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गौरव के तबले की थाप विदेशों तक पहुंची
अमर उजाला ऊखीमठ
Updated Tue, 05 Jan 2016 08:40 PM IST
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विजय प्रसाद मैठाणी की दो संतानों में बड़े गौरव को बचपन से ही संगीत से लगाव था। गांव और स्कूल में होने वाले कार्यक्रमों में भी वह उत्सुकता के साथ प्रतिभाग करता और ढोलक पर अपनी थाप से सबको मुरीद बना जाता। पिता ने बेटे के इस हुनर को सराहा। वह उसे ऋषिकेश ले गए, जहां नजदीकी रिश्तेदार गणपति नौटियाल से गौरव संगीत की शिक्षा ग्रहण करने लगा।
गौरव मैठाणी ने वर्ष 2009 में प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद से तबला वादन में विशारद की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद से वह देश- विदेश में रंगमंच से जुड़े कलाकारों की टीम का अभिन्न हिस्सा बन गया।
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गौरव एक दशक से उत्तराखंड के लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, प्रीतम भरतवाण, मंगलेश डंगवाल, साहब सिंह रमोला, वीरेंद्र राजपूत, मीना राणा, कल्पना चौहान सहित अन्य लोक गायक/गायिकाओं के साथ काम करते आ रहे हैं। उनकी प्रतिभा का लोहा दूरदर्शन और आकाशवाणी ने भी माना। यहां नियमित अंतराल में उन्हें बुलाया जाता है।
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विदेशों में गूंजी तलबे की गूंज
ऊखीमठ। वर्ष 2010 में पहली बार गौरव अपने स्टेज प्रोग्राम के लिए जर्मनी गए। वहां उनकी तबले की थाप के सभी मुरीद हो गए थे। इसके बाद पेरिस, म्यूनिख, ज्यूरिख, मॉरीशस में कार्यक्रम हुए। न्यूजीलैंड में कार्यरत उत्तराखंड एसोसिएशन ऑफ न्यूजीलैंड की ओर से क्रिसमस कार्यक्रम में गौरव ने बीते वर्ष 25 दिसंबर को स्टेज प्रोग्राम में खूब तालियां बटोरी।
परिवार का मिला सहयोग
ऊखीमठ। 32 वर्षीय गौरव कहते हैं घर-परिवार का हमेशा से सहयोग मिला। माता-पिता भाई और पत्नी उन्हें प्रोत्साहित कर हमेशा कुछ अलग करने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के कारण घर-परिवार को कम समय देने के बावजूद कभी भी वे नाराज नहीं होते।