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केदारनाथ में अब भी मौजूद हैं आपदा के जख्म

Thu, 10 Mar 2016 10:38 PM IST
अमर उजाला/केदारनाथ।
अमर उजाला/केदारनाथ। Updated Thu, 10 Mar 2016 10:38 PM IST
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Kedarnath disaster scarred
केदारनाथ में आपदा के जख्म - फोटो : अमर उजाला

धाम में पुनर्निर्माण कार्य जोरों पर होने के बावजूद आपदा के जख्म अब भी जहां-तहां मौजूद हैं। मलबे के ढेर, भारी बोल्डर और टूटे आवासीय मकान/धर्मशाला बर्बादी की कहानी बयां कर रहे हैं। यात्रा सीजन शुरू होने वाला है, ऐसे में इन जख्मों पर मलहम लगाने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि जब इस सीजन में यात्री आएं तो वह केदार धाम की नई तस्वीर मन में    बसाकर जाएं।

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दिसंबर 2013 से केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण के दौर से गुजर रहा है। यहां एमआई-26 हेलीपैड से लेकर वैली ब्रिज सहित कई निर्माण हो चुके हैं। यात्रा भी पिछले वर्ष से पटरी पर लौट चुकी हैं। बावजूद इसके जलप्रलय के कहर के निशान अब भी सिहरन पैदा करते हैं। रुद्रा प्वाइंट से एमआई-26 हेलीपैड पर पहुंचने के बाद से मलबे के ढेर शुरू हो जाते हैं। मंदिर मार्ग के मंदिर परिसर के निकट तक टूटे भवन, सरिया सहित खिसके पिलर, लटकी छतें और हवा में झूलती टीन की चादरें अब भी नजर आती हैं। यहां हल्की सी चूक जीवन पर भारी पड़ सकती है। कुछ टूटे मकानों के अंदर झांकने पर आज भी मलबे में दबी रजाई, कपड़े और अन्य सामग्री जस की तस पड़ी हैं। मंदिर के ठीक पीछे काफी बड़े क्षेत्र में भारी बोल्डर बिखरे पड़े हैं। मंदिर के बाईं तरफ नदी से लगे भवन भी टूटे पड़े हैं।
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ढाई वर्ष से केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण हो रहे हैं। केदारपुरी को नई तकनीकी से सुरक्षा घेरे में बांधा जा रहा है। निम के मजदूरों से लेकर मशीनों की आवाजें हिमालयी क्षेत्र में गूंज रही हैं। बावजूद यहां आज भी अजीब सा सूनापन महसूस किया जा सकता है। केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित दिनेश बगवाड़ी और माधव कर्नाटकी का कहना है कि जब तक केदारपुरी की वृहद स्तर पर सफाई नहीं की जाती, तब तक खतरा बना रहेगा।
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चरणबद्ध तरीके से केदारनाथ में पुनर्निर्माण के तहत काम किए जा रहे हैं। दूसरे चरण के काम अंतिम दौर में हैं। इसके बाद टूटे भवनों सहित केदारपुरी की सफाई का कार्य किया जाएगा। इसके लिए शासन स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है।- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग

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