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श्रीकोट-केमर क्षेत्र की सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त
Updated Fri, 09 Nov 2018 10:24 PM IST
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घनसाली (टिहरी)। सिंचाई विभाग की लापरवाही केमर पट्टी के काश्तकारों पर भारी पड़ रही है। क्षेत्र की सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त होने से काश्तकार गेहूं की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। उपजाऊ खेती के लिए मशहूर क्षेत्र के लोग सालभर से नहर की मरम्मत कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग ध्यान नहीं दे रहा है।
भिलंगना ब्लॉक में श्रीकोट-केमरा क्षेत्र की जमीन काफी उपजाऊ है। पिछले वर्ष आई आपदा से गांव की श्रीकोट गदेरे से सेंदुल तक आठ किमी सिंचाई नहर जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे श्रीकोट, चामा, सिल्यारा, केमरा और सेंदुल के काश्तकारों के सामने इस समय गेहूं की बुवाई करने की समस्या खड़ी हो गई है। काश्तकार कुसम देवी, बंबेश्वरी देवी, वैजयंती देवी, शूरवीर सिंह बिष्ट, हीरामणि जोशी और विनोद प्रसाद ने बताया कि पिछले वर्ष आई आपदा से आठ किमी सिंचाई नहर कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने बताया कि गेहूं की बुवाई का समय निकलता जा रहा है, लेकिन पानी की समस्या होने से लोग पसोपेश में हैं। उन्होंने कहा कि नहर की मरम्मत हो जाती है, तो अब तक करीब 25 से 30 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुवाई हो जाती।
आपदा से क्षतिग्रस्त नहर मरम्मत का आगणन शासन को भेजा गया था, लेकिन पैसा नहीं मिल पाया है। किसानों की समस्या को देखते हुए कर्मचारियों को अस्थायी व्यवस्था कर नहर से खेतों तक पानी पहुंचाने को कहा गया है।
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- अनिल कुमार सिंह, एई सिंचाई विभाग।
भिलंगना ब्लॉक में श्रीकोट-केमरा क्षेत्र की जमीन काफी उपजाऊ है। पिछले वर्ष आई आपदा से गांव की श्रीकोट गदेरे से सेंदुल तक आठ किमी सिंचाई नहर जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे श्रीकोट, चामा, सिल्यारा, केमरा और सेंदुल के काश्तकारों के सामने इस समय गेहूं की बुवाई करने की समस्या खड़ी हो गई है। काश्तकार कुसम देवी, बंबेश्वरी देवी, वैजयंती देवी, शूरवीर सिंह बिष्ट, हीरामणि जोशी और विनोद प्रसाद ने बताया कि पिछले वर्ष आई आपदा से आठ किमी सिंचाई नहर कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने बताया कि गेहूं की बुवाई का समय निकलता जा रहा है, लेकिन पानी की समस्या होने से लोग पसोपेश में हैं। उन्होंने कहा कि नहर की मरम्मत हो जाती है, तो अब तक करीब 25 से 30 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुवाई हो जाती।
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आपदा से क्षतिग्रस्त नहर मरम्मत का आगणन शासन को भेजा गया था, लेकिन पैसा नहीं मिल पाया है। किसानों की समस्या को देखते हुए कर्मचारियों को अस्थायी व्यवस्था कर नहर से खेतों तक पानी पहुंचाने को कहा गया है।
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- अनिल कुमार सिंह, एई सिंचाई विभाग।