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साहब! हम तो बेटे की आस भी छोड़ चुके थे, पुलिस भगवान बनकर आई

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 11 Dec 2019 12:27 AM IST
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Sir We had left the hope of the son, the police came as god
रुद्रपुर। पुलिस की मजबूत पड़ताल ने दो दंपतियों को दो दिन और ढाई साल पहले अगवा हुए बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया। अपने लाडलों के मिलने की खुशी दोनों दंपतियों के चेहरों पर खुशी देखते ही बन रही थी। वहीं, ढाई साल से अधिक समय बीतने के बाद बेटा मिलने की आस छोड़ चुके शिवम के माता-पिता पुलिस को भगवान बताते रहे। इस केस का दिलचस्प पहलू यह रहा कि सितंबर में पुलिस ने शिवम के मामले में एफआर लगा दी गई थी।
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दरअसल 20 सितंबर 2017 को ट्रांजिट कैंप के शमशान घाट रोड से तीन साल की उम्र में शिवम का खेलते हुए अपहरण हो गया था। परिजनों ने उसकी रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी। उस वक्त शिवम के माता-पिता ने एक-दूसरे पर बच्चे को गायब करने के आरोप भी मढ़े थे। बच्चे के गायब होने के बाद दोनों में कई बार थाने और एसएसपी कार्यालय में तकरार देखने को मिली थी। शिवम तीन बेटों में दूसरे नंबर का था। काफी प्रयासों के बाद भी पुलिस जब शिवम को खोज नहीं पाई तो परिजनों ने उसके मिलने की आस तक छोड़ दी थी। मंगलवार को ढाई साल बाद पेशे से ई रिक्शा चालक- चरन सिंह और उसकी पत्नी शकुंतला ने सवा दो साल बाद शिवम को अपने पास सुरक्षित पाया तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना न रहा। उसके और चरन सिंह के आंखों से खुशी के आंसू छलक आए।
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शकुंतला का कहना था कि साहब! हमने तो शिवम के मिलने की आस छोड़ दी थी। उन्होंने शिवम की खोजबीन में काफी भागदौड़ की थी। थाने और पुलिस अधिकारियों के चक्कर भी खूब काटे थे लेकिन कोई पता नहीं चलने पर हताश हो गए थे। जिस पुलिस से उनका एतबार उठ गया था, वह ही भगवान बनकर आई और बेटे शिवम को सकुशल खोजकर ला दिया। हालांकि शिवम की ओर से उन्हें नहीं पहचानने पर शकुंतला का दर्द भी उभर आया। उसका कहना था कि ढाई साल पहले शिवम उसका दामन नहीं छोड़ता था और आज वही शिवम उसको पहचान नहीं रहा है। इसका उसको दुख हुआ। शिवम तीन साल से अब पांच साल से अधिक का हो गया है। अगर शिवा का केस नहीं होता तो शायद ही उन्हें खोया हुआ बेटा नहीं मिल पाता।
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शिवम केस में काफी भागदौड़ के बाद भी सफलता नहीं मिलने पर सितंबर में इस केस में एफआर लगा दी गई थी लेकिन शिवा के केस की विवेचना करते हुए शिवम का केस भी खुल गया। दोनों दंपतियों को उनका खोए बेटे मिल गए, इस बात की खुशी है। - बरिंदरजीत सिंह, एसएसपी।
अब अपने बच्चों को हिफाजत का रखेंगे ख्याल
रुद्रपुर। शिवा और शिवम के केस में अभिभावकों की लापरवाही भी सामने आई है। दोनों ही बच्चों को परिजनों ने अकेले खेलने के लिए छोड़ दिया था। इसका ही फायदा उठाकर गीता ने दोनों का अपहरण कर उन्हें बेच दिया था। दोनों बच्चे मिलने के बाद परिजन उनको अकेला खेलने के लिए नहीं छोड़ने की बात कह रहे हैं। एसएसपी ने भी दोनों दंपतियों को बच्चों को अकेला नहीं छोड़ने की बात कही। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों को पार्क या अन्य जगहों पर अकेला न खेलने दें। अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर संजीदा रहें।
फुटेज के साथ ही स्कूल की ड्रेस और हुलिया बना मददगार
रुद्रपुर। ट्रांजिट कैंप के दुर्गा पार्क से मासूम शिवा के अपहरण की गुत्थी को सुलझाने के लिए मुख्य आरोपी गीता तक पहुंचने के लिए पुलिस को सीसीटीवी फुटेज के साथ ही गीता के बेटे द्वारा पहनी गई स्कूल ड्रेस ने मदद की। ड्रेस में बने लोगों के आधार पर पुलिस ने स्कूल से बच्चे के बारे में मालूमात की और बच्चे की फोटो दुर्गा पार्क में खेलने वाले बच्चों को दिखाई गई। दोनों जगहों से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने बेटे की मदद से उसकी मां गीता तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। शिवा के साथ ही दो पहले अगवा हुए शिवम को भी बरामद कर दोहरी सफलता हासिल की।
दरअसल रविवार की रात भगवान देवी ने बच्चा गायब होने की सूचना ट्रांजिट कैंप थाने की पुलिस को मिली तो खलबली मच गई। पुलिस ने सबसे पहले सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो पार्क के सामने लगे मकान में बच्चे को एक दूसरा बच्चा ले जाता हुआ दिखा था। पुलिस ने पूरी फुटेज गहनता से जांची तो पहली बार में दो बच्चे शिवा को ले जाते दिखे थे। थोड़ी आगे जाकर शिवा वापस पार्क में आता दिखाई दिया। कुछ देर बाद एक बच्चा शिवा को पार्क से बाहर ले जाता हुआ कैद हुआ था और मैदान में खड़े दूसरा बच्चा उसको इशारा करते हुए दिखा था। इसके बाद पुलिस ने मैदान में खड़े बच्चे पर जांच का फोकस किया था। बच्चे ने एक स्कूल की बनियान पहनी थी, इस पर स्कूल का लोगो लगा था। पुलिस ने लोगो और ड्रेस के रंग के आधार पर स्कूल जाकर बच्चे की फोटो दिखाकर शिनाख्त कराई। इसके अलावा फोटो को पार्क में खेलने वाले बच्चों को भी दिखाया था। बच्चे की चुटिया भी निकली थी, इससे भी पहचान में मदद मिली थी। स्कूल और बच्चों से मिली जानकारी के बाद बच्चे की शिनाख्त गीता के बेटे के रूप में हुई थी। एसओ विद्यादत्त जोशी ने बताया कि गीता के बेटे से पूछताछ की गई तो उसने पार्क से शिवा को एक दूसरे बच्चे के सहारे बाहर ले जाकर अपनी मां को सौंपने की बात कबूली थी। गीता पार्क के समीप ही खड़ी थी और शिवा को लेकर सीधे अपने कमरे में चली गई थी। उसके बेटे ने पहले भी एक बच्चे को इसी तरह से अगवा कराया था, इसलिए उसे इस बार कोई दिक्कत नहीं हुई थी। कहा कि एक केस की वजह से दो साल पुराना केस भी खुल गया।
गीता ने खेलने की उम्र में बेटे को अपराध में किया शामिल
रुद्रपुर। जिस उम्र में बच्चे अच्छी तालीम लेकर भविष्य संवारने की ओर कदम रखते हैं, उस उम्र में गीता ने अपने बच्चे को अपराध की तालीम दी। उसने दो साल पहले बेटे को हथियार बनाकर शिवम का अपहरण कराया था। फिर शनिवार को शिवा का अपहरण भी अपने बेटे के जरिए कराया था। गीता के बेटे ने पुलिस को बताया कि ऐसा करने से इनकार करने पर उसके साथ मां मारपीट करती थी। वह एक निजी स्कूल में पहली कक्षा का छात्र है। एसएसपी ने बताया कि इस प्रकरण में गीता के पति की भूमिका नहीं पाई गई है।
किसी भी अकेले बच्चे पर थी नजर, शिवा हुआ अगवा
रुद्रपुर। मासूम बच्चों के अपहरण और बेचने के आरोप में पकड़ी गई गीता ने बताया कि उसकी बच्चे को लेकर संतोष से डीलिंग हो गई थी। इसके बाद उसने दुर्गा पार्क में खेलने वाले बच्चों में से किसी के अपहरण का तानाबाना बुना था। इसके लिए उसने अपने बेटे को पार्क में भेजा था। बेटे को समझाया था कि बिना परिजनों के खेल रहे बच्चे को पार्क से उस तक पहुंचाना है। इसके बाद बेटे ने एक बच्चे की मदद से शिवा को पार्क से निकालकर कुछ दूरी पर खड़ी मां को सौंप दिया था।
दो साल से शिवम से बन गया अमन
रुद्रपुर। दो पहले शिवम को शमशान घाट रोड ट्रांजिट कैंप से अगवा कर बरेली निवासी छंगेलाल को बेचा गया था। इसके बाद शिवम का नाम बदलकर छंगेलाल ने अमन रख दिया था। दो साल तक अमन के रुप में शिवम को नए माता-पिता के साथ नए नाम की पहचान मिली थी। जब पुलिस ने शिवम को बरामद किया तो वह अपना नाम अमन बताता रहा। इतना ही नहीं वह अपने वास्तविक माता शकुंतला और पिता चरन सिंह की गोद में जाते ही रोने लगा था। वह उनके पास जाने से भी कतरा रहा था। बड़ी मुुश्किल से उन्होंने अपने बेटे को संभाला। अपने जिगर के टुकड़े को खुद को पहचान नहीं पाता देख उनके आंखों से आंसू निकल गए।

जिस सीसीटीवी फुटेज से मिली मदद, उसे लगाने वाला सम्मानित
रुद्रपुर। पुलिस टीम को शिवा की बरामदगी में दुर्गा पार्क के सामने स्थित भवन में लगे सीसीटीवी से महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे थे। इसी फुटेज के जरिए पुलिस ने बच्चा ले जाने वाले दो बच्चों की पहचान कराई थी। मंगलवार को एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने भवन स्वामी प्रवीन कुमार उर्फ मोनू ठाकुर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि प्रवीन के सीसीटीवी फुटेज खुलासे में काफी मददगार बनी थी। कैमरों की गुणवत्ता अच्छी होने की वजह से बच्चों के साफ फोटो मिले थे, इनमें पहचान करने में दिक्कत नहीं हुई।
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