो से तीन क्विंटल खीरा, शिमला मिर्च से लेकर अन्य फसलों का बड़ी में मात्रा में उत्पादन कर रहे हैं। साथ ही ग्रामीण डाकघर पातनदेवी में ब्रांच पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत उनकी पत्नी कुसुमलता भट्ट भी समय निकालकर पशुपालन कर रही है। उन्होंने दो गाय रखी हैं, जिनसे प्रत्येक माह 10 से 12 हजार दूध बेचकर कमा रही हैं।
जिला उद्यान अधिकारी डा. डीके तिवारी के सहयोग से उन्होंने पॉली हाउस भी बनाया है, जबकि सेवा-टीएचडीसी ने भी उनका सहयोग किया है। भट्ट कहते हैं कि खेती ही स्थायी रोजगार का साधन है। बिना खेती और पशुपालन के आजीविका नहीं चल सकती है।
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गेंवली निवासी सीताराम भट्ट ने गांव में स्थित अपनी पैतृक भूमि पर तीन-चार साल पहले से खेती किसानी की शुरूआत की थी। उन्होंने शुरूआती दौर में आम, अमरूद आदि की पौध लगाई थी। इसके बाद उन्होंने प्याज, आलू, शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर, लहसुन और गेंदा के फूल भी लगाने शुरू किए। वर्तमान में प्रत्येक सीजन में आठ से 10 क्विंटल आलू, चार क्विंटल प्याज, दो से तीन क्विंटल खीरा, शिमला मिर्च से लेकर अन्य फसलों का बड़ी में मात्रा में उत्पादन कर रहे हैं। साथ ही ग्रामीण डाकघर पातनदेवी में ब्रांच पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत उनकी पत्नी कुसुमलता भट्ट भी समय निकालकर पशुपालन कर रही है। उन्होंने दो गाय रखी हैं, जिनसे प्रत्येक माह 10 से 12 हजार दूध बेचकर कमा रही हैं।
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जिला उद्यान अधिकारी डा. डीके तिवारी के सहयोग से उन्होंने पॉली हाउस भी बनाया है, जबकि सेवा-टीएचडीसी ने भी उनका सहयोग किया है। भट्ट कहते हैं कि खेती ही स्थायी रोजगार का साधन है। बिना खेती और पशुपालन के आजीविका नहीं चल सकती है।
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