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अदवाणी के जंगल जलने पर चढ़ा लोगों का पारा
ब्यूरो/अमर उजाला टिहरी
Updated Sun, 01 May 2016 10:36 PM IST
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प्रदर्शन
- फोटो : amarujala
अदवाणी का शाल, चीड़ मिश्रित जंगल आग की भेंट चढ़ने से गुस्साए लोगों ने वन विभाग के खिलाफ खाड़ी में प्रदर्शन किया। उन्होंने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए राज्यपाल से दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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विकासखंड नरेंद्रनगर का अदवाणी के जंगल का नाम चिपको आंदोलन से जुड़ा हुआ है। यहां शाल और चीड़ का मिश्रित जंगल है। 1970 के दशक में इसी जंगल में पहले ग्रामीणों ने नियम विरुद्ध चीड़ के पेड़ों से लीसा निकालने का विरोध किया था।
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बाद में जंगल की नीलामी होने पर ग्रामीणों ने पेड़ों से चिपककर सैकड़ों हरे पेड़ों पर आरियां चलने से बचाया था। आग से वनों को समय पर न बचाए जाने पर गुस्साए ग्रामीणों ने रविवार को खाड़ी में वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। कहा कि वन विभाग के समय पर नहीं पहुंचने से क्षेत्र के जंगलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
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प्रदर्शनकारियों में जिला पंचायत सदस्य अनिल भंडारी, बिजेंद्र पंवार, विजयपाल रौतेला, पप्पू राणा, अखिल कोठियाल, रविंद्र सजवाण, राजपाल गुंसाईं, दिनेश नेगी, रिनेश भंडारी, प्रेम सिंह नेगी आदि शामिल थे। इधर, चिपको आंदोलन से जुड़े धूम सिंह नेगी ने सरकारी तंत्र यदि समय पर सक्रिय हो जाता, तो जंगल बच सकता था।