हरीश सरकार के लिए खतरा बने महाराज के 'अपने'
- कुछ और भी आ सकते हैं बागियों के खेमे में।
- महाराज समर्थक छह कांग्रेसी विधायकों से उम्मीद।
- अब तक एक भी महाराज समर्थक साथ नहीं आया।
विस्तार
उत्तराखंड में उपजे राजनीतिक संकट का भविष्य तो 28 मार्च को पता चलेगा, लेकिन अब भी भाजपा की निगाह कांग्रेस के कुछ विधायकों पर लगी है। भाजपा के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि कुछ और भी बागियों के खेमे में आ सकते हैं। फिलहाल दिल्ली से लेकर देहरादून तक यही चर्चा है कि किसके और कितने विधायक टूट सकते हैं। भाजपा को महाराज समर्थक छह कांग्रेसी विधायकों से काफी उम्मीद है।
बदरीनाथ विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी, थराली से प्रोफेसर जीतराम, कर्णप्रयाग से अनुसुइया प्रसाद मैखुरी, पौड़ी से सुंदरलाल मंद्रवाल, श्रीनगर से गणेश गोदियाल, देवप्रयाग से मंत्रीप्रसाद नैथानी ऐसे नाम हैं जिन्हें सतपाल महाराज का समर्थक माना जाता है।
खास बात यह है कि 18 मार्च को हुए घटनाक्रम में एक भी महाराज समर्थक भाजपा के साथ नहीं आया। इससे भाजपा में महाराज की राजनीतिक हैसियत पर भी सवाल उठ रहे हैं।
भाजपा भी फैला रही अपना जाल
इसलिए अब इन विधायकों को भाजपा के साथ लाने की रणनीति पर भी काम हो रहा है। जैसे-जैसे बहुमत साबित करने का समय नजदीक आ रहा है, उसी हिसाब से भाजपा का जाल भी फैलता जा रहा है।
कमजोर कड़ी दोनों तरफ है, कांग्रेस ने अपने कुछ बागी विधायकों के लिए दरवाजा अभी खुला रखा है। लेकिन शैलेंद्र मोहन सिंघल को मंडी परिषद अध्यक्ष के पद से हटाने के सरकार के निर्णय के बाद ऐसा लगने लगा है कि शायद ही किसी की वापसी हो।
शैला रानी रावत और अमृता रावत ने स्पीकर को भेजे अपने जवाब में पुन: मुख्यमंत्री पर निशाना साधा तो इनकी उम्मीद लगभग खत्म ही मानी जा रही है। वहीं, भाजपा को महाराज समर्थकों से उम्मीद है। यदि ऐसा हुआ तो फिर राजनीतिक समीकरण और ज्यादा बिगड़ेंगे।
खनन पर पूरा सच बयां करें रावत: महाराज
पूर्व केंद्रीय मंत्री सतपाल महाराज ने खनन प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत पर पलटवार किया है। सतपाल महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत कह रहे हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने खनन के 500 पट्टे आवंटित किए। लेकिन मुख्यमंत्री यह जानकारी नहीं दे रहे हैं कि विजय बहुगुणा के मुख्यमंत्री पद से हटते ही, जब उन्होंने सत्ता संभाली तो सारे पट्टे निरस्त कर अवैध खनन करवाया, जो अभी तक चल रहा है।
उन्होंने राष्ट्रपति और राज्यपाल से रावत सरकार को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। उनका यह भी कहना है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध ही उन्होंने कांग्रेस छोड़ी थी।