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प्रो. शर्मा बने औद्यानिकी एवं वानिकी के कार्यवाहक कुलपति
Updated Tue, 08 Aug 2017 10:32 PM IST
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नई टिहरी। वानिकी महाविद्यालय के रानीचौरी परिसर के डीन प्रो. सीएम शर्मा को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार का कुलपति नियुक्त किया गया है। प्रो. शर्मा को छह माह अथवा नियमित कुलपति की नियुक्ति तक जिम्मेदारी सौंपी गई है।
औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार के कुलपति प्रो. मैथ्यू प्रसाद ने स्वास्थ्य कारणों के चलते 17 जुलाई को राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा था। राज्यपाल ने मंगलवार को उनका त्यागपत्र स्वीकृत कर वानिकी परिसर रानीचौरी के डीन प्रो. सीएम शर्मा प्रभारी कुलपति नियुक्त किया है। राज्यपाल के सचिव रविनाथ रमन के हस्ताक्षर से जारी आदेश के मुताबिक प्रो. शर्मा बुधवार से कुलपति के रूप में कामकाज शुरू करेंगे। प्रो. शर्मा गढ़वाल केंद्रीय विवि के बिड़ला परिसर श्रीनगर में वनस्पति विज्ञान विभाग में कार्यरत थे। उन्होंने प्रतिनियुक्ति पर एक जून 2014 को रानीचौरी परिसर में डीन के पद पर कार्यभार संभाला था। वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी, औद्यानिकी महाविद्यालय भरसार, पर्वतीय कृषि परिसर चिरबटिया अभी औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के परिसर हैं। प्रो. मैथ्यू प्रसाद का कार्यकाल एक जनवरी 2018 को पूरा होना था, लेकिन उन्होंने इससे पहले ही इस्तीफा दे दिया। प्रो. मैथ्यू प्रसाद ने बताया कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने से उन्होंने यह कदम उठाया है।
वानिकी के क्षेत्र में प्रो. शर्मा का है लंबा अनुभव
नई टिहरी। औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति बने प्रो. सीएम शर्मा के पास वानिकी के क्षेत्र में कार्य करने का लंबा अनुभव है। टिहरी जिले के डांगचौरा गांव के मूल निवासी प्रो. शर्मा ने 1986 में एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। इसी वर्ष उनकी विश्वविद्यालय में वानिकी विभाग में प्रवक्ता के पद पर नियुक्ति हुई। इसके बाद जुलाई 1998 में वह विश्वविद्यालय में वानिकी विभाग में रीडर और मार्च 2007 में वनस्पति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर पद पर नियुक्त हुए। प्रोफेसर पद के साथ ही उन्हें कोआर्डिनेटर रिमोट सेंसिंग का दायित्व भी सौंप दिया गया। 2010 में वह वन अनुसंधान संस्थान डीम्ड विश्वविद्यालय के निरीक्षण के लिए गठित यूजीसी समीक्षा समिति के अध्यक्ष भी रहे। एक जून 2014 से वह अधिष्ठाता वानिकी महाविद्यालय, रानीचौरी में कार्यरत हैं। वानिकी के क्षेत्र में शिक्षा, शोध एवं प्रसार का उनके पास करीब 31 वर्षों का अनुभव है। कुल 18 छात्र उनके निर्देशन में पीएचडी कर चुके हैं। इसके अलावा 150 से अधिक शोध पत्र उनके अब तक प्रकाशित हो चुके हैं और दो पुस्तकों का लेखन भी वह कर चुके हैं।
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औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार के कुलपति प्रो. मैथ्यू प्रसाद ने स्वास्थ्य कारणों के चलते 17 जुलाई को राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा था। राज्यपाल ने मंगलवार को उनका त्यागपत्र स्वीकृत कर वानिकी परिसर रानीचौरी के डीन प्रो. सीएम शर्मा प्रभारी कुलपति नियुक्त किया है। राज्यपाल के सचिव रविनाथ रमन के हस्ताक्षर से जारी आदेश के मुताबिक प्रो. शर्मा बुधवार से कुलपति के रूप में कामकाज शुरू करेंगे। प्रो. शर्मा गढ़वाल केंद्रीय विवि के बिड़ला परिसर श्रीनगर में वनस्पति विज्ञान विभाग में कार्यरत थे। उन्होंने प्रतिनियुक्ति पर एक जून 2014 को रानीचौरी परिसर में डीन के पद पर कार्यभार संभाला था। वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी, औद्यानिकी महाविद्यालय भरसार, पर्वतीय कृषि परिसर चिरबटिया अभी औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के परिसर हैं। प्रो. मैथ्यू प्रसाद का कार्यकाल एक जनवरी 2018 को पूरा होना था, लेकिन उन्होंने इससे पहले ही इस्तीफा दे दिया। प्रो. मैथ्यू प्रसाद ने बताया कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने से उन्होंने यह कदम उठाया है।
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वानिकी के क्षेत्र में प्रो. शर्मा का है लंबा अनुभव
नई टिहरी। औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति बने प्रो. सीएम शर्मा के पास वानिकी के क्षेत्र में कार्य करने का लंबा अनुभव है। टिहरी जिले के डांगचौरा गांव के मूल निवासी प्रो. शर्मा ने 1986 में एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। इसी वर्ष उनकी विश्वविद्यालय में वानिकी विभाग में प्रवक्ता के पद पर नियुक्ति हुई। इसके बाद जुलाई 1998 में वह विश्वविद्यालय में वानिकी विभाग में रीडर और मार्च 2007 में वनस्पति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर पद पर नियुक्त हुए। प्रोफेसर पद के साथ ही उन्हें कोआर्डिनेटर रिमोट सेंसिंग का दायित्व भी सौंप दिया गया। 2010 में वह वन अनुसंधान संस्थान डीम्ड विश्वविद्यालय के निरीक्षण के लिए गठित यूजीसी समीक्षा समिति के अध्यक्ष भी रहे। एक जून 2014 से वह अधिष्ठाता वानिकी महाविद्यालय, रानीचौरी में कार्यरत हैं। वानिकी के क्षेत्र में शिक्षा, शोध एवं प्रसार का उनके पास करीब 31 वर्षों का अनुभव है। कुल 18 छात्र उनके निर्देशन में पीएचडी कर चुके हैं। इसके अलावा 150 से अधिक शोध पत्र उनके अब तक प्रकाशित हो चुके हैं और दो पुस्तकों का लेखन भी वह कर चुके हैं।
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