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अपने केबिन में ही ओपीडी शुरू कर देते हैं पीएमएस डॉ. रखोलिया
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डॉ. मनु पांडे।
- फोटो : KASHIPUR
जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. टीडी रखोलिया कोरोना संक्रमण काल में कोरोना वॉरियर्स के रूप में कार्य कर रहे हैं। जिला अस्पताल के डेडिकेटेड कोरोना सेंटर और अस्पताल की प्रशासनिक जिम्मेदारी उनके कंधों पर हैं। इसके बीच नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रखोलिया को जब भी समय मिलता है तो अपने कक्ष में ही ओपीडी शुरू कर देते हैं।
कोरोना संक्रमण काल में जिला अस्पताल को डेडिकेटेड कोरोना सेंटर में तब्दील करने के बाद डॉ. रखोलिया पर जिम्मेदारी बढ़ गई है। डॉ. रखोलिया कहते हैं कि कोरोना ड्यूटी के चलते नेत्र रोगियों के इलाज के लिए पहले की तरह समय नहीं दे पा रहे हैं, इस कारण जब भी उन्हें समय मिलता है तो नेत्र रोगियों को अपने कक्ष में बुलाकर उनकी जांच करते हैं।
वे प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों की आंखों की जांच कर रहे हैं। साथ ही करीब छह से आठ ऑपरेशन भी कर रहे हैं। डॉ. रखोलिया कहते हैं कि गरीब आदमी अपने इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर है। कोराना महामारी के बीच कोई भी मरीज जिला अस्पताल में इलाज से वंचित न रहे, इसके लिए वह पूरी कोशिश करते रहते हैं।
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कोरोना से जंग में डॉक्टर तन-मन से जुटे हैं डॉक्टर
काशीपुर। कोरोना से जंग में डॉक्टर तन-मन से जुटे हुए हैं। उन्हें लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह भी नहीं है।
काशीपुर सरकारी अस्पताल के डॉ. राजीव गुप्ता की कोरोना ओपीडी, रेपिड रेस्पांस टीम, आइसोलेशन वार्ड में ही तैनाती है। वह रोजाना योग और नाश्ता करने के बाद आठ बजे ड्यूटी पर चले जाते हैं। अस्पताल से लौटने पर परिवार को संक्रमण से बचाने के लिए खुद को एक कमरे में सीमित किया हुआ है। डॉ. राजीव कहते हैं कि वह बीते तीन महीने से अपने परिवार से दूर हैं। अलग कमरे में रहना, खाना पड़ रहा है। उनके माता-पिता बीमार हैं।
वह मुरादाबाद में भाई संजीव गुप्ता के साथ रहते हैं। कोरोना की ड्यूटी के कारण वह उनसे नहीं मिल पा रहे हैं। डॉ. गुप्ता का कहना है कि कोरोना से बचने के लिए लोगों को जागरूक होना चाहिए।
वहीं ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. मनु पांडे की ड्यूटी काशीपुर-ठाकुरद्वारा यूपी के बॉर्डर पर सूर्या चौकी में लगी हुई है। डॉ. पांडे ठाकुरद्वारा में रहते हैं। डॉ. मनु पांडे ने बताया कि उनका सात साल का पुत्र अपूर्व व एक साल की पुत्री सानवी है। पत्नी ज्योति पांडे गृहणी हैं। उनके पिता व माता भी उनके साथ ही रहते हैं। डॉ. पांडे ने बताया कि वह अपने बच्चों से कम ही मिल पाते हैं। वह घर पहुंचकर स्वयं ही कपड़े धोते हैं और अलग कमरे में रहते हैं। उनका कहना कि बच्चों को खिलाने का मन करता हैं लेकिन बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ रहा है। ब्यूरो
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कोरोना संक्रमण काल में जिला अस्पताल को डेडिकेटेड कोरोना सेंटर में तब्दील करने के बाद डॉ. रखोलिया पर जिम्मेदारी बढ़ गई है। डॉ. रखोलिया कहते हैं कि कोरोना ड्यूटी के चलते नेत्र रोगियों के इलाज के लिए पहले की तरह समय नहीं दे पा रहे हैं, इस कारण जब भी उन्हें समय मिलता है तो नेत्र रोगियों को अपने कक्ष में बुलाकर उनकी जांच करते हैं।
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वे प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों की आंखों की जांच कर रहे हैं। साथ ही करीब छह से आठ ऑपरेशन भी कर रहे हैं। डॉ. रखोलिया कहते हैं कि गरीब आदमी अपने इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर है। कोराना महामारी के बीच कोई भी मरीज जिला अस्पताल में इलाज से वंचित न रहे, इसके लिए वह पूरी कोशिश करते रहते हैं।
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कोरोना से जंग में डॉक्टर तन-मन से जुटे हैं डॉक्टर
काशीपुर। कोरोना से जंग में डॉक्टर तन-मन से जुटे हुए हैं। उन्हें लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह भी नहीं है।
काशीपुर सरकारी अस्पताल के डॉ. राजीव गुप्ता की कोरोना ओपीडी, रेपिड रेस्पांस टीम, आइसोलेशन वार्ड में ही तैनाती है। वह रोजाना योग और नाश्ता करने के बाद आठ बजे ड्यूटी पर चले जाते हैं। अस्पताल से लौटने पर परिवार को संक्रमण से बचाने के लिए खुद को एक कमरे में सीमित किया हुआ है। डॉ. राजीव कहते हैं कि वह बीते तीन महीने से अपने परिवार से दूर हैं। अलग कमरे में रहना, खाना पड़ रहा है। उनके माता-पिता बीमार हैं।
वह मुरादाबाद में भाई संजीव गुप्ता के साथ रहते हैं। कोरोना की ड्यूटी के कारण वह उनसे नहीं मिल पा रहे हैं। डॉ. गुप्ता का कहना है कि कोरोना से बचने के लिए लोगों को जागरूक होना चाहिए।
वहीं ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. मनु पांडे की ड्यूटी काशीपुर-ठाकुरद्वारा यूपी के बॉर्डर पर सूर्या चौकी में लगी हुई है। डॉ. पांडे ठाकुरद्वारा में रहते हैं। डॉ. मनु पांडे ने बताया कि उनका सात साल का पुत्र अपूर्व व एक साल की पुत्री सानवी है। पत्नी ज्योति पांडे गृहणी हैं। उनके पिता व माता भी उनके साथ ही रहते हैं। डॉ. पांडे ने बताया कि वह अपने बच्चों से कम ही मिल पाते हैं। वह घर पहुंचकर स्वयं ही कपड़े धोते हैं और अलग कमरे में रहते हैं। उनका कहना कि बच्चों को खिलाने का मन करता हैं लेकिन बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ रहा है। ब्यूरो

डॉ. राजीव गुप्ता।- फोटो : KASHIPUR

जिला अस्पताल स्थित अपने केबिन में नेत्र जांच करते पीएमएस डॉ. टीडी रखोलिया।- फोटो : RUDRAPUR