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Rudraprayag News: कठपुतली कला से शिक्षा को रोचक बनाएंगे प्रावि गौंडार के शिक्षक
Thu, 24 Sep 2026 05:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Thu, 24 Sep 2026 05:17 PM IST
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फोटो
असम के गुवाहाटी में कठपुतली पर कार्यशाला में लिया प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊखीमठ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विद्यालयी शिक्षा को प्रभावी, रचनात्मक बनाने के उद्देश्य से असम के गुवाहाटी में कठपुतली पर कार्यशाला हुई जिसमें शिक्षकों ने प्रतिभाग गया। रुद्रप्रयाग से सुदूरवर्ती प्राथमिक विद्यालय गौंडार के शिक्षक दीपक भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में मिली तकनीकों का उपयोग विद्यालय में शिक्षण को और रोचक बनाने के लिए किया जाएगा।
सीसीआरटी, संस्कृति मंत्रालय केंद्र सरकार की ओर से आयोजित कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे शिक्षकों को कठपुतली से शिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाने की विधियां बताई गईं। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने फिंगर पपेट, हैंड पपेट सहित विभिन्न प्रकार की कठपुतलियां बनाने और उनके शैक्षिक उपयोग की जानकारी ली। भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन और सामाजिक विषयों को कहानी, संवाद और अभिनय के माध्यम से सरल ढंग से प्रस्तुत करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। दीपक रावत ने कहा कि कठपुतली कला बच्चों की कल्पनाशीलता, आत्मविश्वास, सहयोग और रचनात्मक अभिव्यक्ति विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। प्रशिक्षण में मिली तकनीकों का उपयोग विद्यालय में शिक्षण को और रोचक बनाने के लिए किया जाएगा।
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असम के गुवाहाटी में कठपुतली पर कार्यशाला में लिया प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊखीमठ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विद्यालयी शिक्षा को प्रभावी, रचनात्मक बनाने के उद्देश्य से असम के गुवाहाटी में कठपुतली पर कार्यशाला हुई जिसमें शिक्षकों ने प्रतिभाग गया। रुद्रप्रयाग से सुदूरवर्ती प्राथमिक विद्यालय गौंडार के शिक्षक दीपक भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में मिली तकनीकों का उपयोग विद्यालय में शिक्षण को और रोचक बनाने के लिए किया जाएगा।
सीसीआरटी, संस्कृति मंत्रालय केंद्र सरकार की ओर से आयोजित कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे शिक्षकों को कठपुतली से शिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाने की विधियां बताई गईं। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने फिंगर पपेट, हैंड पपेट सहित विभिन्न प्रकार की कठपुतलियां बनाने और उनके शैक्षिक उपयोग की जानकारी ली। भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन और सामाजिक विषयों को कहानी, संवाद और अभिनय के माध्यम से सरल ढंग से प्रस्तुत करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। दीपक रावत ने कहा कि कठपुतली कला बच्चों की कल्पनाशीलता, आत्मविश्वास, सहयोग और रचनात्मक अभिव्यक्ति विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। प्रशिक्षण में मिली तकनीकों का उपयोग विद्यालय में शिक्षण को और रोचक बनाने के लिए किया जाएगा।
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