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नहरों की मरम्मत के लिए बजट का इंजतार
Updated Thu, 28 Dec 2017 10:42 PM IST
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नई टिहरी। किसानों की आय दोगुनी करने का दावा कर रही सरकार क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत तक नहीं करा पा रही है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में 4895 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई का संकट बना हुआ है। जिले में ही लघु सिंचाई विभाग की 14 सौ से अधिक नहरें 2010 से क्षतिग्रस्त है। काश्तकार लगातार नहरों की मरम्मत करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग बजट का अभाव बताकर काम चलाऊ व्यवस्था बनाने की सलाह दे रहा है।
जिले के अधिकतर क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था का जिम्मा लघु सिंचाई विभाग के पास है। इनमें से 1434 योजनाएं वर्ष 2010 से अलग-अलग सालों में आई आपदा से क्षतिग्रस्त पड़ी है। इससे 4895 हेक्टेयर सिंचित भूमि को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। सबसे अधिक 325 योजनाएं भिलंगना में हैं। जौनपुर में 233, प्रतापनगर में 204, जाखणीधार में 140, चंबा में 127, थौलधार में 104, नरेंद्रनगर में 105, देवप्रयाग में 101 और कीर्तिनगर में 95 नहरें क्षतिग्रस्त हैं।
कोट
नहरों की मरम्मत के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत भारत सरकार को वर्ष 2016 से प्लान भेज रहे हैं, इस बार भी 76 करोड़ का प्लान भेजा गया है। बजट मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। - अतुल कुमार पाठक, ईई लघु सिंचाई विभाग नई टिहरी।
जिले के अधिकतर क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था का जिम्मा लघु सिंचाई विभाग के पास है। इनमें से 1434 योजनाएं वर्ष 2010 से अलग-अलग सालों में आई आपदा से क्षतिग्रस्त पड़ी है। इससे 4895 हेक्टेयर सिंचित भूमि को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। सबसे अधिक 325 योजनाएं भिलंगना में हैं। जौनपुर में 233, प्रतापनगर में 204, जाखणीधार में 140, चंबा में 127, थौलधार में 104, नरेंद्रनगर में 105, देवप्रयाग में 101 और कीर्तिनगर में 95 नहरें क्षतिग्रस्त हैं।
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नहरों की मरम्मत के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत भारत सरकार को वर्ष 2016 से प्लान भेज रहे हैं, इस बार भी 76 करोड़ का प्लान भेजा गया है। बजट मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। - अतुल कुमार पाठक, ईई लघु सिंचाई विभाग नई टिहरी।
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