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वेधशाला से मिलेगी मौसम की सटीक जानकारी
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चंबा (टिहरी)। बादलों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल में स्थापित वेधशाला में मौसम के बदलावों की जानकारी मिलने लगी है। वैज्ञानिकों ने इन दिनों बारिश और बर्फबारी के दौरान क्लाउड कंडेंसेशन न्यूक्लाई (सीसीएन) में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किए हैं।
केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और आईआईटी कानपुर के सहयोग से स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल में बादलों की निगरानी से संबंधित वेधशाला शुरू की गई है। वेधशाला में हिमालयी क्षेत्र में बादलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हाईटेक उपकरणों के साथ मौसम केंद्र भी स्थापित किया गया है। अब पिछले कई दिन से पहाड़ों में बारिश और बर्फबारी के दौरान सीसीएन में उतार-चढ़ाव दर्ज किए गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून सीजन में अगस्त, सितंबर में साफ मौसम के दौरान सीसीएन अधिकतम 3082.53 प्रति घन सेमी और बारिश के दौरान न्यूनतम 173.63 प्रति घन सेमी मिला। उसके बाद अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर में साफ मौसम के दौरान सीसीएन अधिकतम 6799 प्रति घन सेमी दर्ज किए गए। 22 जनवरी को सीसीएन सबसे कम 200 से 250 प्रति घन सेमी मिला। वेधशाला के निदेशक डॉ. आलोक सागर गौतम और परिसर निदेशक प्रो. आरसी रमोला ने बताया कि सीसीएन के कण बादल बनने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्या होते हैं सीसीएन
सीसीएन ऐसे कण होते हैं जो वातावरण में नमी को सोखकर बादल बनने की प्रक्रिया में सहायक होते हैं। यह समय-समय पर बनते और बिगड़ते रहते हैं। सीसीएन पर निगरानी रखने से बारिश का पूर्वानुमान लगाने में सहायता मिलती है।
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केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और आईआईटी कानपुर के सहयोग से स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल में बादलों की निगरानी से संबंधित वेधशाला शुरू की गई है। वेधशाला में हिमालयी क्षेत्र में बादलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हाईटेक उपकरणों के साथ मौसम केंद्र भी स्थापित किया गया है। अब पिछले कई दिन से पहाड़ों में बारिश और बर्फबारी के दौरान सीसीएन में उतार-चढ़ाव दर्ज किए गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून सीजन में अगस्त, सितंबर में साफ मौसम के दौरान सीसीएन अधिकतम 3082.53 प्रति घन सेमी और बारिश के दौरान न्यूनतम 173.63 प्रति घन सेमी मिला। उसके बाद अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर में साफ मौसम के दौरान सीसीएन अधिकतम 6799 प्रति घन सेमी दर्ज किए गए। 22 जनवरी को सीसीएन सबसे कम 200 से 250 प्रति घन सेमी मिला। वेधशाला के निदेशक डॉ. आलोक सागर गौतम और परिसर निदेशक प्रो. आरसी रमोला ने बताया कि सीसीएन के कण बादल बनने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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क्या होते हैं सीसीएन
सीसीएन ऐसे कण होते हैं जो वातावरण में नमी को सोखकर बादल बनने की प्रक्रिया में सहायक होते हैं। यह समय-समय पर बनते और बिगड़ते रहते हैं। सीसीएन पर निगरानी रखने से बारिश का पूर्वानुमान लगाने में सहायता मिलती है।
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