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योजनाएं क्षतिग्रस्त, पानी का भी संकट

Sat, 04 Jun 2016 09:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Sat, 04 Jun 2016 09:40 PM IST
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water problem in rudraprayag.
पानी की समस्‍या - फोटो : demo pic
रुद्रप्रयाग में दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश और अतिवृष्टि से जिला मुख्यालय की पुनाड़ गदेरा पेयजल लाइन सहित 30 योजनाएं क्षतिग्रस्त होने से नगर सहित 65 से अधिक गांवों में पेयजल संकट बना हुआ है। चमोली  जिले में एक माह के दौरान हुई अतिवृष्टि से विभिन्न स्थानों पर 15 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
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हालांकि जल संस्थान के अधिकारियों का दावा है कि सभी स्थानों पर अस्थायी तौर पर पेयजल लाइनों को सुचारु कर दिया गया है। टिहरी जिले के भिलंगना की बालगंगा घाटी में दर्जनभर गांवों की पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हैं। उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ और डुंडा ब्लॉक में भी अतिवृष्टि से 32 गांवों की पेयजल योजनाएं ध्वस्त हो गई। 
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दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश और अतिवृष्टि से जिला मुख्यालय की पुनाड़ गदेरा पेयजल लाइन सहित 30 योजनाएं क्षतिग्रस्त होने से नगर सहित 65 से अधिक गांवों में पेयजल संकट बना हुआ है। कई गांवों में प्राकृतिक स्रोतों के मलबे में दबने से स्थिति और गंभीर हो गई है। हालात इस कदर हैं कि लोगों को मीलों दूर से पीने का पानी जुटाना पड़ रहा है।
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बृहस्पतिवार शाम को हुई मूसलाधार बारिश से पुनाड़-रुद्रप्रयाग नगर, तिलणी, लमेरी, पाबौ, मवाणगांव, सौड़ी, जगोठ, मखोली, कोट मल्ला, कोदिमा सहित 30 पेयजल योजनाएं कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने से सप्लाई ठप पड़ी है। कई गांवों के प्राकृतिक स्रोत भी अतिवृष्टि की भेंट चढ़ गए हैं। धनपुर पट्टी के पाबौ गांव के लिए सप्लाई करने वाली कोठी-बजरियागैर योजना पर लगे 3 व 2.5 इंच के 20 पाइप अलग-अलग स्थानों पर बुरी तरह से पिचक गए हैं।

गांव की दूसरी योजना भी दो सौ मीटर क्षतिग्रस्त है। गांव के 150 परिवार तीन दिन से एक किमी दूर पंदेरा तोक के प्राकृतिक स्रोत से पानी जुटा रहे हैं। ग्राम पंचायत पाबौ के ग्राम प्रधान बीरा देवी, राजेंद्र सिंह बिष्ट, सुरेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि ग्रामीण अपने लिए जैसे-तैसे पीने का पानी जुटा रहे हैं। गोशालाओं में बंधे भैंस, बैल, बकरियों व अन्य जानवरों को पर्याप्त पानी जुटाना मुश्किल हो रहा है।

स्रोतों की सफाई में जुटे
कोट मल्ला गांव के ग्रामीण अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त हुए प्राकृतिक पेयजल स्रोत की सफाई में जुट गए हैं। श्रमदान कर दो दिन से ग्रामीण सोत के ऊपर जमा भारी मलबे और पत्थरों को हटाने का काम कर रहे हैं। घोतलीर में भी युवाओं ने स्रोत के समीप जमा मलबे को साफ किया।

गंदीले पानी ने बढ़ाई मुश्किलें
पुनाड़ गदेरा पेयजल लाइन के क्षतिग्रस्त होने से नगर में अधिकांश सप्लाई ठप है।  योजना से लगे दूसरी लाइन से कुछ घरों में सप्लाई हो रही है, जहां मिट्टीयुक्त पानी आ रहा है। इस पानी का सेवन तो दूर, कपड़े व बर्तन धोने के काम भी नहीं आ रहा है। स्थिति यह है कि पानी का रंग इतना काला है कि फर्श पर गिरते ही धाग पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ टैंकरों से गंदीले पानी की सप्लाई हो रही है।

योजनाएं क्षतिग्रस्त, गाड-गदेरों से ढो रहे पानी
घनसाली (टिहरी)। आपदा प्रभावित गांव के अधिकतर लोगों को पेयजल समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। आपदा से क्षतिग्रस्त हुई लाइनों की मरम्मत नहीं होने से ग्रामीण आधा से एक किमी दूर गाड-गदेरों से पानी ढोने को मजबूर हैं। परेशान लोगों ने योजनाओं की मरम्मत जल्द कराने की मांग की है।

भिलंगना की बालगंगा घाटी में 28 मई को बादल फटने से आए मलबे में दर्जनभर गांवों की पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। इससे अधिकतर गांवों में वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर जलापूर्ति तो शुरू कराई गई है, लेकिन गनगर, बहेड़ी, श्रीकोट, बलेश्वर, केमरा और सिल्यारा की क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत नहीं हो पाई है। ऐसे में ग्रामीणों को आधा से एक किमी दूर प्राकृतिक जल स्रोत और गदेरों से किसी तरह पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

गांव के लोगों ने स्थायी मरम्मत होने तक किसी तरह वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर पानी पहुंचाने की अपील की है। इस बाबत जल संस्थान के अधिशासी अभियंता एसपी सेमवाल ने कहा कि आपदा से दर्जनभर गांवों की योजनाएं क्षतिग्रस्त हुई है, उनमें से अधिकतर पर वैकल्पिक व्यवस्था कर पानी पहुंचाया गया है। अन्य गांवों की योजनाओं की भी मरम्मत की जा रही है। वहां दो-तीन दिन में पानी पहुंचाया जाएगा।

पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त, 32 गांवों में दिक्कत
चिन्यालीसौड़। 28 मई को चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के दशगी, हातड़ एवं बिष्ट पट्टी तथा डुंडा के भंडारस्यूं क्षेत्र में अतिवृष्टि से भारी तबाही हुई। क्षेत्र के गाड गदेरों में आए उफान से 32 गांवों की पेयजल योजनाएं भी ध्वस्त हो गईं। ऐसे में  रमोली, कामदा, जिव्या, कोटधार, धारकोट, बनचौरा, खदाड़ा, बागी, बडली, छैजुला, बनोट, मथाली, क्यारी दशगी, पुजारगांव, बणगांव, टंडोल, सूरी, दारगढ़, बंदोल आदि गांवों के ग्रामीण बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं।

हालांकि जल संस्थान इन गांवों में वैकल्पिक व्यवस्था कर आंशिक जलापूर्ति बहाल करने का दावा कर रहा है, लेकिन ग्रामीण अब भी हैंडपंप और प्राकृतिक स्रोतों का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। जल संस्थान के ईई वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि आपदा में जल संस्थान की पेयजल योजनाओं को करीब 1,14,50,000 रुपये का नुकसान हुआ। फिलहाल प्राकृतिक स्रोतों को टेप कर उक्त गांवों में आंशिक जलापूर्ति बहाल कर दी गई है।

चमोली में 15 पेयजल योजनाएं हैं क्षतिग्रस्त
गोपेश्वर। जिले में एक माह के दौरान हुई अतिवृष्टि से विभिन्न स्थानों पर 15 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। ऐसे में ग्रामीण पूरी तरह प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर हैं। हालांकि जल संस्थान के अधिकारियों का दावा है कि सभी स्थानों पर अस्थायी तौर पर पेयजल लाइनों को सुचारु कर दिया गया है।

जिले में जल संस्थान के गोपेश्वर डिवीजन में जहां सैकोट, घुड़साल (रिठोली) और देवर-खडोरा पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। वहीं कर्णप्रयाग में कर्णप्रयाग, थराली-देवराडा, ढुंगा-खोली, डुंग्री, सुनाऊं-देवल ग्वाड़, कुलसारी, माल, मोल्ठा, देवाल, सोडिंग, पुनगांव और बिसोंडा गांवों की पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त है।

जल संस्थान के कर्णप्रयाग के अधिशासी अभियंता नरेंद्र पयाल का कहना है कि सभी क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों पर रबर के पाइपों सेे आपूर्ति सुचारु कर दी गई है। साथ ही लाइनों के सुधार के लिए वित्तीय प्रस्ताव तैयार कर लिए गए हैं। प्रस्ताव को शासन से स्वीकृति मिलते ही लाइनों का सुधार कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

श्रीनगर में गंदे पानी की हो रही सप्लाई
श्रीनगर। नगर क्षेत्र में गंदे और बदबूदार पेयजल आपूर्ति से जलजनित रोगों की आशंका बढ़ गई है। वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नदी में आ रहा गंदा पानी फिल्टर से भी साफ नहीं हो पा रहा है। नगर क्षेत्र में करीब चार दिनों से बेहद गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है।

स्थानीय निवासी गोकुलानंद का कहना है कि बदबू के कारण इसे पीने में भी दिक्कत है। उबालने के बाद भी बदबू हट नहीं रही है। दिनेश प्रसाद ने बताया कि विभागीय अधिकारियों से कई बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।


स्थानीय निवासियों ने जल्द साफ पेयजल आपूर्ति न करने पर तहसील परिसर में घेराव की चेतावनी दी है। जल संस्थान के अवर सहायक अभियंता सोहन सिंह जेठूड़ी ने कहा कि इन दिनों नदी में ही काफी गंदा पानी आ रहा है। पानी में गाद अधिक होने से फिल्टर नहीं हो पा रहा है। पानी में एक दिन में चार बार फिल्टर किया जा रहा है। संस्थान का पूरा प्रयास है कि उपभोक्ताओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो।
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