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वन प्रभाग ने दुगलबिट्टा से 40 टेंट हटाए
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उच्च न्यायालय के आदेश के तहत भारतीय वन अधिनियम की धारा 61 के अंतर्गत रुद्रप्रयाग वन प्रभाग ने पर्यटक स्थल दुगलबिट्टा में अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई की गई है। इस दौरान 4 लोगों के 40 टेंट हटाए गए हैं, जबकि अन्य के टेंट जल्द हटाए जाएंगे। साथ ही इन सभी लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।
बीते सोमवार को प्रभाग के अगस्त्यमुनि व जखोली रेंज के वन क्षेत्राधिकारी यशवंत सिंह चौहान और गौरव नेगी राजस्व विभाग और पुलिस टीम के साथ दुलगबिट्टा पहुंचे। उन्होंने यहां पहले से चिह्नित अवैध अतिक्रमण के खिलाफ मौके पर कार्रवाई शुरू करते हुए 40 टेंट हटाए। वन विभाग के अधिकारियों का कहना था कि इन लोगों को उच्च न्यायालय के माध्यम से पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। बावजूद, टेंट खाली नहीं किए गए हैं, जिससे कार्रवाई की गई है। रेंजर चौहान व नेगी ने बताया कि दुगलबिट्टा में मैगपाई के 11 टेंट, भज इको के 14 टेंट, माउंटेन डिलाइट के 11 टेंट व नेचर नेस्ट के 6 टेंट हटाए गए हैं। कहा कि अवैध अतिक्रमण के मामले में 29 को टेंट/हट्स हटाए जाने हैं, जिन्हें नोटिस भेजे जा चुके हैं। शेष लोगों के टेंट भी इसी सप्ताह हटाए जाएंगे।
दूसरी तरफ प्रभावित हट्स/टेंट संचालक मनोज भंडारी आदि का कहना है कि वन विभाग ने 5 मार्च को नोटिस भेजे और 7 मार्च को उनके टेंट हटा दिए हैं। एक तरफ शासन-प्रशासन और विभाग पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं, लेकिन बिना पर्यटन नीति के उन्हें इस तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। कोरोनाकाल के चलते पहले ही दो वर्ष से पर्यटन की गतिविधियां ठप पड़ी थी। अब, वन विभाग की इस कार्रवाई से दुगलबिट्टा क्षेत्र में काम कर रहे कई युवा बेरोजगार हो गए हैं। इधर, रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओ वैभव कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 में जिला प्रशासन के सहयोग से चोपता, दुगलबिट्टा, बनियाकुंड में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई गई थी। तब, पूरे क्षेत्र में कुल 55 अतिक्रमणकारियों को चिह्नित किया गया था, जिनके द्वारा बुग्यालों में बेतरतीव हट्स व टेंट लगाए गए हैं। जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद इन सभी लोगों को कोर्ट के माध्यम से नोटिस जारी कर दिए गए थे। भारतीय वन अधिनियम की धारा 61 के तहत डीएफओ को अधिकार है कि वन भूमि में अतिक्रमण के खिलाफ बेदखली का अधिकार है। साथ ही अतिक्रमणकारी को अधिकार है कि वह डीएफओ के आदेश के खिलाफ कंजरवेटर कार्यालय में अपील कर सकता है। इसी के तहत 26 अतिक्रमणकारियों द्वारा कंजरवेटर कार्यालय से स्टे लाया गया है। मामले में सुनवाई के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम की धारा 26 के तहत वन भूमि को अवैध रूप से तोड़ने, खोदने के मामले में कोर्ट में मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।
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बीते सोमवार को प्रभाग के अगस्त्यमुनि व जखोली रेंज के वन क्षेत्राधिकारी यशवंत सिंह चौहान और गौरव नेगी राजस्व विभाग और पुलिस टीम के साथ दुलगबिट्टा पहुंचे। उन्होंने यहां पहले से चिह्नित अवैध अतिक्रमण के खिलाफ मौके पर कार्रवाई शुरू करते हुए 40 टेंट हटाए। वन विभाग के अधिकारियों का कहना था कि इन लोगों को उच्च न्यायालय के माध्यम से पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। बावजूद, टेंट खाली नहीं किए गए हैं, जिससे कार्रवाई की गई है। रेंजर चौहान व नेगी ने बताया कि दुगलबिट्टा में मैगपाई के 11 टेंट, भज इको के 14 टेंट, माउंटेन डिलाइट के 11 टेंट व नेचर नेस्ट के 6 टेंट हटाए गए हैं। कहा कि अवैध अतिक्रमण के मामले में 29 को टेंट/हट्स हटाए जाने हैं, जिन्हें नोटिस भेजे जा चुके हैं। शेष लोगों के टेंट भी इसी सप्ताह हटाए जाएंगे।
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दूसरी तरफ प्रभावित हट्स/टेंट संचालक मनोज भंडारी आदि का कहना है कि वन विभाग ने 5 मार्च को नोटिस भेजे और 7 मार्च को उनके टेंट हटा दिए हैं। एक तरफ शासन-प्रशासन और विभाग पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं, लेकिन बिना पर्यटन नीति के उन्हें इस तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। कोरोनाकाल के चलते पहले ही दो वर्ष से पर्यटन की गतिविधियां ठप पड़ी थी। अब, वन विभाग की इस कार्रवाई से दुगलबिट्टा क्षेत्र में काम कर रहे कई युवा बेरोजगार हो गए हैं। इधर, रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओ वैभव कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 में जिला प्रशासन के सहयोग से चोपता, दुगलबिट्टा, बनियाकुंड में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई गई थी। तब, पूरे क्षेत्र में कुल 55 अतिक्रमणकारियों को चिह्नित किया गया था, जिनके द्वारा बुग्यालों में बेतरतीव हट्स व टेंट लगाए गए हैं। जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद इन सभी लोगों को कोर्ट के माध्यम से नोटिस जारी कर दिए गए थे। भारतीय वन अधिनियम की धारा 61 के तहत डीएफओ को अधिकार है कि वन भूमि में अतिक्रमण के खिलाफ बेदखली का अधिकार है। साथ ही अतिक्रमणकारी को अधिकार है कि वह डीएफओ के आदेश के खिलाफ कंजरवेटर कार्यालय में अपील कर सकता है। इसी के तहत 26 अतिक्रमणकारियों द्वारा कंजरवेटर कार्यालय से स्टे लाया गया है। मामले में सुनवाई के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम की धारा 26 के तहत वन भूमि को अवैध रूप से तोड़ने, खोदने के मामले में कोर्ट में मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।
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