{"_id":"5bca0b9abdec226974556cce","slug":"153996786619-new-tehri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांवों में जाने के लिए ट्राली लगाने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांवों में जाने के लिए ट्राली लगाने की मांग
Updated Fri, 19 Oct 2018 10:21 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कंडीसौड़ (टिहरी)। टिहरी झील की सरहदों के आरपार बसे गुसाईं पट्टी और बिचलीगमरी पट्टी के गांवों में आवागमन के लिए लोगों ने ट्राली लगाने की मांग की है।
सीएम को भेजे ज्ञापन में लोगों ने बताया है कि 2005 में छामतलसौड़ में बना पुल टिहरी झील में समा गया था। तब से उत्तरकाशी जिले के बिचलीगमरी पट्टी के दर्जनों गांवों और टिहरी के गुसाईं पट्टी के गांवों के बीच दूरियां बढ़ गई है। झील से आरपार जाने के लिए एक मात्र साधन बोट है। गुसाईं पट्टी के धरवाल गांव, सुनारगांव, कंडीसौड़, जसपुर, पदोगी, रमोलसारी, धरोगी, कौशल और इडियान और बिचलीगमरी के बल्डोगी, खालसी, मणि, बरोल, वनकोट, क्यारी, सर्फ आदि दर्जनों गांवों के लोगों को नाते रिश्तेदारों के सुख-दुख: में शामिल होने के लिए बोट की सेवा पर ही निर्भर रहना पड़ता है। ज्ञापन पर बुद्धि सिंह बिष्ट, उम्मेद सिंह बिष्ट, तारादत्त थपलियाल, जयेंद्र सिंह राणा, नयाल सिंह पुरुसोडा व देव चंद पुरुसोड़ा के हस्ताक्षर हैं।
सीएम को भेजे ज्ञापन में लोगों ने बताया है कि 2005 में छामतलसौड़ में बना पुल टिहरी झील में समा गया था। तब से उत्तरकाशी जिले के बिचलीगमरी पट्टी के दर्जनों गांवों और टिहरी के गुसाईं पट्टी के गांवों के बीच दूरियां बढ़ गई है। झील से आरपार जाने के लिए एक मात्र साधन बोट है। गुसाईं पट्टी के धरवाल गांव, सुनारगांव, कंडीसौड़, जसपुर, पदोगी, रमोलसारी, धरोगी, कौशल और इडियान और बिचलीगमरी के बल्डोगी, खालसी, मणि, बरोल, वनकोट, क्यारी, सर्फ आदि दर्जनों गांवों के लोगों को नाते रिश्तेदारों के सुख-दुख: में शामिल होने के लिए बोट की सेवा पर ही निर्भर रहना पड़ता है। ज्ञापन पर बुद्धि सिंह बिष्ट, उम्मेद सिंह बिष्ट, तारादत्त थपलियाल, जयेंद्र सिंह राणा, नयाल सिंह पुरुसोडा व देव चंद पुरुसोड़ा के हस्ताक्षर हैं।