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हिमालय और गंगा की निर्मलता के लिए महाकुंभ से विशेष मुहिम हो शुरू : उपाध्याय
Thu, 02 Jan 2025 04:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Thu, 02 Jan 2025 04:18 PM IST
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नई टिहरी। कुंभनगरी प्रयागराज व आसपास के शहरों की छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों से निकलने वाले गंदे पानी को गंगा नदी में डाले जाने पर विधायक किशोर उपाध्याय ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से रोक लगाए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हिमालय को बचाने और गंगा सहित अन्य नदियों की निर्मलता बनाए रखने के लिए प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ से विशेष मुहिम शुरू की जानी चाहिए।
विधायक उपाध्याय ने पत्रकार वार्ता में कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ होने जा रहा है। सनातन धर्म के सभी लोगों को महाकुंभ में जाकर पुण्य लाभ लेना चाहिए। प्रयागराज में गंगा के पानी की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। इसका मुख्य कारण प्रयागराज के आसपास के शहरों में चमड़ा बनाने सहित कई अन्य फैक्ट्रियां लगी हैं, जिनका गंदा पानी गंगा नदी में गिराया जा रहा है।
गंगा की निर्मलता और स्वच्छता पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। हरिद्वार और प्रयागराज कुंभनगरी में गंगा की निर्मलता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वो महाकुंभ में आने वाले साधु-संतों से अनुरोध करेंगे कि हिमालय और गंगा, यमुना नदियों को बचाने के लिए आगे आएं। कहा कि भारत हिमालय बचाओ अभियान में संयुक्त राष्ट्र संघ से भी बड़ी संस्था का गठन कर विश्व का नेतृत्व कर सकता है। कहा कि कुंभ जैसे महापर्व का आयोजन तभी तक होगा, जब तक हिमालय और गंगा जैसी नदियां जीवित रहेगी।
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विधायक उपाध्याय ने पत्रकार वार्ता में कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ होने जा रहा है। सनातन धर्म के सभी लोगों को महाकुंभ में जाकर पुण्य लाभ लेना चाहिए। प्रयागराज में गंगा के पानी की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। इसका मुख्य कारण प्रयागराज के आसपास के शहरों में चमड़ा बनाने सहित कई अन्य फैक्ट्रियां लगी हैं, जिनका गंदा पानी गंगा नदी में गिराया जा रहा है।
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गंगा की निर्मलता और स्वच्छता पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। हरिद्वार और प्रयागराज कुंभनगरी में गंगा की निर्मलता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वो महाकुंभ में आने वाले साधु-संतों से अनुरोध करेंगे कि हिमालय और गंगा, यमुना नदियों को बचाने के लिए आगे आएं। कहा कि भारत हिमालय बचाओ अभियान में संयुक्त राष्ट्र संघ से भी बड़ी संस्था का गठन कर विश्व का नेतृत्व कर सकता है। कहा कि कुंभ जैसे महापर्व का आयोजन तभी तक होगा, जब तक हिमालय और गंगा जैसी नदियां जीवित रहेगी।
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