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Tehri News: चालकों की जांच से खुलेगा हादसों का राज
Thu, 08 Oct 2026 05:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Thu, 08 Oct 2026 05:14 PM IST
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वाहन चालकों की सेहत से बढ़ते हादसों की वजह तलाश रहा परिवहन विभाग
चालकों की नींद, नशा और तनाव की जा रही पड़ताल
नई टिहरी। जिले में बढ़ते वाहन हादसों के असल कारणों की पड़ताल के लिए परिवहन विभाग अब सड़क पर उतरकर चालकों का सर्वे कर रहा है। वाहन हादसे के बाद चालक की लापरवाही, तेज गति या चूक को कारण मानने के बजाय विभाग यह जानने में जुटा है कि हादसे के वक्त चालक की शारीरिक और मानसिक स्थिति कैसी थी।
मोबाइल हेल्थ वैन के माध्यम से जिलेभर के वाहन चालकों की जांच और उनकी कामकाजी परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है। पड़ताल की जरूरत इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि जिले में गत वर्ष जनवरी से अगस्त 2025 की तुलना में इसी अवधि में 2026 में हादसे 43 से बढ़कर 61 हो गए। एक साल में हादसों में करीब 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल के निर्देश पर शुरू हुए अभियान में चालक का ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और आंखों की रोशनी जांची जा रही है। चालक रोजाना कितने घंटे वाहन चलाता है और उसे पर्याप्त आराम मिलता है या नहीं, यह भी दर्ज किया जा रहा है।
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देवप्रयाग, साबली और नई टिहरी में लगाए गए शिविरों में अब तक करीब 870 चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। बृहस्पतिवार को नई टिहरी-भागीरथीपुरम मार्ग पर लगाए गए मोबाइल हेल्थ कैंप में चालकों की आंखों, बीपी और ब्लड शुगर की जांच की गई। जांच में मनोचिकित्सक को भी शामिल किया गया है।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. नीरज कर्दम चालकों से उनकी नींद, नशे की आदत, मानसिक दबाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बारे में जानकारी पूछ रहे। निजी वाहन चालकों से भी उनकी आमदनी और काम के घंटों के बारे में पूछा जा रहा है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कम मानदेय, ज्यादा घंटे वाहन चलाना और पर्याप्त आराम नहीं मिलना कहीं चालक में तनाव और थकान तो नहीं बढ़ा रहा।
वाहन हादसों में अक्सर चालक की लापरवाही या तेज गति व अन्य कारण सामने आते हैं लेकिन इनके पीछे चालक की वास्तविक शारीरिक और मानसिक स्थिति क्या थी यह जानना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से चालकों की स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और काम की परिस्थितियों का डाटा जुटाया जा रहा है।
ज्योति शंकर मिश्रा, एआरटीओ टिहरी
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चालकों की नींद, नशा और तनाव की जा रही पड़ताल
नई टिहरी। जिले में बढ़ते वाहन हादसों के असल कारणों की पड़ताल के लिए परिवहन विभाग अब सड़क पर उतरकर चालकों का सर्वे कर रहा है। वाहन हादसे के बाद चालक की लापरवाही, तेज गति या चूक को कारण मानने के बजाय विभाग यह जानने में जुटा है कि हादसे के वक्त चालक की शारीरिक और मानसिक स्थिति कैसी थी।
मोबाइल हेल्थ वैन के माध्यम से जिलेभर के वाहन चालकों की जांच और उनकी कामकाजी परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है। पड़ताल की जरूरत इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि जिले में गत वर्ष जनवरी से अगस्त 2025 की तुलना में इसी अवधि में 2026 में हादसे 43 से बढ़कर 61 हो गए। एक साल में हादसों में करीब 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
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जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल के निर्देश पर शुरू हुए अभियान में चालक का ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और आंखों की रोशनी जांची जा रही है। चालक रोजाना कितने घंटे वाहन चलाता है और उसे पर्याप्त आराम मिलता है या नहीं, यह भी दर्ज किया जा रहा है।
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देवप्रयाग, साबली और नई टिहरी में लगाए गए शिविरों में अब तक करीब 870 चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। बृहस्पतिवार को नई टिहरी-भागीरथीपुरम मार्ग पर लगाए गए मोबाइल हेल्थ कैंप में चालकों की आंखों, बीपी और ब्लड शुगर की जांच की गई। जांच में मनोचिकित्सक को भी शामिल किया गया है।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. नीरज कर्दम चालकों से उनकी नींद, नशे की आदत, मानसिक दबाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बारे में जानकारी पूछ रहे। निजी वाहन चालकों से भी उनकी आमदनी और काम के घंटों के बारे में पूछा जा रहा है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कम मानदेय, ज्यादा घंटे वाहन चलाना और पर्याप्त आराम नहीं मिलना कहीं चालक में तनाव और थकान तो नहीं बढ़ा रहा।
वाहन हादसों में अक्सर चालक की लापरवाही या तेज गति व अन्य कारण सामने आते हैं लेकिन इनके पीछे चालक की वास्तविक शारीरिक और मानसिक स्थिति क्या थी यह जानना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से चालकों की स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और काम की परिस्थितियों का डाटा जुटाया जा रहा है।
ज्योति शंकर मिश्रा, एआरटीओ टिहरी