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Tehri News: बागवानी स्वरोजगार का अच्छा साधन है, पौधों की देखभाल जरूरी
Sun, 16 Feb 2025 05:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sun, 16 Feb 2025 05:42 PM IST
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उद्यान पंडित पंवार ने काश्तकारों को गोष्ठी में बताएं बागवानी के गुर
नैनबाग के पाव गांव में हरेला गांव धाद गोष्ठी का हुआ आयोजन
नैनबाग (टिहरी)। नैनबाग में पाव गांव के नारायणी बागवानी में हरेला गांव धाद संवाद गोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्यान पंडित कुंदन सिंह पंवार ने काश्तकारों को आडू, पुलम, खुमानी आदि फलदार पौधों की बागवानी करने के गुर बताए। कहा कि बागवानी स्वरोजगार का अच्छा साधन है, लेकिन इसके पौधों की देखभाल बहुत जरूरी है।
ग्राम पंचायत पाव में नारायणी बागवानी में आयोजित हरेला गांव धाद संस्था की ओर से आयोजित संवाद गोष्ठी में उद्यान पंडित पंवार ने बताया कि उन्होंने 30 वर्ष पूर्व गांव में नारायणी बागवानी की नींव रखी थी। उनकी बागवानी में सेब, आडू, खुमानी, पुलम, नाशपति, अखरोट, कीवी, अमरुद, लीची आदि के विभिन्न प्रजाति के फलदार पौधे हैं।
उन्होंने डॉ़ वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी सोलन हिमाचल प्रदेश, भारत इटली फल विकास परियोजना ढकरानी देहरादून, राजकीय उद्यान चौबटिया रानीखेत सहित विभिन्न उद्यानों से उन्नत किस्मों के पौधों का बागवानी में रोपण किया है, जिसकी बदोलत आज वह एक सफल उद्यमियों की सूची में शामिल है। पूर्व उद्यान अधिकारी डॉ़ राजेंद्र कुकसाल ने काश्तकारों को बागवानी में अच्छे किस्म के पौधों का रोपण की सलाह दी।
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इस मौके पर हरेला गांव धाद संस्था के सचिव तन्मय ममगाईं, किशन पंवार, चैन सिंह पंवार, विरेंद्र सिंह मलियाल, राजेश सजवाण, संदीप चौहान, रामचंद्र रावत, राम प्रसाद सेमवाल, सोबन सिंह थुरेटी, सत्ते सिंह बिष्ट मौजूद थे।
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नैनबाग के पाव गांव में हरेला गांव धाद गोष्ठी का हुआ आयोजन
नैनबाग (टिहरी)। नैनबाग में पाव गांव के नारायणी बागवानी में हरेला गांव धाद संवाद गोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्यान पंडित कुंदन सिंह पंवार ने काश्तकारों को आडू, पुलम, खुमानी आदि फलदार पौधों की बागवानी करने के गुर बताए। कहा कि बागवानी स्वरोजगार का अच्छा साधन है, लेकिन इसके पौधों की देखभाल बहुत जरूरी है।
ग्राम पंचायत पाव में नारायणी बागवानी में आयोजित हरेला गांव धाद संस्था की ओर से आयोजित संवाद गोष्ठी में उद्यान पंडित पंवार ने बताया कि उन्होंने 30 वर्ष पूर्व गांव में नारायणी बागवानी की नींव रखी थी। उनकी बागवानी में सेब, आडू, खुमानी, पुलम, नाशपति, अखरोट, कीवी, अमरुद, लीची आदि के विभिन्न प्रजाति के फलदार पौधे हैं।
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उन्होंने डॉ़ वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी सोलन हिमाचल प्रदेश, भारत इटली फल विकास परियोजना ढकरानी देहरादून, राजकीय उद्यान चौबटिया रानीखेत सहित विभिन्न उद्यानों से उन्नत किस्मों के पौधों का बागवानी में रोपण किया है, जिसकी बदोलत आज वह एक सफल उद्यमियों की सूची में शामिल है। पूर्व उद्यान अधिकारी डॉ़ राजेंद्र कुकसाल ने काश्तकारों को बागवानी में अच्छे किस्म के पौधों का रोपण की सलाह दी।
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इस मौके पर हरेला गांव धाद संस्था के सचिव तन्मय ममगाईं, किशन पंवार, चैन सिंह पंवार, विरेंद्र सिंह मलियाल, राजेश सजवाण, संदीप चौहान, रामचंद्र रावत, राम प्रसाद सेमवाल, सोबन सिंह थुरेटी, सत्ते सिंह बिष्ट मौजूद थे।