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आपदा से बचने के बाद लोगों को निगल गई 'धरती' !

Wed, 04 Sep 2013 08:31 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 04 Sep 2013 08:31 AM IST
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saved people are still missing

16-17 जून की आपदा के बाद लापता लोगों का रहस्य और गहराता जा रहा है। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें सुरक्षित बचाए लोग अब तक अपने घर नहीं पहुंचे हैं।

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ऐसी ही एक महिला की तलाश का आदेश ग्वालियर हाईकोर्ट ने दिया है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर निवासी दिनेश पारासर का दावा है कि सेना ने अपने रेस्क्यू अभियान के तहत बचाए गए लोगों की फोटो जारी की है। ऐसी ही एक फोटो में उसकी भाभी विमला पारासर को सैनिकों के साथ आगे बढ़ते देखा जा सकता है।
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इसके बाद से विमला पारासर का अब तक कोई पता नहीं लगा है। दिनेश ने इस मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने एमपी सरकार को उक्त महिला समेत अन्य लापता लोगों की तलाश का आदेश दिया है।

अब एमपी सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश की कापी के साथ एक पत्र और फोटो उत्तराखंड सरकार को भेजकर महिला की तलाश को कहा है।

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असल सवाल यह है बचने के बाद भी महिला आखिर गई कहां। यह सवाल उन लोगों को भी मथ रहा है जो 17 जून के बाद एक बार अपने परिजनों से फोन पर तो संपर्क में तो आए, लेकिन बाद में उनका कोई पता नहीं लगा।

पहले भी आए ऐसे मामले
गुजरात के बड़ौदा की रहने वाली श्रीमती प्रज्ञा जयेश कुमार (51) को केदारनाथ से रेस्क्यू करके हर्षिल लाया गया। सेना ने 22 जून को एक तस्वीर जारी की। इसमें यह महिला दिखाई दे रही है।

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महिला के साथ उसकी बहन बीना रोहित (54) भी थीं, लेकिन दोनों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके अलावा पचासों और लोगों ने अखबारों में सूचना प्रकाशित कराई है कि रेस्क्यू आपरेशन के बाद उनकी परिजनों से बातचीत हुई, लेकिन बाद में कोई जानकारी नहीं मिल रही है।

नहीं चला व्यापक अभियान
सरकार ने लापता लोगों की खोज के लिए कोई व्यापक अभियान अब तक नहीं चलाया है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार को इस दिशा में भी काम करना होगा।

यह अलग बात है कि सरकार ने आपदा में लापता लोगों को मृत मानकर राहत राशि देने का काम शुरू कर दिया है।

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