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उत्तराखंड में दृष्टिहीन बच्चों के आंखों की रोशनी हैं धानक

Mon, 02 May 2016 01:55 PM IST
निशांत खनी/ अमर उजाला, हल्द्वानी
निशांत खनी/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Mon, 02 May 2016 01:55 PM IST
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shyam dhanak working for blind
अंधा

श्याम धानक उनका नाम है जो उत्तराखंड के सैकड़ों दृष्टिहीन बच्चों की उम्मीद ही नहीं बल्कि उनकी आंखों की रोशनी हैं।

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धानक की पहल से दृष्टिहीन बच्चे सपनों की उड़ान भर रहे हैं। बच्चे हर फील्ड में अपने हुनर का लोहा मनवा रहे हैं। दमुवाढूंगा में रहने वाले श्याम धानक अल्मोड़ा के जैंती बाराकोट के वासी हैं। 1993 में एक हादसे ने श्याम धानक की पूरी दुनिया ही बदल दी। वो सऊदी अरब में नौकरी करते थे और परिवार यहां रहता था।

1993 में सबसे बड़े बेटे अजय की 14 साल की उम्र में आंखों की रोशनी चली गई। देश के नामी अस्पताल में बहुत इलाज कराया, लेकिन बेटे की आंखों की रोशनी नहीं लौटी। इस हादसे से श्याम धानक बुरी तरह टूट गए। धानक ने बेटे को अच्छी तालीम दी और बेटा आज एक नामी दवा कंपनी में विशाखापट्टनम में एचआर हेड है।
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बेटे से प्रेरणा लेकर श्याम धानक ने अपना जीवन दृष्टिहीन बच्चों की सेवा में लगाने का रास्ता चुन लिया। वह दृष्टिहीन बच्चों को ढूंढकर उनकी मदद करने लगे। यह सिलसिला सालों तक चलता रहा। फिर दृष्टिहीन बच्चों को एक छत के नीचे एकत्र कर उन्हें पढ़ाने के लिए नेशनल एसोसिएशन फार द ब्लाइंड (नैब) का गठन किया। 23 सितंबर 2003 में गौलापार में नैब की नींव रखी। शुरुआत में पांच बच्चे थे, जो आज बढ़कर 76 पहुंच गए हैं।
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श्याम धानक के अथक प्रयासों से नैब से जुड़े सभी बच्चों को शिक्षा मिल रही है। बच्चे दीक्षांत, नैनी वैली, सेंट पाल, सेक्रेड हार्ट जैसे कान्वेंट और सरकारी स्कूलों में ही नहीं बल्कि डिग्री कालेजों में भी पढ़ रहे हैं। उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों से नैब में रहने वाले बच्चे एक परिवार की तरह रहते हैं। दृष्टिहीन बच्चे आटा गुंथने, रोटी बनाने और कपड़े धोने से लेकर अपना सारा काम खुद ही करते हैं।


गर्मियों की छुट्टियों में अधिकांश बच्चे अपने घरों को लौट जाते हैं। श्याम धानक की यह पहल सराहनीय है और उनके साथ सैकड़ों लोग, संस्थाएं जुड़कर बच्चों का भविष्य संवार रही हैं। नैब में जाकर दृष्टिहीन बच्चों के साथ हर साल खुद और अपने बच्चों का बर्थडे मनाने वाली कवयित्री मीना अरोरा कहती हैं कि इन बच्चों के बीच खुशियां बांटना अच्छा लगता है।

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