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सिर्फ नाम का है बस अड्डा, सुविधाएं नदारद
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स्वदेश दर्शन योजना के तहत बौराड़ी में बनाई गई कार पार्किंग शोपीस बनी हुई है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद पर्यटन विभाग को पार्किंग का संचालन करने के लिए कोई ठेकेदार नहीं मिल पा रहा है, जिससे यह पार्किंग छह माह से निराश्रित पशुओं का अड्डा बन गई है।
पर्यटन विभाग ने बौराड़ी में करीब 3.70 करोड़ की लागत से दो मंजिला कार पार्किंग का निर्माण किया है। सात साल बाद दिसंबर में बनकर तैयार की गई पार्किंग में 46 कार पार्क की जा सकती है। इस पार्किंग को पर्यटन विभाग ठेके पर संचालित कराना चाहता है, इसके लिए विभाग ने अप्रैल माह में निविदा भी जारी थी। लेकिन यहां अभी तक पर्यटकों का आवागमन बहुत सीमित होने के कारण विभाग को पार्किंग का संचालन करने के लिए कोई ठेकेदार नहीं मिल पा रहा है। जिससे करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई पार्किंग शोपीस बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वाहन पार्क करने के लिए पार्किंग की जरूरत तो है, लेकिन हर दिन बाजार में खरीदारी करने आने वाले लोगों का पार्किंग शुल्क चुकाना खासा मुश्किल है।
बौराड़ी में बनाई गई कार पार्किंग की निविदा देहरादून से प्रकाशित कराई गई थी। एक ठेकेदार ने आवेदन किया था, लेकिन वह सभी औपचारिकता पूरी नहीं कर पाए, जिससे अभी तक आवंटन नहीं हो पाया है। ठेकेदार ने सभी शर्तें पूरी नहीं की, तो निविदा फिर से जारी की जा सकती है। निशुल्क सुविधा देने पर मुख्यालय से ही कोई निर्णय लिया जा सकता है। - अतुल भंडारी, जिला पर्यटन अधिकारी, नई टिहरी।
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पर्यटन विभाग ने बौराड़ी में करीब 3.70 करोड़ की लागत से दो मंजिला कार पार्किंग का निर्माण किया है। सात साल बाद दिसंबर में बनकर तैयार की गई पार्किंग में 46 कार पार्क की जा सकती है। इस पार्किंग को पर्यटन विभाग ठेके पर संचालित कराना चाहता है, इसके लिए विभाग ने अप्रैल माह में निविदा भी जारी थी। लेकिन यहां अभी तक पर्यटकों का आवागमन बहुत सीमित होने के कारण विभाग को पार्किंग का संचालन करने के लिए कोई ठेकेदार नहीं मिल पा रहा है। जिससे करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई पार्किंग शोपीस बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वाहन पार्क करने के लिए पार्किंग की जरूरत तो है, लेकिन हर दिन बाजार में खरीदारी करने आने वाले लोगों का पार्किंग शुल्क चुकाना खासा मुश्किल है।
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बौराड़ी में बनाई गई कार पार्किंग की निविदा देहरादून से प्रकाशित कराई गई थी। एक ठेकेदार ने आवेदन किया था, लेकिन वह सभी औपचारिकता पूरी नहीं कर पाए, जिससे अभी तक आवंटन नहीं हो पाया है। ठेकेदार ने सभी शर्तें पूरी नहीं की, तो निविदा फिर से जारी की जा सकती है। निशुल्क सुविधा देने पर मुख्यालय से ही कोई निर्णय लिया जा सकता है। - अतुल भंडारी, जिला पर्यटन अधिकारी, नई टिहरी।
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