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Tehri News: सुविधाओं के अभाव में सूना पड़ा नई टिहरी का अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
Sat, 19 Jul 2025 05:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sat, 19 Jul 2025 05:25 PM IST
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90 के दशक में बनाया गया था लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए
नई टिहरी। शहर को बसाने के दौरान 90 के दशक में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए बना अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) इन दिनों बदहाल स्थिति में है। जिला अस्पताल के करीब होने और सुविधाओं की कमी के कारण यहां मरीजों की संख्या लगातार घट रही है जिससे यह केंद्र अपनी अहमियत खोता जा रहा है।
एक समय बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज करने वाला यह केंद्र वर्ष 2000 में सरकारी कार्यालयों और जिला अस्पताल के पुरानी टिहरी से नई टिहरी स्थानांतरित होने के साथ ही कमजोर पड़ने लगा। बौराड़ी में जिला अस्पताल खुलने के बाद एपीएचससी के अधिकांश डॉक्टरों और स्टाफ को वहीं भेज दिया गया। इससे एपीएचसी में स्टाफ कम हो गया और मरीजों की संख्या में भी गिरावट आई।
कुछ सालों तक एपीएचसी में जच्चा-बच्चा टीकाकरण की सुविधाएं थीं लेकिन जिला अस्पताल में यह सेवा शुरू होने के बाद ज्यादातर लोग वहीं जाने लगे। अब तो सिर्फ आसपास रहने वाले लोग ही टीकाकरण के लिए आते हैं। सुविधाओं की कमी के चलते यहां आने वाले इक्का-दुक्का मरीजों को भी अक्सर जिला अस्पताल ही भेज दिया जाता है।
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फिलहाल एपीएचसी में एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट और एक सफाई कर्मचारी ही कार्यरत हैं। यहां सिर्फ जच्चा-बच्चा टीकाकरण और मामूली चोटों पर मरहम-पट्टी जैसे सीमित काम ही होते हैं। कोविड-19 के दौरान इसे कोविड जांच केंद्र बनाया गया था लेकिन अब इसकी भूमिका बहुत कम रह गई है।
मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. श्याम विजय ने बताया कि जिला अस्पताल पास होने के कारण एपीएचसी में अब बहुत कम मरीज आते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों का टीकाकरण यहां अभी भी जारी है और अब यहां के डॉक्टर व अन्य स्टाफ को जेल के बंदियों की स्वास्थ्य जांच का काम सौंपने की योजना बन रही है जिससे जिला अस्पताल का बोझ कम हो सके।
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नई टिहरी। शहर को बसाने के दौरान 90 के दशक में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए बना अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) इन दिनों बदहाल स्थिति में है। जिला अस्पताल के करीब होने और सुविधाओं की कमी के कारण यहां मरीजों की संख्या लगातार घट रही है जिससे यह केंद्र अपनी अहमियत खोता जा रहा है।
एक समय बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज करने वाला यह केंद्र वर्ष 2000 में सरकारी कार्यालयों और जिला अस्पताल के पुरानी टिहरी से नई टिहरी स्थानांतरित होने के साथ ही कमजोर पड़ने लगा। बौराड़ी में जिला अस्पताल खुलने के बाद एपीएचससी के अधिकांश डॉक्टरों और स्टाफ को वहीं भेज दिया गया। इससे एपीएचसी में स्टाफ कम हो गया और मरीजों की संख्या में भी गिरावट आई।
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कुछ सालों तक एपीएचसी में जच्चा-बच्चा टीकाकरण की सुविधाएं थीं लेकिन जिला अस्पताल में यह सेवा शुरू होने के बाद ज्यादातर लोग वहीं जाने लगे। अब तो सिर्फ आसपास रहने वाले लोग ही टीकाकरण के लिए आते हैं। सुविधाओं की कमी के चलते यहां आने वाले इक्का-दुक्का मरीजों को भी अक्सर जिला अस्पताल ही भेज दिया जाता है।
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फिलहाल एपीएचसी में एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट और एक सफाई कर्मचारी ही कार्यरत हैं। यहां सिर्फ जच्चा-बच्चा टीकाकरण और मामूली चोटों पर मरहम-पट्टी जैसे सीमित काम ही होते हैं। कोविड-19 के दौरान इसे कोविड जांच केंद्र बनाया गया था लेकिन अब इसकी भूमिका बहुत कम रह गई है।
मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. श्याम विजय ने बताया कि जिला अस्पताल पास होने के कारण एपीएचसी में अब बहुत कम मरीज आते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों का टीकाकरण यहां अभी भी जारी है और अब यहां के डॉक्टर व अन्य स्टाफ को जेल के बंदियों की स्वास्थ्य जांच का काम सौंपने की योजना बन रही है जिससे जिला अस्पताल का बोझ कम हो सके।