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सवालों पर हंगामा बरपा फिर वॉकआउट
अमर उजाला ब्यूरो/ रुद्रप्रयाग
Updated Thu, 17 Nov 2016 10:26 PM IST
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रामगंगा जिले की मांग को लेकर गैरसैंण के कालीमाटी में प्रदर्शन करते हुए द्वारहाट व भिकियासैंण के लोग।
- फोटो : amar ujala.
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विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल के दौरान सरकार स्कूलों के उच्चीकरण, मानकों, भोजन माताओं के भत्ते के मुद्दे पर विपक्ष के निशाने पर रही। शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी निशाने पर रहे। उनके होमवर्क नहीं कर आने पर सवाल खड़े हुए। अंत में विपक्ष ने सदन से सांकेतिक परित्याग कर सरकार के जवाबों पर आपत्ति दाखिल करवाई।
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प्रश्नकाल का पहला सवाल ही सरकार के गले की फांस बन गया। भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना ने राज्य में इंटरमीडिएट कॉलेजों के भवन विहीन होने को लेकर सवाल पूछा, जिसका जवाब देने में शिक्षा मंत्री घिर गए। मंत्री ने राज्य में केवल छह स्कूल ही भवन विहीन होने की बात कही, जिसपर विधायक मदन कौशिक ने घेर लिया।
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कई स्कूलों में भवन की स्थिति विपक्ष के विधायकों ने रखी। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने सीएम हरीश रावत पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार का होमवर्क नहीं है। सीएम खुद विभागों की समीक्षा बैठक करते हैं तो वह स्पष्ट करें कि स्कूलों में भवन के मानक क्या हैं?
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सीएम ने पूर्व की भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि वर्ष 2007-2011 के बीच जिन स्कूलों का उच्चीकरण हुआ उसी बैकलॉग को सरकार पूरा कर रही है। चरणबद्ध तरीके से उच्चीकरण के तहत मानकों को पूरा किया जा रहा है। इस पर विपक्ष ने मानकों के नियमों और उन नियमों में कितने स्कूल फिट नहीं बैठते इसका विवरण मांगा तो सरकार घिर गई।
यह हैं मानक
मानकों के अनुसार हाईस्कूल में न्यूनतम छह कक्ष, एक प्राचार्य कक्ष, एक कार्यालय, एक स्टाफ रूम और एक कंप्यूटर लैब के अलावा एक प्रयोगशाला कक्ष होना चाहिए। इंटरमीडिएट कॉलेज में न्यूनतम 10 कक्ष, चार प्रयोगशाला कक्ष, एक प्राचार्य कक्ष, एक कार्यालय कक्ष, एक स्टाफ कक्ष और एक कंप्यूटर कक्ष अनिवार्य है। इस मानक को पूरा न करने वाले स्कूलों का विवरण शिक्षा मंत्री सदन में नहीं दे पाए।
भोजनमाताओं के भत्ते पर वॉकआउट
भाजपा विधायक पूर्ण सिंह फर्त्याल के भोजनमाताओं के मानदेय को लेकर पूछे सवाल में सरकार को फजीहत झेलनी पड़ी। शिक्षा मंत्री नैथानी के मुताबिक भोजनमाताओं का मानदेय एक अगस्त 2016 को पांच सौ रुपये बढ़ाकर दो हजार कर दिया है। इसे और बढ़ाने की मांग पर सत्ता पक्ष ने केंद्र पर ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि केंद्र पोषित योजना के तहत अगर केंद्र सरकार अनुदान बढ़ा दे तो वह मानदेय बढ़ा देंगे। विधायक मदन कौशिक न्यूनतम मजदूरी दिए जाने के तहत न्यूनतम पांच हजार रुपये देने की मांग करते रहे, लेकिन सीएम हरीश रावत विचार करने का आश्वासन दे पाए।
इसके बाद जब फर्त्याल ने सदन में बताया कि भोजन माताओं का मानदेय पांच सौ रुपये बढ़ाने की बात गलत है अभी तक उनको केवल 15 सौ रुपये मिल रहे हैं, जिसके बाद सरकार घिर गई। छह माह पहले आदेश होने के बावजूद मानदेय नहीं बढ़ने को विपक्ष ने शर्मनाक बताते हुए सदन का परित्याग कर दिया।
परिवहन मंत्री ने दिखाया बढ़ा दिल
विकलांगों की परिवहन निगम की बसों में सीटें आरक्षित नहीं होने के सवाल पर परिवहन मंत्री ने साफ किया कि ऐसा नहीं है। इस पर हरिद्वार विधायक मदन कौशिक ने अपने क्षेत्र में विकलांग स्कूल के बच्चों के लिए बस नहीं रोके जाने का मुद्दा उठाया तो मंत्री नवप्रभात ने कहा कि वहां विशेष बस चलाई जाएगी।
अब हिंदी में बोर्ड की अंकतालिका
भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना ने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के अंकपत्रों और प्रमाण पत्रों को हिंदी में प्रकाशित करने का सवाल रखा। शिक्षा मंत्री ने सदन में स्थिति साफ करते हुए कहा कि मार्क शीट में कुछ तथ्यों को अंग्रेजी में रखा है, बाकी हिंदी में है। अगर विपक्ष पूरी मार्क शीट का विवरण हिंदी में चाहता है तो विभाग उसे हिंदी में करने की प्रक्रिया अपनाएगा।