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पालिका को भूमि का स्वामित्व दिलवाना होगा चुनौती
Updated Mon, 12 Nov 2018 10:33 PM IST
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नई टिहरी। नगर पालिका को शहर का स्वामित्व दिलवाना निर्वाचित होने वाले पालिका बोर्ड के लिए बड़ी चुनौती होगी। अभी तक नगर पालिका को शहर की भूमि और भवन हस्तांतरित नही हुए हैं। पालिका को शहर में निर्माण कार्य करवाने के लिए पुनर्वास निदेशालय से भूमि की अनुमति लेनी पड़ती है। कई बार तो पुनर्वास निदेशालय विकास कार्यों के लिए भूमि नही देता है, जिससे कई महत्वपूर्ण योजनाएं धरातल पर नही उतर पाती है।
सरकार ने नई टिहरी, बौराड़ी, भागीरथीपुरम में पुनर्वास हेतु टीएचडीसी और पुनर्वास निदेशालय को तीन सौ एकड़ प्राइवेट भूमि, 150 एकड़ वनभूमि और 50 एकड़ सिविल भूमि बांध प्रभावितों के पुनर्वास और शहर विकसित करने को दी थी, जिस भूमि पर सरकारी, गैर सरकारी भवन, फ्लैट, दुकानें बनाकर बांध विस्थापितों को आवंटित किए थे। मास्टर प्लान से शहर का निर्माण होने के बाद भी नई टिहरी पालिका क्षेत्र का स्वामित्व पुनर्वास निदेशालय के पास है। नगर क्षेत्र की भूमि से लेकर अधिकांश संपत्ति पुनर्वास निदेशालय के अधिकार में है। पालिका को केवल शहर की आंतरिक सड़कें, बस अड्डा ही हस्तांतरित हुआ है। बाकी संपत्ति से लेकर भूमि का स्वामित्व देने की मांग को लेकर पालिका लंबे समय से कर रही है। भूमि नाम पर न होने से पालिका को शहर में पार्क, बारातघर, सामुदायिक केंद्र, सब्जी मंडी, कूड़ाघर से लेकर अन्य विकास कार्यों को करवाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। पालिका को भूमि के लिए पुनर्वास के सामने हाथ फैलाने पड़ते हैं। कई बार तो भूमि न मिलने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं। इस निकाय चुनाव में भी संपत्तियों को हस्तांतरण का मुद्दा प्रमुखता से उठ रहा है। अब देखना होगा कि गठित होने वाला पालिका बोर्ड संपत्तियों को हस्तांतरित करवा पाते हैं या केवल चुनाव मुद्दा ही बनकर रह जाएगा।
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सरकार ने नई टिहरी, बौराड़ी, भागीरथीपुरम में पुनर्वास हेतु टीएचडीसी और पुनर्वास निदेशालय को तीन सौ एकड़ प्राइवेट भूमि, 150 एकड़ वनभूमि और 50 एकड़ सिविल भूमि बांध प्रभावितों के पुनर्वास और शहर विकसित करने को दी थी, जिस भूमि पर सरकारी, गैर सरकारी भवन, फ्लैट, दुकानें बनाकर बांध विस्थापितों को आवंटित किए थे। मास्टर प्लान से शहर का निर्माण होने के बाद भी नई टिहरी पालिका क्षेत्र का स्वामित्व पुनर्वास निदेशालय के पास है। नगर क्षेत्र की भूमि से लेकर अधिकांश संपत्ति पुनर्वास निदेशालय के अधिकार में है। पालिका को केवल शहर की आंतरिक सड़कें, बस अड्डा ही हस्तांतरित हुआ है। बाकी संपत्ति से लेकर भूमि का स्वामित्व देने की मांग को लेकर पालिका लंबे समय से कर रही है। भूमि नाम पर न होने से पालिका को शहर में पार्क, बारातघर, सामुदायिक केंद्र, सब्जी मंडी, कूड़ाघर से लेकर अन्य विकास कार्यों को करवाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। पालिका को भूमि के लिए पुनर्वास के सामने हाथ फैलाने पड़ते हैं। कई बार तो भूमि न मिलने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं। इस निकाय चुनाव में भी संपत्तियों को हस्तांतरण का मुद्दा प्रमुखता से उठ रहा है। अब देखना होगा कि गठित होने वाला पालिका बोर्ड संपत्तियों को हस्तांतरित करवा पाते हैं या केवल चुनाव मुद्दा ही बनकर रह जाएगा।
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