{"_id":"7e5e08d6-ec96-11e2-9772-d4ae52bc57c2","slug":"shiva-was-cast-on-poison-stream-to-cool-flame","type":"story","status":"publish","title_hn":"इसलिए प्रिय है भगवान शिव को जलधारा...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इसलिए प्रिय है भगवान शिव को जलधारा...
रुड़की/दीपक मिश्रा
Updated Sun, 14 Jul 2013 08:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भगवान शिव के भीतर भड़क रही विष ज्वाला को शांत करने के लिए देवताओं ने कांवड़ में जल लाकर उन पर जलधारा डाली थी। इससे भगवान शिव को शीतलता मिली थी। तभी से भगवान शिव को जलधारा प्रिय है।
विज्ञापन
श्रावण मास में कांवड़ में घड़े बांधकर गंगाजल लाकर भगवान शिव धारा बनाकर चढ़ाने भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। जो श्रद्धालु सच्चे मन से इस कार्य को करता है। भगवान शिव उसकी सभी इच्छाएं पूरी करते हैं और उसे मनोवांछित फल देते हैं।
विज्ञापन
जब कंठ में धारण किया विष्ा
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश शुक्ला ने बताया कि देवताओं और दैत्यों द्वारा जिस समय समुद्र मंथन कर अमृत निकाला था। उस दौरान अमृत के साथ विष भी निकला था। जिसे देख सभी देवता और दैत्य भयभीत हो गये थे। तब भगवान शिव ने इस विश को पीकर कंठस्थ किया था।
विज्ञापन
तभी से भगवान शिव को नीलकंड नाम भी पुकारा जाता है। विष को पीते ही भगवान शिव में विष ज्वाला भड़क गई। जिससे वह व्याकुल होने लगे। विष ज्वाला को शांत करने के लिए देवतागण पवित्र नदियों का जल कांवड़ के द्वारा लाए और उसकी जलधारा बनाकर शिव को अर्पित किया।
इससे भगवान शिव को शीतलता मिली। जिससे भगवान शिव बेहद प्रसन्न हुए। पंडित शुक्ला ने बताया कि तभी से भगवान शिव को जल धारा बेहद प्रिय है। जो भक्त भगवान शिव सच्चे मन से जलधारा अर्पित करता है।
उस भक्त पर शिव प्रसन्न होते हैं। जिसके कारण उस भक्त के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। तभी से कांवड़ में जल लाकर भगवान शिव पर अर्पित किया जाता है।
16 से शुरू हो जाएगी कांवड़
16 जुलाई से कांवड़ उठनी शुरू हो जाएगी। दूर दराज से आने वाले कांवड़ियों इस दिन कांवड़ उठानी शुरू कर देंगे। 16 जुलाई को श्रावण संक्राती है। 23 से श्रावण शुरू हो रहा है।
पंडित राकेश शुक्ला ने बताया कि 4 अगस्त को शिवरात्री है। इस कांवड़ से लाया गया गंगाजल जलधारा बनाकर कांवड़िये भगवान शिव को अर्पित करेंगें।