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दरकते पहाड़ों को रोक सकती है ‘सायल नेलिंग’ तकनीक

Sat, 29 Jun 2013 08:43 AM IST
दीपक मिश्रा
दीपक मिश्रा Updated Sat, 29 Jun 2013 08:43 AM IST
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'Soil Nailing' technique can prevent mountains

उत्तराखंड में भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। कई इलाके तो ऐसे हैं जो लगभग पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं। जिन्हें नये सिरे बसाना होगा।

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तबाही से हुए जानमाल के नुकसान अंदाजा लगाना भी अभी संभव नहीं है। भविष्य में ऐसी आपदाएं न हो इसके लिए भूस्खलन को रोकना बेहद जरूरी है।

उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज

आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने भूस्लखन रोकने की एक ऐसी तकनीक इजाद की है। जिसके जरिये कच्चे पहाड़ों को भी मजबूत बनाया जा सकता है। ‘सायल नेलिंग’ नाम की इस तकनीक का नैनीताल, शिमला आदि क्षेत्रों में सफल प्रयोग भी किया जा चुका है।
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बना रहता है लैंड स्लाइड का खतरा
आईआईटी रुड़की के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के डा. सतेंद्र मित्तल ने ‘सायल नेलिंग’ तकनीक को तैयार किया है। यह तकनीक खासतौर से ऐसे स्थानों पर प्रयोग की जाती है जहां पर ढाल हो और मिट्टी कमजोर या फिर बजरी वाली हो। इस तरह के स्थानों पर हमेशा भूकंप या फिर बारिश के समय लैंड स्लाइड का खतरा बना रहता है। वैज्ञानिक  डा. सतेंद्र गुप्ता का दावा है कि इस तकनीक से पहाड़ों को भी भूस्लखन से बचाया जा सकता है।
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चुका है सफल प्रयोग
‘सायल नेलिंग’ तकनीक का प्रयोग शिमला के समतारा गांव के पास किया गया जा चुका है। यहां पर पहाड़ दरकने वाला था। डा. मित्तल ने बताया कि वर्ष 2010 में इस तकनीक से पहाड़ को ट्रीट किया गया था। इसी तरह से नैनीताल के हनुमानगढ़ी की एक पर्वतीय सड़क को वर्ष 2012 में ‘सायल नेलिंग’ तकनीक से ट्रीट किया गया था।

यह सड़क तेज बारिश में लैंड स्लाइड होने की वजह से बह जाती थी। जब से इस सड़क की पहाड़ी को ट्रीट किया गया है। तब से अभी तक कोई लैंड स्लाइड वहां नहीं हुआ है।


क्या है तकनीक
‘सायल नेलिंग’ तकनीक में पहले उस स्थान की मिट्टी जांच की जाती है। इसके बाद ‘पूल आउट टेस्ट’ किया जाता है। इस टेस्ट के जरिये नेल और सोयल (सरिये और मिट्टी) के घर्षण का पता लगाया जाता है। इसके बाद जो भी कैकुलेशन आती है

उसके आधार पर सरियों को पहाड़ या फिर मिट्टी में एक निश्चित स्थानों पर घुसाया जाता है। यह एक तरह से पहाड़ों या फिर मिट्टी की स्ट्रीचिंग जैसा होता है।

‘सायल नेलिंग’ तकनीक से लैंड स्लाइड को पूरी तरह से रोकना संभव है। उत्तराखंड में पहाड़ कच्चे हैं। इसलिए लैंड स्लाइड का खतरा हमेशा बना रहेगा। भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए इस तकनीक प्रयोग किया जा सकता है। जहां पर भी इस तकनीक प्रयोग किया गया है। वहां सफल साबित हुआ है।
- डा. सतेंद्र मित्तल, सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट, आईआईटी रुड़की

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