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विकास के लिए छटपटा रहा है गुप्तकाशी
ब्यूरो/अमर उजाला, गुप्तकाशी
Updated Tue, 19 Apr 2016 06:41 PM IST
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केदारनाथ यात्रा का मुख्य बाजार होने के साथ ही केदारघाटी का राजनीतिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र होने के बाद भी गुप्तकाशी विकास के लिए छटपटा रहा है। विकास के लिए की गई घोषणाएं फलीभूत नहीं हो पाई।
समुद्रतल से करीब 14 सौ मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुप्तकाशी ग्राम पंचायत है। करीब साढे़ छह हजार आबादी वाला यह गांव केदारघाटी का मध्य क्षेत्र है। 16/17 जून 2013 को आई केदारनाथ आपदा के बाद, राहत एवं बचाव कार्यों में गुप्तकाशी की अहम भूमिका रही। जीआईसी व चारधाम हेलीपैड व अन्य स्थानों पर सरकार की ओर से कैंप लगाकर प्रभावितों को राहत दी गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी और कृषि मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने गुप्तकाशी के विकास के लिए कई घोषणाएं की, लेकिन कोई फलीभूत नहीं हुई।
इसलिए पड़ा गुप्तकाशी नाम
धार्मिक रूप से जितनी महत्ता काशी की है, उतनी ही गुप्तकाशी की भी है। किवदंती के अनुसार, महाभारत के युद्ध के बाद पांडव शिव दर्शन के लिए हिमालय की तरफ आए। नाराज शिव उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते हैं, वे आगे बढ़ते हुए इस स्थान पर गुप्त रूप से अंर्तध्यान हो गए, जिससे यहां का नाम गुप्तकाशी पड़ा।
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गुप्तकाशी के विकास के लिए की गई घोषणाएं
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकण।
बाजार के रास्तों का सुधारीकरण व सुरक्षा इंतजाम।
नर्सिंग कालेज की स्थापना।
उप तहसील बनाना।
गुप्तकाशी बाजार व गाड़-गदेरों में चेक डैम निर्माण।
विश्वनाथ मंदिर मार्ग का सुधारीकरण।
गुप्तकाशी के साथ सिर्फ छलावा किया गया है। सरकार घोषणाएं न करती और यहां जरूरी सुविधाओं को बेहतर करती। - मदन अग्रवाल, ग्राम प्रधान ग्राम पंचायत गुप्तकाशी
समुद्रतल से करीब 14 सौ मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुप्तकाशी ग्राम पंचायत है। करीब साढे़ छह हजार आबादी वाला यह गांव केदारघाटी का मध्य क्षेत्र है। 16/17 जून 2013 को आई केदारनाथ आपदा के बाद, राहत एवं बचाव कार्यों में गुप्तकाशी की अहम भूमिका रही। जीआईसी व चारधाम हेलीपैड व अन्य स्थानों पर सरकार की ओर से कैंप लगाकर प्रभावितों को राहत दी गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी और कृषि मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने गुप्तकाशी के विकास के लिए कई घोषणाएं की, लेकिन कोई फलीभूत नहीं हुई।
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इसलिए पड़ा गुप्तकाशी नाम
धार्मिक रूप से जितनी महत्ता काशी की है, उतनी ही गुप्तकाशी की भी है। किवदंती के अनुसार, महाभारत के युद्ध के बाद पांडव शिव दर्शन के लिए हिमालय की तरफ आए। नाराज शिव उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते हैं, वे आगे बढ़ते हुए इस स्थान पर गुप्त रूप से अंर्तध्यान हो गए, जिससे यहां का नाम गुप्तकाशी पड़ा।
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गुप्तकाशी के विकास के लिए की गई घोषणाएं
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकण।
बाजार के रास्तों का सुधारीकरण व सुरक्षा इंतजाम।
नर्सिंग कालेज की स्थापना।
उप तहसील बनाना।
गुप्तकाशी बाजार व गाड़-गदेरों में चेक डैम निर्माण।
विश्वनाथ मंदिर मार्ग का सुधारीकरण।
गुप्तकाशी के साथ सिर्फ छलावा किया गया है। सरकार घोषणाएं न करती और यहां जरूरी सुविधाओं को बेहतर करती। - मदन अग्रवाल, ग्राम प्रधान ग्राम पंचायत गुप्तकाशी