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मठ-मंदिरों की महत्ता से कराएंगे परिचित
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रप्रयाग
Updated Fri, 25 Dec 2015 05:49 PM IST
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इसके माध्यम से बदरी-केदार के रावल जहां दक्षिण भारत में सुरक्षित उत्तराखंड सुरक्षित चारधाम का संदेश देंगे, वहीं समिति के अधिकारी/कर्मचारी अधीनस्थ मठ-मंदिरों के महात्म्य का प्रचार-प्रसार करेंगे।
इस वर्ष चारधाम में उमड़े श्रद्धालुओं की भीड़ को देखतेे हुए बीकेटीसी अधीनस्थ मंदिरों को भी यात्रा से जोड़ने जा रही है। यहां, देश-विदेश के श्रद्धालु अधिकाधिक संख्या में पहुंचे इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। समिति के पदाधिकारी, अधिकारी/कर्मचारी व पदाधिकारी देश के विभिन्न प्रांतों व शहरों में इन मठ-मंदिरों की महत्ता व पूजा महत्व के बारे में धार्मिक सम्मेलन, गोष्ठी, पंपलेट आदि के जरिये लोगों को अवगत कराएंगे। इसके अलावा यात्रा समाप्त होने के बाद से समिति के आग्रह पर श्रीबदरीनाथ व श्रीकेदारनाथ धाम के रावल इन दिनों दक्षिण भारत में सुरक्षित उत्तराखंड सुरक्षित चारधाम का संदेश दे रहे हैं।
बीकेटीसी के अधीन हैं 52 मंदिर
बीकेटीसी के अधीनस्थ 52 मंदिर है। इन मंदिरों में श्रीबदरीनाथ, श्री केदारनाथ के अलावा श्री नवदुर्गा मंदिर, बौराड़ी नई टिहरी, इंदेश्वर महादेव मंदिर, पैठाणी पौड़ी, बिंदेश्वर मंदिर, बिनसर पौड़ी, अनुसूया मंदिर गोपेश्वर व चंद्रबदनी मंदिर देहरादून है। श्रीबदरीनाथ मंदिर के अधीनस्थ 29 व श्रीकेदारनाथ मंदिर के अधीनस्थ 16 प्राचीन मंदिर भी है।
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पूजा के बारे में दी जाएगी जानकारी
रुद्रप्रयाग। बीकेटीसी श्रीबदरीनाथ धाम में होने वाली 25 प्रकार की पूजा और केदारनाथ धाम में होने वाली 22 प्रकार की पूजाओं की जानकारी भी श्रद्धालुओं तक पहुंचाएगी। बदरीनाथ धाम में जहां महाभिषेक/अभिषेक, गीता पाठ, वेद पाठ, कपूर आरती, स्वर्ण आरती, चांदी की आरती, अष्ठोतरी आदि प्रमुख हैं, वहीं केदारनाथ धाम में महाभिषेक, रुद्राभिषेक और लघु रुद्राभिषेक सहित अन्य पूजाएं शामिल हैं।
चारधाम के अलावा अन्य अधीनस्थ मंदिरों में भी यात्रा व शीतकाल में अधिकाधिक श्रद्धालु पहुंचे, इसके लिए वृहद प्रचार-प्रचार की योजना बनाई गई है। रावल जी सहित समिति के लोग इस कार्य में जुटे हैं। --बीडी सिंह, मुख्य कार्याधिकारी बीकेटीसी
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इस वर्ष चारधाम में उमड़े श्रद्धालुओं की भीड़ को देखतेे हुए बीकेटीसी अधीनस्थ मंदिरों को भी यात्रा से जोड़ने जा रही है। यहां, देश-विदेश के श्रद्धालु अधिकाधिक संख्या में पहुंचे इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। समिति के पदाधिकारी, अधिकारी/कर्मचारी व पदाधिकारी देश के विभिन्न प्रांतों व शहरों में इन मठ-मंदिरों की महत्ता व पूजा महत्व के बारे में धार्मिक सम्मेलन, गोष्ठी, पंपलेट आदि के जरिये लोगों को अवगत कराएंगे। इसके अलावा यात्रा समाप्त होने के बाद से समिति के आग्रह पर श्रीबदरीनाथ व श्रीकेदारनाथ धाम के रावल इन दिनों दक्षिण भारत में सुरक्षित उत्तराखंड सुरक्षित चारधाम का संदेश दे रहे हैं।
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बीकेटीसी के अधीन हैं 52 मंदिर
बीकेटीसी के अधीनस्थ 52 मंदिर है। इन मंदिरों में श्रीबदरीनाथ, श्री केदारनाथ के अलावा श्री नवदुर्गा मंदिर, बौराड़ी नई टिहरी, इंदेश्वर महादेव मंदिर, पैठाणी पौड़ी, बिंदेश्वर मंदिर, बिनसर पौड़ी, अनुसूया मंदिर गोपेश्वर व चंद्रबदनी मंदिर देहरादून है। श्रीबदरीनाथ मंदिर के अधीनस्थ 29 व श्रीकेदारनाथ मंदिर के अधीनस्थ 16 प्राचीन मंदिर भी है।
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पूजा के बारे में दी जाएगी जानकारी
रुद्रप्रयाग। बीकेटीसी श्रीबदरीनाथ धाम में होने वाली 25 प्रकार की पूजा और केदारनाथ धाम में होने वाली 22 प्रकार की पूजाओं की जानकारी भी श्रद्धालुओं तक पहुंचाएगी। बदरीनाथ धाम में जहां महाभिषेक/अभिषेक, गीता पाठ, वेद पाठ, कपूर आरती, स्वर्ण आरती, चांदी की आरती, अष्ठोतरी आदि प्रमुख हैं, वहीं केदारनाथ धाम में महाभिषेक, रुद्राभिषेक और लघु रुद्राभिषेक सहित अन्य पूजाएं शामिल हैं।
चारधाम के अलावा अन्य अधीनस्थ मंदिरों में भी यात्रा व शीतकाल में अधिकाधिक श्रद्धालु पहुंचे, इसके लिए वृहद प्रचार-प्रचार की योजना बनाई गई है। रावल जी सहित समिति के लोग इस कार्य में जुटे हैं। --बीडी सिंह, मुख्य कार्याधिकारी बीकेटीसी