{"_id":"5cc5cf54bdec22073706b560","slug":"155646760611-new-tehri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बबीता को आशीर्वाद देने शादी में उमड़ी भीड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बबीता को आशीर्वाद देने शादी में उमड़ी भीड़
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कंडीसौड़ (टिहरी)। अनाथ बेटी बबीता का घर बसाने को सैकड़ों हाथ मदद को एक साथ उठे और खूब भीड़ उमड़ी। रविवार को बबीता ने अपने जीवन साथी धनीराम के साथ अग्नि के सात फेरे लिए। शादी समारोह में उपस्थित लोगों ने बेटी बबीता को विदाई दी।
16 अप्रैल को ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर मठियाली गांव के समीप हुई वाहन दुर्घटना में अंधियारी मय चापड़ा (काथणा) गांव निवासी बबीता के पिता ज्योति प्रसाद और मां राजमति देवी की वाहन दुर्घटना में मौत हो गई थी। माता-पिता की मौत के बाद बबीता को जीवन बोझ लगने लगा था। इसी बीच परंपरा और संस्कारों के प्रति संवेदनशील लोगों ने बबीता की शादी का बीड़ा उठाया। नाते-रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने पहले से तय तिथि पर ही शादी करने का निर्णय लिया।
रविवार को चंबा ब्लॉक के कांडा गांव निवासी ऋषिराम बेलवाल अपने बेटे धनीराम की बरात लेकर बबीता के घर काथणा गांव पहुंचे। बैंड-बाजों और फूल मालाओं से गांव के लोगों ने मेहमानों का स्वागत किया। बबीता के ताऊ चंद्रदत्त कुड़ियाल और ताई कौंशा देवी, मामा राम दयाल नौटियाल और राजेंद्र प्रसाद नौटियाल ने कन्यादान किया। ग्राम प्रधान उर्मिला देवी, पूर्व प्रधान पारशमणी सेमवाल, प्रेमलाल कुड़ियाल, राजेंद्र सिंह रावत, आनंद सिंह भंडारी, तेज सिंह पंवार सहित सैकड़ों लोगों ने वर-वधू को सुखी वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद दिया। वहीं उसके छोटी बहन राधिक जो दिव्यांग है और भाई प्रदीप और दीपक के आंखों से आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे थे। अब बबीता को ससुराल के साथ-साथ मायके में एक दिव्यांग बहन और दो छोटे भाइयों की भी जिम्मेदारी निभानी है। बबीता के बैंक अकाउंट में भी ऋषिकेश, देहरादून, दिल्ली से कई लोगों ने मदद राशि भेजी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
16 अप्रैल को ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर मठियाली गांव के समीप हुई वाहन दुर्घटना में अंधियारी मय चापड़ा (काथणा) गांव निवासी बबीता के पिता ज्योति प्रसाद और मां राजमति देवी की वाहन दुर्घटना में मौत हो गई थी। माता-पिता की मौत के बाद बबीता को जीवन बोझ लगने लगा था। इसी बीच परंपरा और संस्कारों के प्रति संवेदनशील लोगों ने बबीता की शादी का बीड़ा उठाया। नाते-रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने पहले से तय तिथि पर ही शादी करने का निर्णय लिया।
विज्ञापन
रविवार को चंबा ब्लॉक के कांडा गांव निवासी ऋषिराम बेलवाल अपने बेटे धनीराम की बरात लेकर बबीता के घर काथणा गांव पहुंचे। बैंड-बाजों और फूल मालाओं से गांव के लोगों ने मेहमानों का स्वागत किया। बबीता के ताऊ चंद्रदत्त कुड़ियाल और ताई कौंशा देवी, मामा राम दयाल नौटियाल और राजेंद्र प्रसाद नौटियाल ने कन्यादान किया। ग्राम प्रधान उर्मिला देवी, पूर्व प्रधान पारशमणी सेमवाल, प्रेमलाल कुड़ियाल, राजेंद्र सिंह रावत, आनंद सिंह भंडारी, तेज सिंह पंवार सहित सैकड़ों लोगों ने वर-वधू को सुखी वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद दिया। वहीं उसके छोटी बहन राधिक जो दिव्यांग है और भाई प्रदीप और दीपक के आंखों से आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे थे। अब बबीता को ससुराल के साथ-साथ मायके में एक दिव्यांग बहन और दो छोटे भाइयों की भी जिम्मेदारी निभानी है। बबीता के बैंक अकाउंट में भी ऋषिकेश, देहरादून, दिल्ली से कई लोगों ने मदद राशि भेजी है।
विज्ञापन