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दस क्विंटल फूलों से सजा मंदिर, आज खुलेंगे केदारनाथ के कपाट
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मंगलवार को केदारनाथ मंदिर को दस कुंतल गेंदा व अन्य फूलों से सजाया गया।
- फोटो : RUDRAPRYAG
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केदारनाथ मंदिर के कपाट आज बुधवार मेष लग्न में सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर खोल दिए जाएंगे। इसके लिए केदारनाथ मंदिर को दस क्विंटल फूलों से सजाया गया है। अब छह महीने तक बाबा केदार की पूजा धाम में ही होगी।
तड़के मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग बाबा की समाधि पूजा के साथ अन्य सभी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करेंगे। ऊखीमठ तहसील प्रशासन की मौजूदगी में कार्यक्रम संपन्न होगा।
देवस्थानम बोर्ड ने कपाट खोलने की तैयारी पूरी कर ली है। बोर्ड के प्रभारी अधिकारी बीडी सिंह का कहना है कि कोरोना संक्रमण की आशंका के चलते इस बार आम श्रद्धालुओं को धाम जाने की अनुमति नहीं है। बोर्ड के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि यात्राकाल के लिए बाबा केदार की पूजा-अर्चना के लिए जरूरी पूजन सामग्री भी डोली के साथ धाम पहुंचा दी गई है।
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बर्फ काटकर बनाया चार फीट का रास्ता
रूद्रप्रयाग। संगम से लेकर केदारनाथ मंदिर परिसर तक बर्फ को काटकर चार फीट से अधिक चौड़ा रास्ता बनाया गया है। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि केदारनाथ मंदिर तक सुगमता से पहुंचा जा सके।
बाबा की डोली ने किया धाम में विश्राम
रूद्रप्रयाग। बाबा केदार की डोली ने देवस्थानम बोर्ड के कार्यालय में विश्राम किया। यहां पर मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग ने आराध्य की पूजा-अर्चना कर आरती की और भोग लगाया।
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तड़के मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग बाबा की समाधि पूजा के साथ अन्य सभी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करेंगे। ऊखीमठ तहसील प्रशासन की मौजूदगी में कार्यक्रम संपन्न होगा।
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देवस्थानम बोर्ड ने कपाट खोलने की तैयारी पूरी कर ली है। बोर्ड के प्रभारी अधिकारी बीडी सिंह का कहना है कि कोरोना संक्रमण की आशंका के चलते इस बार आम श्रद्धालुओं को धाम जाने की अनुमति नहीं है। बोर्ड के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि यात्राकाल के लिए बाबा केदार की पूजा-अर्चना के लिए जरूरी पूजन सामग्री भी डोली के साथ धाम पहुंचा दी गई है।
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बर्फ काटकर बनाया चार फीट का रास्ता
रूद्रप्रयाग। संगम से लेकर केदारनाथ मंदिर परिसर तक बर्फ को काटकर चार फीट से अधिक चौड़ा रास्ता बनाया गया है। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि केदारनाथ मंदिर तक सुगमता से पहुंचा जा सके।
बाबा की डोली ने किया धाम में विश्राम
रूद्रप्रयाग। बाबा केदार की डोली ने देवस्थानम बोर्ड के कार्यालय में विश्राम किया। यहां पर मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग ने आराध्य की पूजा-अर्चना कर आरती की और भोग लगाया।