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महाशिवरात्रि के लिए सजे भोले के द्वार, चार प्रहर की पूजा के बाद शुरू होगा जलाभिषेक

Wed, 10 Mar 2021 09:22 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 10 Mar 2021 09:22 PM IST
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Jalabhishek will start after the worship of the four poles
महाशिवरात्रि के लिए भोले के द्वार सज गए है। भोले के मंदिरों में सुबह चार बजे चार प्रहर की पूजा-अर्चना शुरू होते ही शिव का अभिषेक शुरू होगा। इसके लिए शिवालयों को सजा दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस भी तैयारियों में जुट गई है।
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प्रतापनगर ब्लॉक के सिद्धपीठ ओणेश्वर महादेव में शिवरात्रि पर दो दिन तक मेला लगेगा। मान्यता है कि निसंतान दंपतियों को यहां शिवरात्रि पर खड़े दीये की पूजा कर संतान सुख प्राप्त होता है। क्वीली पालकोट के चाका क्षेत्र में भागीरथी के तट पर भगवान शिव का पौराणिक मंदिर है। भागीरथी के तट पर स्थित यह मंदिर कोटेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। यहां पर गंगा उत्तर वाहिनी होकर बहती है। कोटेश्वर मंदिर में भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग है। भिलंगना ब्लॅाक के बेलेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। जाखणीधार ब्लॉक के देवलसारी महादेव मंदिर को महाशिवरात्रि के मध्यनजर फूलों से सजाया गया है। मंदिर के पुजारी गगन भट्ट ने बताया कि सुबह चार बजे सबसे पहले चार प्रहर की पूजा होगी।
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शिवरात्रि से शुरू होगा भगवान कुबेर के मंदिर का निर्माण
राजस्थान से आए नक्काशीदार पत्थर, 1.5 करोड़ रुपये में बनेगा भव्य मंदिर
संवाद न्यूज एजेंसी
जोशीमठ। भगवान बदरीविशाल के सखा कुबेर और उद्धव के शीतकालीन गद्दी स्थल पांडुकेश्वर में जल्द भव्य कुबेर मंदिर बनेगा। शिवरात्रि पर्व पर मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। राजस्थान से मंदिर निर्माण के लिए नक्काशीदार पत्थर पहुंच गए हैं।
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बृहस्पतिवार को पांडुकेश्वर गांव में भगवान कुबेर की पूजा के बाद मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। वहीं पांडुकेश्वर गांव में धार्मिक अनुष्ठान भी किया जाएगा। स्थानीय निवासी राजेश मेहता ने बताया कि कुबेर देवरा समिति मंदिर का निर्माण करवा रही है। मंदिर की लागत करीब डेढ़ करोड़ रुपये होगी। वहीं योगी बाबा बालकनाथ का कहना है कि भगवान कुबेर भगवान शिव के प्रिय सखा हैं। इसलिए यह नेक कार्य शिवरात्रि पर किया जा रहा है। बुधवार को तैयारियों को लेकर कुबेर देवरा समिति के अध्यक्ष अनूप भंडारी, बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन उनियाल, पांडुकेश्वर की प्रधान बबीता देवी, रामनारायण भंडारी, परमजीत भंडारी, अखिल पंवार, भगत मेहता, जसवीर मेहता मौजूद थे।

फोटो
‘श्रीकृष्ण ने दिया था शिव को गोपीनाथ नाम’
गोपेश्वर। नगर स्थित गोपीनाथ मंदिर प्राचीन एवं पवित्रतम तीर्थ है। बताया जाता है कि भगवान श्री कृष्ण जब गोपियों संग रासलीला कर रहे थे, तो शिव में भी रासलीला की इच्छा जागृत हुई। तब शिव ने गोपी रूप धारण किया। श्रीकृष्ण ने शिव का पहचान लिया और उन्होंने भोलेनाथ को गोपीनाथ का नाम दिया। तब से यहां भगवान शिव को गोपीनाथ के नाम से जाना जाता है। पूर्व से ही यहां गोपीनाथ का मंदिर होने के कारण ही नगर का नाम गोपेश्वर पड़ा। आचार्य बाल व्यास महादेव भट्ट बताते हैं कि राजा सगर की एक हजार गाय थी। ग्वाले उनकी गायों को चराने के लिए हिमालय के इस क्षेत्र में आते थे। जिनमें से एक गाय सदैव जंगल में स्थित एक शिवलिंग को अपने दूध से स्नान करवाती थी। यह बात जब राजा सगर को बताई गई, तो उन्होंने स्वयं यहां शिव मंदिर की स्थापना करवाई थी। संवाद
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