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आपदा और जलवायु परिवर्तन के लिए हम सभी जिम्मेदार: रावत
Updated Fri, 26 Oct 2018 10:53 PM IST
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चंबा (टिहरी)। गढ़वाल केंद्रीय विवि के स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल के भूगर्भ विभाग की पहल पर जलवायु परिवर्तन और आपदा न्यूनीकरण पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू की गई है। इसमें पर्यावरण प्रदूषण और रोकथाम पर वैज्ञानिक अपने शोधपत्र प्रस्तुत कर मंथन करेंगे। इस मौके पर टीएचडीसी के निदेशक मोहन सिंह रावत गांववासी ने कहा कि आपदा और जलवायु परिवर्तन के लिए हम सभी जिम्मेदार हैं।
स्वामी रामतीर्थ परिसर सभागार में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री व टीएचडीसी के निदेशक मोहन सिंह रावत गांववासी ने कहा कि विभिन्न आपदाओं एवं जलवायु परिवर्तन के लिए हम सभी जिम्मेदार हैं। हमारी निरंतर विकास की मांगों के मद्देनजर सरकारों द्वारा विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिसमें सड़कें और नए निर्माण मुख्य हैं। यही कारण है कि प्राकृतिक असंतुलन बन रहा है और हमारे चारों ओर विषैली गैस और पर्यावरण प्रदूषण फैल रहे हैं। इसकी रोकथाम सरकार और लोगों को सामूहिक रूप से करनी होगी। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि गढ़वाल विश्वविद्यालय के डीन प्रो. एससी बागड़ी ने कहा कि शोधपत्रों के निष्कर्ष से हिमालयी क्षेत्र में हो रही आपदाओं के रोकथाम में मदद मिलती है। भूगर्भ विषय के पूर्व डीन प्रो. सीपी सिंह ने कहा कि विकास की दौड़ ने समाज के चारों ओर सीमेंट की दीवारें खड़ी कर दी हैं और हमारे द्वारा स्वयं विकास के साथ-साथ विनाश को भी बढ़ावा दिया गया है। संगोष्ठी के आयोजक सचिव डा. दीपक भट्ट ने कहा कि तीन दिन तक वैज्ञानिकों के विचार-विमर्श और शोधपत्रों के माध्यम से आपदा न्यूनीकरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के उपायों के निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा। संगोष्ठी के संयोजक डा. एनपी नैथानी और परिसर निदेशक प्रो. आरसी रमोला ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में हो रही विभिन्न आपदाओं को लेकर सभी वैज्ञानिक चिंतित हैं और विभिन्न विषयों के वैज्ञानिक इस उपाय के लिए प्रयासरत हैं। संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन और आपदा न्यूनीकरण की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। सेमिनार के द्वितीय सत्र में आईआईटी मुंबई के प्रो. आर नागराजन, आईआईटी रुड़की के डा. एके शर्राफ, जापान के वैज्ञानिक डा. ली चुंग फान ने अपने-अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इस मौके पर प्रो. सुनीता गोदियाल, प्रो. डीएस बागड़ी, प्रो. गीताली पडियार, प्रो. पीडी सेमल्टी, प्रो. जेएस जगवाण, डा. केसी पेटवाल, डा. एलआर डंगवाल, हंसराज सिंह बिष्ट, डा. शालिनी रावत, डा. कुलदीप सिंह, डा. मुक्ता डंगवाल व डा. पीसी पैन्यूली आदि मौजूद थे।
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स्वामी रामतीर्थ परिसर सभागार में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री व टीएचडीसी के निदेशक मोहन सिंह रावत गांववासी ने कहा कि विभिन्न आपदाओं एवं जलवायु परिवर्तन के लिए हम सभी जिम्मेदार हैं। हमारी निरंतर विकास की मांगों के मद्देनजर सरकारों द्वारा विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिसमें सड़कें और नए निर्माण मुख्य हैं। यही कारण है कि प्राकृतिक असंतुलन बन रहा है और हमारे चारों ओर विषैली गैस और पर्यावरण प्रदूषण फैल रहे हैं। इसकी रोकथाम सरकार और लोगों को सामूहिक रूप से करनी होगी। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि गढ़वाल विश्वविद्यालय के डीन प्रो. एससी बागड़ी ने कहा कि शोधपत्रों के निष्कर्ष से हिमालयी क्षेत्र में हो रही आपदाओं के रोकथाम में मदद मिलती है। भूगर्भ विषय के पूर्व डीन प्रो. सीपी सिंह ने कहा कि विकास की दौड़ ने समाज के चारों ओर सीमेंट की दीवारें खड़ी कर दी हैं और हमारे द्वारा स्वयं विकास के साथ-साथ विनाश को भी बढ़ावा दिया गया है। संगोष्ठी के आयोजक सचिव डा. दीपक भट्ट ने कहा कि तीन दिन तक वैज्ञानिकों के विचार-विमर्श और शोधपत्रों के माध्यम से आपदा न्यूनीकरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के उपायों के निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा। संगोष्ठी के संयोजक डा. एनपी नैथानी और परिसर निदेशक प्रो. आरसी रमोला ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में हो रही विभिन्न आपदाओं को लेकर सभी वैज्ञानिक चिंतित हैं और विभिन्न विषयों के वैज्ञानिक इस उपाय के लिए प्रयासरत हैं। संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन और आपदा न्यूनीकरण की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। सेमिनार के द्वितीय सत्र में आईआईटी मुंबई के प्रो. आर नागराजन, आईआईटी रुड़की के डा. एके शर्राफ, जापान के वैज्ञानिक डा. ली चुंग फान ने अपने-अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इस मौके पर प्रो. सुनीता गोदियाल, प्रो. डीएस बागड़ी, प्रो. गीताली पडियार, प्रो. पीडी सेमल्टी, प्रो. जेएस जगवाण, डा. केसी पेटवाल, डा. एलआर डंगवाल, हंसराज सिंह बिष्ट, डा. शालिनी रावत, डा. कुलदीप सिंह, डा. मुक्ता डंगवाल व डा. पीसी पैन्यूली आदि मौजूद थे।
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