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शीतकाल के लिए तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट बंद
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तृतीय केदार तुंगनाथ भगवान की चल उत्सव विग्रह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर मक्कूमठ ?
- फोटो : RUDRAPRYAG
विधि-विधान एवं पौराणिक रीति-रीवाजों के साथ तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। बाबा तुंगनाथ की डोली ने शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर के लिए प्रस्थान किया। डोली अपने पहले पड़ाव चोपता स्थित भूतनाथ मंदिर पहुंची। नौ नवंबर को बाबा की डोली मर्कटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में विराजमान हो जाएंगे।
सोमवार सुबह सात बजे से तृतीय केदार तुंगनाथ में आराध्य की विशेष पूजा-अर्चना शुरू की गई। पुजारी अतुल मैठाणी ने बाबा तुंगनाथ की अभिषेक पूजा कर आरती उतारी। इसके बाद सुबह 10 बजे मठाधिपति राम प्रसाद मैठाणी के हाथों पंच पुरोहित रविंद्र मैठाणी, मुकेश मैठाणी, जयकृष्ण मैठाणी, चंद्रप्रकाश मैठाणी, विनोद मैठाणी व मनोज मैठाणी ने वेद मंत्रोच्चारण के साथ गर्भगृह में दान सहित अन्य धार्मिक परंपराओं का निर्वहन कराया। इसके बाद पुजारियों ने तृतीय केदार के स्वयंभू लिंग को पुष्प, अक्षत, वस्त्र सहित अन्य पूजन सामग्री से समाधि रूप दिया।
इस दौरान हुड्डू और अखोड़ी के जमाणियों ने डोली का श्रृंगार किया और पुजारियों ने आराध्य भोग मूर्तियों को विराजमान किया। इसके बाद पूर्वाह्न 11:30 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। बाबा तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली ने मंदिर की परिक्रमा करते हुए अपने अधीनस्थ भैरवनाथ, भूतनाथ व ईशानेश्वर मंदिर की परिक्रमा और अपने भंडार गृह के ताम्रपात्रों का निरीक्षण करते हुए शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर मक्कूमठ के लिए प्रस्थान किया। डोली बुग्याली रास्ते से होते हुए दोपहर बाद लगभग ढाई बजे भूतनाथ मंदिर चोपता पहुंची।
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इस मौके पर बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह, सदस्य श्रीनिवास पोस्ती, कार्याधिकारी आरसी तिवारी, तुंगनाथ मंदिर के प्रबंधक बीएस नेगी, कालीमठ मंदिर के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, कैलाश बगवाड़ी, कुशाल सिंह नेगी, प्रेम सिंह राणा, विमला नेगी, भगवती प्रसाद सेमवाल आदि मौजूद थे।
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सोमवार सुबह सात बजे से तृतीय केदार तुंगनाथ में आराध्य की विशेष पूजा-अर्चना शुरू की गई। पुजारी अतुल मैठाणी ने बाबा तुंगनाथ की अभिषेक पूजा कर आरती उतारी। इसके बाद सुबह 10 बजे मठाधिपति राम प्रसाद मैठाणी के हाथों पंच पुरोहित रविंद्र मैठाणी, मुकेश मैठाणी, जयकृष्ण मैठाणी, चंद्रप्रकाश मैठाणी, विनोद मैठाणी व मनोज मैठाणी ने वेद मंत्रोच्चारण के साथ गर्भगृह में दान सहित अन्य धार्मिक परंपराओं का निर्वहन कराया। इसके बाद पुजारियों ने तृतीय केदार के स्वयंभू लिंग को पुष्प, अक्षत, वस्त्र सहित अन्य पूजन सामग्री से समाधि रूप दिया।
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इस दौरान हुड्डू और अखोड़ी के जमाणियों ने डोली का श्रृंगार किया और पुजारियों ने आराध्य भोग मूर्तियों को विराजमान किया। इसके बाद पूर्वाह्न 11:30 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। बाबा तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली ने मंदिर की परिक्रमा करते हुए अपने अधीनस्थ भैरवनाथ, भूतनाथ व ईशानेश्वर मंदिर की परिक्रमा और अपने भंडार गृह के ताम्रपात्रों का निरीक्षण करते हुए शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर मक्कूमठ के लिए प्रस्थान किया। डोली बुग्याली रास्ते से होते हुए दोपहर बाद लगभग ढाई बजे भूतनाथ मंदिर चोपता पहुंची।
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इस मौके पर बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह, सदस्य श्रीनिवास पोस्ती, कार्याधिकारी आरसी तिवारी, तुंगनाथ मंदिर के प्रबंधक बीएस नेगी, कालीमठ मंदिर के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, कैलाश बगवाड़ी, कुशाल सिंह नेगी, प्रेम सिंह राणा, विमला नेगी, भगवती प्रसाद सेमवाल आदि मौजूद थे।