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भैयादूज को बंद होंगे केदारनाथ के कपाट
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Tue, 11 Oct 2016 10:37 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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पंच केदार में द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के कपाट 22 नवंबर और द्वितीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट सात नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। केदारनाथ धाम के कपाट परंपरानुसार भैया दूज पर आगामी एक नवंबर को प्रात: 8:30 बंद होंगे। इसी दिन बाबा केदार की पंचमुखी डोली रात्रि विश्राम के लिए रामपुर पहुंचेगी।
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बाबा केदार के शीतकालीन गद्दी स्थल विजयदशमी के पर्व पर ओंकारेश्वर मंदिर में आचार्य विश्वमोहन जमलोकी, यशोधर मैठाणी एवं सत्य प्रसाद सेमवाल ने पचांग गणना कर द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित की।
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पंचांग गणना के आधार पर 22 नवंबर को वृश्चिक लग्न में प्रात: 8:25 मिनट पर कपाट बंद किए जाएंगे। पूजा अनुष्ठान और मंदिर की परिक्रमा के उपरांत डोली उसी दिन रात्रि विश्राम के लिए गौंडार गांव पहुंचेगी। 23 नवंबर को रांसी, 24 को गिरीया गांव और 25 नवंबर को अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान होगी। यहां विधि-विधान के साथ मूर्ति को गर्भगृह में विराजमान किया जाएगा।
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उधर, मार्कण्डेय मंदिर मक्कूठ में आचार्य माहेश्वर प्रसाद मैठाणी ने पचांग गणना कर तृतीय केदार तुंगनाथ भगवान के कपाट बंद होने की तिथि घोषित की। धाम के कपाट सात नवंबर को प्रात: 10 बजे धनु लग्न में बंद होंगे। मंदिर की परिक्रमा के उपरांत अराध्य की डोली रात्रि विश्राम के लिए चोपता, आठ नवंबर को भुनकुन पहुंचेगी।
नौ नवंबर को भगवान तुंगनाथ की डोली शीतकालीन गद्दी स्थल मार्केण्डेय मंदिर पहुंचेगी। यहां पूजा-अनुष्ठान के साथ मूर्ति को गर्भगृह में विराजमान किया जाएगा। तिथि घोषित करने के मौके पर दोनों स्थानों पर बीकेटीसी के कार्यधिकारी अनिल शर्मा, मुख्य पुजारी राजशेखर लिंग, बागेश लिंग, पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, एमपी मैठाणी, मठापति राम प्रसाद मैठाणी, प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, उमादत्त मैठाणी आदि थे।
भैयादूज पर बंद होंगे केदारनाथ के कपाट
भगवान आशुतोष के 12 ज्योर्तिलिंगों में एक केदारनाथ धाम के कपाट परंपरानुसार भैयादूज के पर्व पर आगामी एक नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे। पंचांग गणना के अनुसार धाम के कपाट प्रात: 8:30 बजे विधि-विधान के साथ बंद किए जाएंगे।
इस मौके पर बाबा केदार की पंचमुखी डोली को गर्भगृह से मंदिर परिसर में लाया जाएगा। मंदिर की परिक्रमा के उपरांत डोली शीतकालीन गद्दी स्थल के लिए प्रस्थान करेगी और रात्रि विश्राम के लिए रामपुर पहुंचेगी।
दो नवंबर को डोली विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी और तीन नवंबर को शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होगी। यहां पर पूजा-अर्चना के उपरांत छह माह की पूजा के लिए बाबा की पंचमुखी डोली को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।