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365 मंदिरों में रह गए 20, वह भी दयनीय

रुद्रप्रयाग। Updated Sun, 17 Apr 2016 09:29 PM IST
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उत्तराखंड राज्य गठन के 15 वर्षों बाद भी जनपद में नारायणकोटी मंदिर समूह तीर्थाटन का हिस्सा नहीं बन पाया। केदारनाथ यात्रा मार्ग स्थित प्राचीन मंदिर समूह के मंदिर देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे जर्जर होकर खंडहर हो रहे हैं। छोटे-बड़े 360 मंदिरों में से अब यहां गिनती के 20 मंदिर ही रह गए हैं। इनकी भी स्थिति दयनीय बनी हुई है।
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रुद्रप्रयाग से करीब 45 किमी की दूरी पर स्थित नारायणकोटी का विशेष महत्व है। यहां प्राचीन मंदिर समूह है, जो शिल्प कला का अद्भुत नमूना है। केदारखंड में भी इस मंदिर समूह का उल्लेख मिलता है। मंदिर समूह को 9वीं ईसवी से पूर्व का बताया जाता है। प्राकृतिक आपदाओं और देखरेख नहीं होने से यहां 360 मंदिरों के समूह में अब 20 मंदिर ही रह गए हैं। स्थानीय निवासी जबर सिंह, सच्चिदानंद पुजारी, लखपत राणा बताते हैं कि जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और पुरातत्व विभाग को अवगत कराने के बाद भी सुध नहीं ली जा रही है। मंदिर समूह को अगर तीर्थाटन और पर्यटन से जोड़ा जाता तो इनके संरक्षण के साथ ही लोगों को रोजगार भी मिलता।


यहां मौजूद नवग्रह मंदिर
नारायणकोटी मंदिर समूह परिसर में मौजूद मंदिरों में नौ ग्रह मंदिर भी विराजमान हैं। इन पर ग्रहों के प्रतीक के रूप स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक दीवार पर ग्रहों के मंत्र गढ़े अक्षरों में लिखे गए हैं। स्थानीय लोग ग्रहों की पूजा और व्रतों की शांति के लिए यहां पहुंचते हैं। इसके अलावा यहां लक्ष्मीनारायण, वीरभद्र और सत्यनारायण मंदिर शामिल हैं।


दो जल धाराओं का कुंड
नारायणकोटी मंदिर समूह परिसर में पत्थरों से बना कुंड है, इसे वीरभद्र कुंड कहते हैं। कुंड में गंगा-यमुना की दो जलधाराएं बहती हैं। श्रद्धालु इस जल को अपने घरों ले जाते हैं। माना जाता है कि इस जल का सेवन करने से शरीर के कई विकार दूर होते हैं।  


इनका कहना है -
समय-समय पर श्रमदान कर मंदिर समूह में सफाई की जाती है। जिलाधिकारी और गढ़वाल सांसद को मंदिरों के संरक्षण के लिए पत्र भेजा गया है। बीडीसी में भी कई बार मुद्दा उठाने के बाद भी पर्यटन और पुरातत्व विभाग की नींद नहीं टूट रही है।
--- जमुना देवी, ग्राम प्रधान नारायणकोटी (भेतसेम) गुप्तकाशी


हमारे अधीन अधीन गढ़वाल में 35 मठ-मंदिरों के संरक्षण की जिम्मेदारी है, लेकिन शासन से इनकी मरम्मत और सुधारीकरण के लिए पर्याप्त धन नहीं मिल पा रहा है। इन हालात में नारायणकोटी मंदिर समूह सहित अन्य मंदिरों के संरक्षण में दिक्कतें हो रही हैं।
--- अनिल नेगी, अनुश्रवण सहायक भारतीय पुरातत्व विभाग पौड़ी।


जारी -

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