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मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए पेड़ों पर चढ़ने को मजबूर तोषी के ग्रामीण
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सूचना क्रांति के दौर में भी केदारघाटी के सबसे दूरस्थ गांवों में एक तोषी गांव को मोबाइल कनेक्टिविटी नसीब नहीं हो पाई है। मोबाइल पर सिग्नल के लिए पेड़ों पर चढ़कर लोग सगे-संबंधियों से बातचीत करने को मजबूर हैं। इंटरनेट सेवा यहां के लोगों के लिए सपने के समान है।
केदारघाटी में 46 परिवारों वाले तोषी गांव के ग्रामीण त्रियुगीनारायण से अपने घरों तक पहुंचने के लिए छह किमी पैदल चढ़ाई नाप रहे हैं। भले ही मोटर मार्ग का निर्माण शुरू हो गया है। लेकिन गांव आज भी संचार सेवा से वंचित हैं। यहां के ग्रामीणों के पास मोबाइल फोन तो हैं, लेकिन सिग्नल नहीं होने के कारण उन्हें कनेक्टिविटी के लिए पेड़ों पर चढ़ना होता है, जिससे बातचीत हो पाती है। ग्राम प्रधान जगत सिंह रावत ने बताया कि तोषी गांव आज भी आदिकाल में जीने को मजबूर है। सड़क, स्वास्थ्य, संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं आज भी ग्रामीणों को नसीब नहीं हो पाई हैं। अब केदारनाथ विधायक पर ही भरोसा है कि वह गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए टावर लगाएं, जिससे स्कूली बच्चे और अन्य युवाओं को इंटरनेट सेवा का लाभ मिल सके। अगस्त्यमुनि ब्लॉक के रानीगढ़ पट्टी के गांवों में भी मोबाइल कनेक्टिविटी बमुश्किल से हो पाती है। यही स्थिति जखोली ब्लॉक के पूर्वी बांगर क्षेत्र की भी बनी हुई है। यहां निजी संचार कंपनियों ने टावर लगाए हैं, लेकिन कनेक्टिविटी आज भी बहुत कमजोर है। दूसरी तरफ मिनी स्वीट्जरलैंड के नाम से प्रसिद्ध पर्यटक स्थल चोपता, द्वितीय केदार मद्महेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ को भी संचार सेवा से जोड़ने के लिए आज तक कोई प्रयास नहीं हो पाए हैं। इधर, भारत संचार निगम के सहायक महाप्रबंधक जेएस रावत ने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों को मोबाइल कनेक्टिविटी से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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केदारघाटी में 46 परिवारों वाले तोषी गांव के ग्रामीण त्रियुगीनारायण से अपने घरों तक पहुंचने के लिए छह किमी पैदल चढ़ाई नाप रहे हैं। भले ही मोटर मार्ग का निर्माण शुरू हो गया है। लेकिन गांव आज भी संचार सेवा से वंचित हैं। यहां के ग्रामीणों के पास मोबाइल फोन तो हैं, लेकिन सिग्नल नहीं होने के कारण उन्हें कनेक्टिविटी के लिए पेड़ों पर चढ़ना होता है, जिससे बातचीत हो पाती है। ग्राम प्रधान जगत सिंह रावत ने बताया कि तोषी गांव आज भी आदिकाल में जीने को मजबूर है। सड़क, स्वास्थ्य, संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं आज भी ग्रामीणों को नसीब नहीं हो पाई हैं। अब केदारनाथ विधायक पर ही भरोसा है कि वह गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए टावर लगाएं, जिससे स्कूली बच्चे और अन्य युवाओं को इंटरनेट सेवा का लाभ मिल सके। अगस्त्यमुनि ब्लॉक के रानीगढ़ पट्टी के गांवों में भी मोबाइल कनेक्टिविटी बमुश्किल से हो पाती है। यही स्थिति जखोली ब्लॉक के पूर्वी बांगर क्षेत्र की भी बनी हुई है। यहां निजी संचार कंपनियों ने टावर लगाए हैं, लेकिन कनेक्टिविटी आज भी बहुत कमजोर है। दूसरी तरफ मिनी स्वीट्जरलैंड के नाम से प्रसिद्ध पर्यटक स्थल चोपता, द्वितीय केदार मद्महेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ को भी संचार सेवा से जोड़ने के लिए आज तक कोई प्रयास नहीं हो पाए हैं। इधर, भारत संचार निगम के सहायक महाप्रबंधक जेएस रावत ने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों को मोबाइल कनेक्टिविटी से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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