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साढ़े तीन साल बाद भी छत नहीं हुई नसीब
ब्यूरो/अमर उजाला रुद्रप्रयाग
Updated Sat, 28 May 2016 10:22 PM IST
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ऊखीमठ आपदा के साढ़े तीन वर्ष बाद भी प्रभावित सोहन लाल को छत नसीब नहीं हो पाई है। पीड़ित अपने परिवार के साथ ससुराल में सड़क किनारे टेंट लगाकर जीवन यापन कर रहा है। केदारघाटी के सेमी गांव निवासी मनोज लाल जखोली ब्लाक के चौंरा गांव में सड़क किनारे टेंट लगाकर तीन माह से परिवार के साथ जीवन यापन कर रहा है।
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वह मजदूरी कर परिवार का पालन कर रहा है। कहना है कि वर्ष 2012 में आई ऊखीमठ आपदा में पीड़ित का घर और खेत बह गए थे। ग्रामीणों के प्रयास से पीड़ित को गांव में ही किसी के पुराने मकान में शरण ली। मकान की हालत इस कदर जर्जर थी कि कभी भी कोई नुकसान हो सकता था।
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ऐसे में पीड़ित ने कुछ समय बाद एक कमरा किराये पर लिया गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने से परिवार का पालन और कमरे का किराया देना मुश्किल हो रहा था। छह माह पहले वह परिवार के साथ अपनी ससुराल आ गया। यहां सड़क किनाने टेंट लगाकर रह रहा है।
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पीड़ित का कहना है कि गांव में भूस्खलन से कुछ नहीं बचा है। ससुराल में दूसरों के सहारे गुजारा हो रहा है। शासन, प्रशासन से कई बार इंदिरा व राजीव गांधी आवास के लिए गुहार लगाई गई, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
ऊखीमठ के सेमी गांव निवासी मनोज लाल अपनी मर्जी से टेंट में रह रहा है। प्रशासनिक स्तर पर उसकी हरसंभव मदद की जा रही है। - सुनील राज, तहसीलदार जखोली