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त्रियुगीनारायण के ग्रामीणों ने भगवान बामन को अर्पित की जौ की हरियाली
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भगवान शिव-पार्वती की विवाह स्थली त्रियुगीनारायण में ग्रामीणों ने भगवान बामन को अर्पित की घरों म?
- फोटो : RUDRAPRYAG
भगवान शिव और पार्वती की विवाह स्थली त्रियुगीनारायण मंदिर में देर शाम को ग्रामीणों ने विधि-विधान और पौराणिक रीति-रीवाजों के तहत भगवान को हरियाली अर्पित की। इस मौके पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ आराध्य की पूजा-अर्चना की गई। वहीं, आगामी 10 सितंबर से शुरू होने वाले बामन द्वादशी मेले की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।
शुक्रवार को धुर्बा अष्टमी के पावन पर्व पर त्रियुगीनारायण गांव के सभी घरों से महिलाएं पारंपरिक पहनावे के साथ देर शाम को सिर पर जौ की हरियाली से भरी टोकरी रखकर मंदिर में पहुंची। यहां पर पुजारियों द्वारा भगवान भगवान नारायण व हरियाली की वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस मौके पर पारंपरिक रीति-रीवाजों के साथ ग्रामीणों ने सर्वप्रथम घरों में उगाई जौ की हरियाली को भगवान बामन को अर्पित की। इसके उपरांत मंदिर में मौजूद सभी भक्तजनों को प्रसाद के रूप में जौ की हरियाली भेंट की गई। साथ ही गांव के प्रत्येक घर-घर में जाकर प्रसाद वितरित की गई, जिसे ग्रामीणों ने अपने घर के देव मंदिर में रखा। त्रियुगीनारायण में आयोजित हरियाली मेले को लेकर प्राचीन मान्यता है कि भगवान बामन ने अवतार लेने से चार दिन पहले अपनी माता अधिति एवं देव कन्याओं को अपने विराट रूप के दर्शन दिए थे। तब उन्होंने प्रसन्न होकर भगवान को धुर्बा अष्टमी की हरियाली भेंट की थी। तभी ये प्रतिवर्ष ग्रामीणों द्वारा मंदिर में परंपरानुसार हरियाली मेला मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मेला समिति के अध्यक्ष दिवाकर गैरोला, राजेश प्रसाद भटट, योगेंद्र तिवारी, महेंद्र सेमवाल, मीनाक्षी घिल्डियाल, संजय भटट, रजनीश गैरोला आदि मौजूद थे।
10 सितंबर को होगा द्वादशी मेला
गुप्तकाशी। आगामी 10 सितंबर को बामन द्वादशी के पावन अवसर पर त्रियुगीनारायण मंदिर में मेला का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर भगवान बामन अपने पश्वा पर अवतरित होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इस दौरान भगवान की मूर्ति को चांदी की थाल पर रखकर मंदिर की परिक्रमा की जाती है। इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इस मेला को स्थानीय भाषा में झाकड़ी मेला भी कहा जाता है।
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शुक्रवार को धुर्बा अष्टमी के पावन पर्व पर त्रियुगीनारायण गांव के सभी घरों से महिलाएं पारंपरिक पहनावे के साथ देर शाम को सिर पर जौ की हरियाली से भरी टोकरी रखकर मंदिर में पहुंची। यहां पर पुजारियों द्वारा भगवान भगवान नारायण व हरियाली की वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस मौके पर पारंपरिक रीति-रीवाजों के साथ ग्रामीणों ने सर्वप्रथम घरों में उगाई जौ की हरियाली को भगवान बामन को अर्पित की। इसके उपरांत मंदिर में मौजूद सभी भक्तजनों को प्रसाद के रूप में जौ की हरियाली भेंट की गई। साथ ही गांव के प्रत्येक घर-घर में जाकर प्रसाद वितरित की गई, जिसे ग्रामीणों ने अपने घर के देव मंदिर में रखा। त्रियुगीनारायण में आयोजित हरियाली मेले को लेकर प्राचीन मान्यता है कि भगवान बामन ने अवतार लेने से चार दिन पहले अपनी माता अधिति एवं देव कन्याओं को अपने विराट रूप के दर्शन दिए थे। तब उन्होंने प्रसन्न होकर भगवान को धुर्बा अष्टमी की हरियाली भेंट की थी। तभी ये प्रतिवर्ष ग्रामीणों द्वारा मंदिर में परंपरानुसार हरियाली मेला मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मेला समिति के अध्यक्ष दिवाकर गैरोला, राजेश प्रसाद भटट, योगेंद्र तिवारी, महेंद्र सेमवाल, मीनाक्षी घिल्डियाल, संजय भटट, रजनीश गैरोला आदि मौजूद थे।
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10 सितंबर को होगा द्वादशी मेला
गुप्तकाशी। आगामी 10 सितंबर को बामन द्वादशी के पावन अवसर पर त्रियुगीनारायण मंदिर में मेला का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर भगवान बामन अपने पश्वा पर अवतरित होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इस दौरान भगवान की मूर्ति को चांदी की थाल पर रखकर मंदिर की परिक्रमा की जाती है। इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इस मेला को स्थानीय भाषा में झाकड़ी मेला भी कहा जाता है।
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