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आपदा ने दी नई जिंदगी, किशोरी की अनोखी कहानी
राजीव खत्री
Updated Sat, 29 Jun 2013 01:35 AM IST
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उत्तराखंड की आपदा ने हजारों घर उजाड़ दिए। लेकिन एक ऐसी किशोरी है, जिसे इस दौरान जीवन की नई राह मिली। अनजान लोगों के साथ गौरीकुंड पहुंची यह किशोरी आपदा के बाद आईटीबीपी के जवानों को मिली। आपदा से पहले ही विपदा की मारी यह किशोरी अब नई शुरुआत करना चाहती है।
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देवप्रयाग तहसील के एक गांव में यह किशोरी माता-पिता और छोटे भाई-बहन के साथ रहती थी। परिवार पालने के लिए पिता घोड़े चलाते थे। सात-आठ साल पहले पिता एक दुर्घटना में चल बसे।
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इसके दूसरे ही दिन मां छोटे भाई-बहन को लेकर एक युवक के साथ चली गई। पांचवीं में पढ़ने वाली यह किशोरी घर में अकेली रह गई। गांववालों के दबाव में ताई ने आसरा तो दिया लेकिन बहुत बुरा व्यवहार किया। उसके सितम को याद करते हुए वह आज भी सिहर उठती है।
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तारीख तो याद नहीं मगर दो-ढाई हफ्ते पहले ताई ने सारे रिश्ते ताक पर रखते हुए उसे अजनबी ट्रक चालकों के हवाले कर दिया। ट्रक वालों ने कई दिन उसे घुमाया और फिर गौरीकुंड में छोड़कर गायब हो गए। कुछ दिन बाद 16 जून की रात जब वह सड़क किनारे सो रही थी, तभी पानी का सैलाब उसे बहा ले गया।
सिर पर चोट लगने से वह बेहोश हो गई। अगली सुबह आईटीबीपी के जवानों ने उसे बचाया और बृहस्पतिवार को रुद्रप्रयाग थाने लाकर पुलिस को सौंप दिया। इसके बाद उसे महिला कांस्टेबल के साथ नानी के घर भेज दिया गया है। शुक्र है आपदा के बाद किशोरी सुरक्षित लोगों के पास पहुंची।
पहले ही वह इतने दुख सह चुकी है। कहती है कि आपदा ने उसे नई जिंदगी दी। अब जिंदगी की नई शुरुआत करना चाहती हूं। नानी के साथ रहकर ही जिदंगी बिताऊंगी।