{"_id":"16-73289","slug":"Tehri-73289-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलग-अलग मामलों में छह को सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलग-अलग मामलों में छह को सजा
Tehri
Updated Tue, 01 Apr 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गढ़वाल। पौड़ी, टिहरी और उत्तरकाशी में अलग-अलग मामलों में छह लोगों को दो वर्ष से लेकर उम्र कैद की सजा सुनाई गई। पौड़ी में सत्र न्यायाधीश विवेक बी. शर्मा ने हत्या के एक मामले में दो सगे भाइयों को आजीवन की सजा सुनाई। नई टिहरी में जिला जज सिकंदर कुमार त्यागी की अदालत ने दहेज हत्या में महिला के पति पति को पांच वर्ष और सास को तीन वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं उत्तरकाशी में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट धमेंद्र कुमार की अदालत ने फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर थल सेना की भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाले दो युवाओं को दो-दो साल का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
नई टिहरी। नरेंद्रनगर ब्लाक के बनाली मल्ली गांव के कमल सिंह की पत्नी रोशनी देवी की 28 जुलाई 2012 को जहर पीने से मौत हो गई थी। मृतका के भाई मठियाली गांव निवासी रामचंद्र ने उसकी मौत के लिए उसके पति कमल सिंह और सास मकानी देवी को जिम्मेदार ठहराते हुए 29 जुलाई को थाना नरेंद्रनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मायके पक्ष का आरोप था कि दहेज उत्पीड़न से तंग आकर रोशनी ने आत्महत्या की है।
सोमवार को जिला न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता महावीर सिंह नेगी, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बेणी माधव शाह ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से दलीलें दी गई। सुनवाई के बाद पति कमल सिंह को पांच वर्ष का सश्रम कारावास व 15 हजार रुपये का जुर्माना और सास मकानी देवी को तीन वर्ष का सश्रम कारावास के साथ ही दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
विज्ञापन
पौड़ी। सत्र न्यायाधीश विवेक बी. शर्मा ने वर्ष 2012 में कोटद्वार तहसील के चूना महेड़ा गांव में हुई हत्या के एक मामले में दो सगे भाईयों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 42-42 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायालय ने इस मामले में नामजद दो अन्य लोगों को निर्दोष पाते हुए उन्हें आरोपों से दोषमुक्त किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता केपी डंगवाल ने बताया कि 28 मार्च 2012 की रात को कोटद्वार तहसील के चूना महेड़ा गांव में गांव के ही उमानंद कुकरेती की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में राजस्व पुलिस ने एक अप्रैल 2012 को ग्राम प्रधान से तहरीर लेकर गिरीश चंद्र उसके भाई हरीश चंद्र उर्फ धर्मा, मोहन देव जोशी और नेपाली गोविंद थापा के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर जांच की। न्यायालय ने गिरीश चंद्र और हरीश चंद्र दोनों भाइयों को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र रचने और साक्ष्य छिपाने के आरोप में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 42-42 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि रिपोर्ट में नामजद मोहन देव जोशी और गोविंद थापा को साक्ष्यों के अभाव में आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
दो युवाओं को दो-दो साल का कारावास
उत्तरकाशी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट धमेंद्र कुमार की अदालत ने फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर थल सेना की भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाले दो युवाओं को दोषी पाते हुए दो-दो साल का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोनों आरोपी पौड़ी जिले के रहने वाले हैं।
जनपद पौड़ी के सुनारगांव निवासी मनोज सिंह तथा जलेथा गांव निवासी जितेंद्र सिंह नेगी वर्ष 2008 में मनेरा स्टेडियम में थल सेना की ओर से आयोजित भर्ती में शामिल होने आए थे। शैक्षिक दस्तावेजों की जांच में वे फर्जी पाए गए। जिस पर असिस्टेंट रिक्रूटिंग ऑफिसर सूबेदार मेजर सोमदत्त ने आठ जनवरी 2009 को आरोपी युवाओं के खिलाफ उत्तरकाशी थाने में मुकदमा दर्ज कराया। सोमवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट धमेंद्र कुमार की अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अभियुक्त मनोज को दो साल का सश्रम कारावास, एक हजार रुपये जुर्माना तथा जितेंद्र को दो साल सश्रम कारावास तथा तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों अभियुक्तों को अपील की अवधि तक एक माह के लिए अंतरिम जमानत दी है।
विज्ञापन
नई टिहरी। नरेंद्रनगर ब्लाक के बनाली मल्ली गांव के कमल सिंह की पत्नी रोशनी देवी की 28 जुलाई 2012 को जहर पीने से मौत हो गई थी। मृतका के भाई मठियाली गांव निवासी रामचंद्र ने उसकी मौत के लिए उसके पति कमल सिंह और सास मकानी देवी को जिम्मेदार ठहराते हुए 29 जुलाई को थाना नरेंद्रनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मायके पक्ष का आरोप था कि दहेज उत्पीड़न से तंग आकर रोशनी ने आत्महत्या की है।
विज्ञापन
सोमवार को जिला न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता महावीर सिंह नेगी, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बेणी माधव शाह ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से दलीलें दी गई। सुनवाई के बाद पति कमल सिंह को पांच वर्ष का सश्रम कारावास व 15 हजार रुपये का जुर्माना और सास मकानी देवी को तीन वर्ष का सश्रम कारावास के साथ ही दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
विज्ञापन
पौड़ी। सत्र न्यायाधीश विवेक बी. शर्मा ने वर्ष 2012 में कोटद्वार तहसील के चूना महेड़ा गांव में हुई हत्या के एक मामले में दो सगे भाईयों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 42-42 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायालय ने इस मामले में नामजद दो अन्य लोगों को निर्दोष पाते हुए उन्हें आरोपों से दोषमुक्त किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता केपी डंगवाल ने बताया कि 28 मार्च 2012 की रात को कोटद्वार तहसील के चूना महेड़ा गांव में गांव के ही उमानंद कुकरेती की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में राजस्व पुलिस ने एक अप्रैल 2012 को ग्राम प्रधान से तहरीर लेकर गिरीश चंद्र उसके भाई हरीश चंद्र उर्फ धर्मा, मोहन देव जोशी और नेपाली गोविंद थापा के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर जांच की। न्यायालय ने गिरीश चंद्र और हरीश चंद्र दोनों भाइयों को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र रचने और साक्ष्य छिपाने के आरोप में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 42-42 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि रिपोर्ट में नामजद मोहन देव जोशी और गोविंद थापा को साक्ष्यों के अभाव में आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
दो युवाओं को दो-दो साल का कारावास
उत्तरकाशी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट धमेंद्र कुमार की अदालत ने फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर थल सेना की भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाले दो युवाओं को दोषी पाते हुए दो-दो साल का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोनों आरोपी पौड़ी जिले के रहने वाले हैं।
जनपद पौड़ी के सुनारगांव निवासी मनोज सिंह तथा जलेथा गांव निवासी जितेंद्र सिंह नेगी वर्ष 2008 में मनेरा स्टेडियम में थल सेना की ओर से आयोजित भर्ती में शामिल होने आए थे। शैक्षिक दस्तावेजों की जांच में वे फर्जी पाए गए। जिस पर असिस्टेंट रिक्रूटिंग ऑफिसर सूबेदार मेजर सोमदत्त ने आठ जनवरी 2009 को आरोपी युवाओं के खिलाफ उत्तरकाशी थाने में मुकदमा दर्ज कराया। सोमवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट धमेंद्र कुमार की अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अभियुक्त मनोज को दो साल का सश्रम कारावास, एक हजार रुपये जुर्माना तथा जितेंद्र को दो साल सश्रम कारावास तथा तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों अभियुक्तों को अपील की अवधि तक एक माह के लिए अंतरिम जमानत दी है।