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अविश्वास पर चर्चा से पहले ही अध्यक्ष के पक्ष में आए दो सदस्य
Updated Thu, 27 Jul 2017 10:14 PM IST
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नई टिहरी। जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रजनीकांत सुरारी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले निदेशक दो गुटों में बंट गए हैं। एक गुट ने अध्यक्ष के पक्ष में जिलाधिकारी को शपथ देकर विश्वास जताया है। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होने से पहले ही एक धड़े के समर्थन में आने से डीसीबी के अध्यक्ष की कुर्सी सलामत रहने की पूरी संभावना बन गई है।
जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रजनीकांत पर संचालक मंडल के 12 में से 8 सदस्यों ने 17 जुलाई को डीएम को अविश्वास का पत्र सौंपा था। जिला प्रशासन ने अभी अविश्वास पर चर्चा को लेकर तिथि भी निर्धारित नहीं है, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव देने गुट का पहले ही तकड़ा झटका लगा है। सदस्य निर्मला सेमवाल, सुरेश कुड़ियाल ने डीएम को शपथ देकर अध्यक्ष पर विश्वास जताया है। डीसीबी के अध्यक्ष रजनीकांत सुरीरा ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि संचालक मंडल के एक सदस्य 20 वर्षों से डीसीबी अध्यक्ष बनने की मंशा पाले हुए हैं, वह पूर्व में भी चुने हुए अध्यक्षों के खिलाफ षड़यंत्र कर चुके हैं। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति के सदस्य को 10 जुलाई से प्रताड़ित किया जा रहा है। डीसीबी के अध्यक्ष के पक्ष में अब छह सदस्य हो गए हैं, जबकि दो-तीन सदस्य और उनके संपर्क में बताए जा रहे हैं। ऐसे में अध्यक्ष को सदस्य में विश्वास भी हासिल करना पड़ेगा, तो वह आसानी से अपनी कुर्सी बचा लेंगे।
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जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रजनीकांत पर संचालक मंडल के 12 में से 8 सदस्यों ने 17 जुलाई को डीएम को अविश्वास का पत्र सौंपा था। जिला प्रशासन ने अभी अविश्वास पर चर्चा को लेकर तिथि भी निर्धारित नहीं है, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव देने गुट का पहले ही तकड़ा झटका लगा है। सदस्य निर्मला सेमवाल, सुरेश कुड़ियाल ने डीएम को शपथ देकर अध्यक्ष पर विश्वास जताया है। डीसीबी के अध्यक्ष रजनीकांत सुरीरा ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि संचालक मंडल के एक सदस्य 20 वर्षों से डीसीबी अध्यक्ष बनने की मंशा पाले हुए हैं, वह पूर्व में भी चुने हुए अध्यक्षों के खिलाफ षड़यंत्र कर चुके हैं। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति के सदस्य को 10 जुलाई से प्रताड़ित किया जा रहा है। डीसीबी के अध्यक्ष के पक्ष में अब छह सदस्य हो गए हैं, जबकि दो-तीन सदस्य और उनके संपर्क में बताए जा रहे हैं। ऐसे में अध्यक्ष को सदस्य में विश्वास भी हासिल करना पड़ेगा, तो वह आसानी से अपनी कुर्सी बचा लेंगे।
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