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संस्कृत के विकास के लिए एकजुटता पर दिया जोर
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संस्कृत के संरक्षण, संवर्द्धन और सार्वभौमिक प्रचार के लिए उत्तराखंड संस्कृत अकादमी हरिद्वार के सहयोग से ऑनलाइन व्याख्यानमाला आयोजित की गई। मौके पर वक्ताओं ने संस्कृत के महत्व व भविष्य की संभावनाओं व रोजगार पर चर्चा की गई।
संस्कृत मास महोत्सव के शुभारंभ पर आयोजित ऑनलाइन व्याख्यानमाला में संस्कृति के विकास के लिए एकजुट कार्य करने पर जोर दिया गया। अकादमी के पूर्व सचिव डॉ. सुरेश चरण बहुगुणा की अध्यक्षता में हुए ऑनलाइन संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि महंत स्वामी शिवानंद महाराज ने कहा संस्कृत से सदा सभी को लाभ होता रहेगा। देववाणी संस्कृत को सभी विद्यालयों में अनिवार्य विषय के रूप में स्वीकृति मिलनी चाहिए। मुख्य वक्ता प्रो. हरि प्रसाद ने कहा कि छात्र-छात्राएं संस्कृति के प्रति रुचि ले रहे हैं। वर्तमान में कई छात्र-छात्राएं विभिन्न संस्थाओं में अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। अकादमी के शोध अधिकारी डॉ. हरीश चंद्र गुरुरानी ने प्रदेश स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों के बारे में बताया। डॉ. कंचन तिवारी ने कहा कि छात्र संस्कृत पढ़कर ज्योतिषाचार्य, शिक्षक, आयुर्वेदाचार्य, वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ बनकर सफल हो सकते हैं। इस मौके पर उप निदेशक डॉ. वाजश्रवा आर्य, एनसी नौटियाल, सुखदेव सिलोड़ी, डॉ. सीपी उप्रेती, डॉ. एनएन पोखरियाल, एसएल गौड़, धीरज बिष्ट, दिवाकर डिमरी, पंकज पंत, शशि बमोला, सचिंद्र नौटियाल, प्रदीप कोठारी, रोशन गौड़ आदि मौजूद थे।
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संस्कृत मास महोत्सव के शुभारंभ पर आयोजित ऑनलाइन व्याख्यानमाला में संस्कृति के विकास के लिए एकजुट कार्य करने पर जोर दिया गया। अकादमी के पूर्व सचिव डॉ. सुरेश चरण बहुगुणा की अध्यक्षता में हुए ऑनलाइन संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि महंत स्वामी शिवानंद महाराज ने कहा संस्कृत से सदा सभी को लाभ होता रहेगा। देववाणी संस्कृत को सभी विद्यालयों में अनिवार्य विषय के रूप में स्वीकृति मिलनी चाहिए। मुख्य वक्ता प्रो. हरि प्रसाद ने कहा कि छात्र-छात्राएं संस्कृति के प्रति रुचि ले रहे हैं। वर्तमान में कई छात्र-छात्राएं विभिन्न संस्थाओं में अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। अकादमी के शोध अधिकारी डॉ. हरीश चंद्र गुरुरानी ने प्रदेश स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों के बारे में बताया। डॉ. कंचन तिवारी ने कहा कि छात्र संस्कृत पढ़कर ज्योतिषाचार्य, शिक्षक, आयुर्वेदाचार्य, वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ बनकर सफल हो सकते हैं। इस मौके पर उप निदेशक डॉ. वाजश्रवा आर्य, एनसी नौटियाल, सुखदेव सिलोड़ी, डॉ. सीपी उप्रेती, डॉ. एनएन पोखरियाल, एसएल गौड़, धीरज बिष्ट, दिवाकर डिमरी, पंकज पंत, शशि बमोला, सचिंद्र नौटियाल, प्रदीप कोठारी, रोशन गौड़ आदि मौजूद थे।
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