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भवन तो बना, कक्षा-कक्षों की फिर भी कमी
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Fri, 15 Apr 2016 09:39 PM IST
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दस वर्ष में करीब डेढ़ करोड़ खर्च करने के बाद वर्ष 2015 में जीजीआईसी को अपना नया भवन तो मिला, लेकिन कक्षा-कक्ष हाईस्कूल स्तर के हैं। वर्तमान सत्र में जुलाई माह से यहां स्कूल संचालन होना है। कक्षा 11वीं और 12वीं पढ़ाई कहां होगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
मुख्य बाजार से करीब दो किमी की दूरी पर तूना-बौंठा मार्ग पर बिलोटा में निर्मित बालिका इंटर कालेज के नए भवन का फरवरी में उद्घाटन हो चुका है। विभाग ने संचालन के निर्देश भी विद्यालय प्रबंधन को दे दिए हैं, लेकिन इस नए भवन में सिर्फ पांच कक्षा- कक्ष बने हैं। प्रयोगात्मक विषयों की पढ़ाई के लिए प्रयोगशाला कक्ष नहीं हैं। स्कूल के अतिरिक्त फर्नीचर व अन्य विद्यालय सामग्री के लिए भवन में पर्याप्त जगह नहीं है।
विदित हो कि वर्ष 2005-06 में जीजीआईसी के नए भवन के लिए 83.85 लाख रुपये स्वीकृत किए गए, लेकिन हाईस्कूल स्तर के भवन के लिए। जैसे-तैसे दस वर्ष में भवन तो बन गया। इस बीच स्कूल उच्चीकृत होकर इंटरमिडिएट हो गया तो यहां कक्षा-कक्षों की कमी हो गई। यहां जूनियर कक्षाओं के लिए मीड-डे-मील बनाने के लिए किचन भी नहीं बना है। दूसरी तरफ वर्तमान में जहां जीजीआईसी चल रहा है, वहां भी दयनीय हालत है।
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जीजीआईसी की स्थिति में अधर में लटकने जैसे हो रखी है। नए भवन में पर्याप्त कक्ष व अन्य सुविधाएं नहीं हैं। यहां हाईस्कूल तक की कक्षाएं चल पाएंगी। ऐसे में इंटर कक्षाओं का संचालन कहां करें। जुलाई में क्या होगा, समझ से परे है।- डा. ममता नौटियाल, प्रधानाचार्या, जीजीआईसी रुद्रप्रयाग
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मुख्य बाजार से करीब दो किमी की दूरी पर तूना-बौंठा मार्ग पर बिलोटा में निर्मित बालिका इंटर कालेज के नए भवन का फरवरी में उद्घाटन हो चुका है। विभाग ने संचालन के निर्देश भी विद्यालय प्रबंधन को दे दिए हैं, लेकिन इस नए भवन में सिर्फ पांच कक्षा- कक्ष बने हैं। प्रयोगात्मक विषयों की पढ़ाई के लिए प्रयोगशाला कक्ष नहीं हैं। स्कूल के अतिरिक्त फर्नीचर व अन्य विद्यालय सामग्री के लिए भवन में पर्याप्त जगह नहीं है।
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विदित हो कि वर्ष 2005-06 में जीजीआईसी के नए भवन के लिए 83.85 लाख रुपये स्वीकृत किए गए, लेकिन हाईस्कूल स्तर के भवन के लिए। जैसे-तैसे दस वर्ष में भवन तो बन गया। इस बीच स्कूल उच्चीकृत होकर इंटरमिडिएट हो गया तो यहां कक्षा-कक्षों की कमी हो गई। यहां जूनियर कक्षाओं के लिए मीड-डे-मील बनाने के लिए किचन भी नहीं बना है। दूसरी तरफ वर्तमान में जहां जीजीआईसी चल रहा है, वहां भी दयनीय हालत है।
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जीजीआईसी की स्थिति में अधर में लटकने जैसे हो रखी है। नए भवन में पर्याप्त कक्ष व अन्य सुविधाएं नहीं हैं। यहां हाईस्कूल तक की कक्षाएं चल पाएंगी। ऐसे में इंटर कक्षाओं का संचालन कहां करें। जुलाई में क्या होगा, समझ से परे है।- डा. ममता नौटियाल, प्रधानाचार्या, जीजीआईसी रुद्रप्रयाग